Mother Poem: सोचती हूं कभी की, क्या कभी मां भी कमसिन रही होगी?क्योंकि हमने तो बस हमेशा मां को सिर्फ मां ही होते देखाना देखा उनका बचपन,ना उन्हें जवां होते देखा,मां को बस हमने मां होते देखा… कितनी खूबसूरत लगी होगी मां मेरी,जब उनके द्वारे पर शहनाई बजी होगी।हर कली मुस्कुराई होगी,जब मेरी मां दुल्हन […]
Tag: Mother Poem
Posted inकविता-शायरी, Latest
माँ तुम बहुत याद आती हो-गृहलक्ष्मी की कविता
Mother Poem: वो जो कहती थी “जाओ माँ…..जब मैं हॉस्टल जाऊंगीतुम्हें बिलकुल याद नहीं करूंगी”वो अब मुझे दिन – रात याद करती हैंतुम्हारें बगैर कितनी अधूरी हूँ माँये शिकायत हर रात मुझसे करती हैं!सिर्फ तुम्हारें इर्द -गिर्द हीं होने सेमेरी हर परेशानी दूर हो जाती थीमैं खामोश रहती थी औरतुम सबकुछ समझ जाती थी!वो प्यार […]
