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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-7

Gaban novel by Munshi Premchand: दूसरे दिन सवेरे ही रमा ने रमेश बाबू के घर का रास्ता लिया। उनके यहां भी जन्माष्टमी में झांकी होती थी। उन्हें स्वयं तो इससे कोई अनुराग न था, पर उनकी स्त्री उत्सव मनाती थी, उसी की यादगार में अब तक यह उत्सव मनाते जाते थे। रमा को देखकर बोले-‘आओ […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-6

Gaban novel by Munshi Premchand: रमा दफ्तर से घर पहुंचा, तो चार बज रहे थे। वह दफ्तर ही में था कि आसमान पर बादल घिर आए। पानी गिरना ही चाहता था, पर रमा को घर पहुंचने की इतनी बेचैनी हो रही थी कि उससे रुका न गया। हाते के बाहर भी न निकलने पाया था […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-5

Gaban novel by Munshi Premchand: रमा के परिचितों में एक रमेश बाबू म्यूनिसिपल बोर्ड में हेड़ क्लर्क थे। उम्र तो चालीस के ऊपर थी, पर थे बड़े रसिक। शतरंज खेलने बैठ जाते, तो सवेरा कर देते। दफ्तर भी भूल जाते। न आगे नाथ न पीछे पगहा। जवानी में स्त्री मर गई थी, दूसरा विवाह नहीं […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-4

Gaban novel by Munshi Premchand: रात के दस बज गए थे। जालपा खुली हुई छत पर लेटी हुई थी। जेठ की सुनहरी चांदनी में सामने फैले हुए नगर के कलश, गुंबद और वृक्ष स्वप्न-चित्रों से लगते थे। जालपा की आंखें चंद्रमा की ओर लगी हुई थीं। उसे ऐसा मालूम हो रहा था, मैं चंद्रमा की […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-3

Gaban novel by Munshi Premchand: महाशय दयानाथ जितनी उमंगों से ब्याह करने गए थे, उतना ही हतोत्साह होकर लौटे। दीनदयाल ने खूब दिया, लेकिन वहां से जो कुछ मिला, वह सब नाच-तमाशे, नेगचार में खर्च हो गया। बार-बार अपनी भूल पर पछताते, क्यों दिखावे और तमाशे में इतने रुपये खर्च किए। इसकी ज़रूरत ही क्या […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-2

Gaban novel by Munshi Premchand: मुंशी दीनदयाल उन आदमियों में से थे, जो सीधों के साथ सीधे होते हैं, पर टेढ़ों के साथ टेढ़े ही नहीं, शैतान हो जाते हैं। दयानाथ बड़ा-सा मुंह खोलते, हजारों की बातचीत करते, तो दीनदयाल उन्हें ऐसा चकमा देते कि वह उम्र- भर याद करते। दयानाथ की सज्जनता ने उन्हें […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद भाग-1

Gaban novel by Munshi Premchand: बरसात के दिन हैं, सावन का महीना । आकाश में सुनहरी घटाएँ छाई हुई हैं । रह-रहकर रिमझिम वर्षा होने लगती है । अभी तीसरा पहर है; पर ऐसा मालूम हो रहा है, शाम हो गयी । आमों के बाग़ में झूला पड़ा हुआ है । लड़कियाँ झूल रहीं हैं […]

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ग़बन – मुंशी प्रेमचंद

(Gaban) ग़बन : एक परिचय Gaban Hindi Novel: ‘गबन’ प्रेमचंद का एक बहुचर्चित उपन्यास है, यह प्रेमचंद ने तब लिखा था जब वे आदर्शोन्मुख यथार्थवाद विचारधारा से बेहद प्रभावित थे। वस्तुतः उस दौर में लिखे गए उनके सभी उपन्यास एक आदर्श स्थापित करते थे। शुरुआत में नायक कैसा भी हो अथवा कैसी भी स्थिति में […]

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