आजकल के बदलते परिवेश में टेक्नोलॉजी जीवन का एक अभिन्न अंग बनता जा रहा है। जाने-अनजाने हम सभी इसकी गिरफ्त में आ गए हैं। आजकल के बच्चे अपने प्रश्नों का उत्तर ढूंढऩे के लिए किताबें खंगालने की बजाय गूगल का सहारा लेते हैं। ऐसे में टेक्नोलॉजी का ये दौर बच्चों के मानसिक विकास के लिए प्रश्नचिह्न बनता जा रहा है।
Tag: parenting
बच्चे की स्किन को ऐसे बनाए रखें सॉफ्ट
जितना जरूरी आपके लिए अपनी स्किन का ध्यान रखना होता है उससे कहीं ज्यादा ज़रूरी बच्चे की स्किन का ध्यान रखना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों की स्किन बेहद कोमल और मुलायम होती है और उन्हें अधिक देखभाल की जरूरत होती है। बचपन में ही अगर उनकी स्किन को सही देखभाल मिल जाए तो बड़े होने तक उनकी स्किन और ज्यादा मुलायम हो जाती है। लेकिन बच्चों की स्किन सॉफ्ट बनाने के लिए केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना ठीक नहीं होता है।
सैंटा के रूप में बच्चों को दें इस तरह क्रिस्मस का तोहफा
क्रिसमस का त्यौहार यानि चॉकलेट्स और गिफ्ट्स का त्यौहार | क्रिसमस नजदीक आ चुका है और हम जानते हैं कि आप ज़रूर इस कशमकश मे होंगे कि कौन से उपहार देकर इस साल बच्चों को खुश किया जाए ।
विंटर वैकेशन में बच्चों के लिए एक्टिविटीज
सर्दियां आई नहीं कि पैरेंट्स की सबसे बड़ी चिंता होती है कि बच्चों को सर्दी की छुट्टियों में कहां व्यस्त रखा जाए। ऐसी कौन सी एक्टिविटी कराई जाए कि पैरेंट्स और बच्चे छुट्टियों का भरपूर आनंद उठा पाएं। इन सर्दियों में आपको अपने बच्चों के शैतानियों से परेशान होने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि ये मज़ेदार विंटर-ब्रेक एक्टिविटीज आपके बच्चों को घर के अंदर और बाहर पूरे ठंढे मौसम में व्यस्त और खुश रखेंगी।
पहली सर्दी में नवजात शिशु का रखें खास ध्यान
एक बार जब पसीने की गर्मी खत्म हो गई है और चिपचिपे मानसून ने भी अलविदा कह दिया है , तो अब वक़्त आ गया है अपने चेहरे पर भीनी सी मुस्कान लिए हुए सर्दियों का स्वागत करने का। वैसे तो सर्दियों का मौसम सभी के लिए कुछ अलग ही एहसास लेकर आता है लेकिन नवजात और उसकी मां के लिए ये मौसम बेहद ख़ास है। बच्चे को ठंड के प्रकोप से बचाने का तरीका हो या फिर उसे कंबल ओढ़ाने की जद्दोजहद हो, नवजात शिशु की मां हर पल इसी चिंता में डूबी रहती है कि कहीं बच्चे को ठंड न लग जाए और वो बीमार न पड़ जाए।
बच्चों की इम्यूनिटी करनी है स्ट्रांग तो हर बार जर्म्स से न बचाएं
अक्सर पैरंट्स को ऐसा ही लगता है कि जर्म्स उनके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसलिए वो बच्चों को जर्म्स से बचाने की कोशिश करते हैं। जमीन से गिरी चीज़ उठाकर खाने से मना करते हैं , खाने से पहले हाथ ठीक से धुलने के लिए बोलते हैं और जरूरत से ज्यादा सफाई का ध्यान देते हैं। जो कि बच्चों की इम्यूनिटी के लिए ठीक नहीं है।
बच्चों को करना है इम्प्रेस तो ऐसे जाएं पैरेंट्स टीचर मीटिंग में
माता-पिता और बच्चों का रिश्ता सबसे करीबी रिश्तों में से एक होता है। अगर हम पुराने समय और आज के समय की तुलना करें तो आज माता-पिता और बच्चों का रिश्ता काफी बदल गया है। पुराने समय में माता-पिता की बात बच्चे सुनते थे और मानते भी थे। जबकि, आज के समय में माता-पिता अपने बच्चे की बात सुनते और मानते हैं।
बच्चों के लिए जरूरी है फैमिली टाइम
सभी पैरेंट्स अपने बच्चे को एक बेहतर भविष्य देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। माता-पिता अपने बच्चे को सारी सुख सुविधाएं देने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सुख सुविधाओं से बढ़कर होता है फैमिली टाइम। बच्चों के लिए एक सुरक्षित और प्यार वाला घर होना और परिवार के साथ समय बिताना जैसे पैरेंट्स का साथ में खेलना ,खाना , पढ़ाई में सहयोग देना और बातें करना बहुत महत्वपूर्ण है।
पैरेंट्स का बच्चों की पढ़ाई में इन्वॉल्वमेंट है उनकी सफलता की सीढ़ी
कहा जाता है किसी इमारत की मजबूती उसकी बुनियाद पर निर्भर करती है। उसी तरह यदि बच्चों की नींव मजबूत होगी तभी उनका विकास होगा। बच्चों के विकास में सबसे अहम् भूमिका उनके पैरेंट्स की होती है। इसीलिए पैरेंट्स का बच्चों की पढ़ाई में भी पूरा इन्वॉल्वमेंट ज़रूरी है।
बच्चों की इन गलत आदतों का कारण आप तो नहीं हैं ?
बच्चों के लिए एक कहावत है कि उन्हें जिस सांचे में ढाला जाएगा वो आसानी से ढल जाएंगे। इसीलिए माता-पिता अपने बच्चों में हर तरह से अच्छी आदतें डालने की कोशिश करते हैं और अच्छे संस्कार के सांचे में ढालने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
