‘नौकर की कमीज़’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘एक चुप्पी जगह’ जैसी कृतियों से हिंदी साहित्य को एक अनोखी, भीतर तक उतरने वाली भाषा देने वाले विनोद कुमार शुक्ल भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी उसी सादगी और संवेदनशीलता के साथ हमारे जीवन से […]
