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भाग्य या दुर्भाग्य – गृहलक्ष्मी कहानियां

राजा की आंखों के आगे अंधेरा छा गया वह वहीं एक कुर्सी पर सिर पकड़कर बैठ गया और सोचने लगा कि यह सब क्या हो गया? अब वह रानी को क्या जवाब देगा और मां से क्या कहेगा? अब उसकी जेबों में उसका भाग्य था और घर में बिखरा हुआ दुर्भाग्य था।

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