दोपहिया वाहन चलाने वालों को अगर यह समाचार मिल जाए कि आगे हेलमेट चेकिंग चल रही है तो चालक रास्ता बदल देता। कुछ अपनी डिक्की में रखे हेलमेट को पहन लेते हैं। यह सब चालक केवल चालान से बचने के लिए करते हैं। इन दोपहिया वाहन चालकों को एक्सीडेंट से मौत का डर नहीं लगता, इसलिए हेलमेट नहीं लगाते।
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तेज़ाब – गृहलक्ष्मी कहानियां
तेज़ाब से किसी चेहरे को बिगाड़ देने जैसी हरकत वे लोग करते हैं, जो कभी भी अपनी शख्सियत को संवार नहीं पाते। क्या वाकई तेज़ाब का असर किसी के बुलंद हौसलों से ज़्यादा होता है, जानिए इस सशक्त कहानी द्वारा-
आजकल की लड़कियों की पहली पसंद – गृहलक्ष्मी कहानियां
हमें आज दर्द का एहसास तभी क्यों होता है, जब वह खुद हमें ही या हमारे अपनों को ही होता है? जब एक अपराधी सज़ा से बचता है, उसी पल सौ अपराधों की पृष्ठभूमि तैयार हो जाती है। प्रस्तुत है ऐसी ही एक सटीक-सशक्त और प्रासंगिक कहानी-
दूसरी पारी – गृहलक्ष्मी कहानियां
मई महीने की ढेर गर्म दोपहरी में इंसानों के साथ- साथ इमारतें भी भट्टी बन गई थीं। मौसम की तल्खी यथावत जारी थी। दो-चार लोगों से पता पूछने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया ही था उसी में विवेक के माथे का पसीना किसी बंद नल से रिसते पानी की बूंदो की तरह टप-टप […]
मूछों वाली देवरानी – गृहलक्ष्मी कहानियां
अरे! कविता बेटा, जरा मेहमानों के लिए चाय नाश्ता तो ला। जी अम्मा, अभी लाई। मैं मेहमानों के सामने चाय और पकौड़े रख कर आ गई। वैसे तो अम्मा कभी मुझसे बहुत खास खुश नहीं रहती पर आज बहुत खुश है। देवरजी का रिश्ता जो आया है। मेरी परिवार में मैं हूं, मेरे पति जो कि एक अध्यापक हैं, मेरी प्यारी सासू मां जिन्हें मैं प्यार से अम्मा कहती हूं और मेरे देवर जी। देवरजी पढ़ने में बहुत अच्छे थे। थोड़े ही प्रयास में उन्हें अमेरिका में नौकरी मिल गई। जब से वह बाहर गए हैं मां के तो पैर ही जमीन पर नहीं रहते।
सेकंड चांस – गृहलक्ष्मी कहानियां
सेकंड चांस – रीमा जी के आँखों में बेटे से बिछुड़ने के आँशु थे… तो विजय जी की आँखों में गर्व की चमक था | उनका देखा सपना आज उनका बेटा जो पूरा करने जा रहा था | एक मद्यमवर्गी परिवार जिसके मुखिया विजय जी एक प्राइवेट नौकरी में थे | उनकी पत्नी रीमा जी […]
मिलियन डालर स्माइल – गृहलक्ष्मी कहानियां
हैपी बर्थडे टू यू मां, मे गॉड ब्लेस यू…’
पार्श्व में बजते संगीत के मध्य आभा अपनी अस्सी वर्षीय वयोवृद्धा मां को सहारा देते हुए लंदन के फाइव स्टार होटल में लाल गुलाबों, जलती हुई सुगंधित मोमबत्तियों और मां-पापा के बड़े-बड़े पोस्टरों से सजे डाइनिंग हाल में ले जा रही थीं।
फोन की घंटी लगातार बज रही थी – गृहलक्ष्मी कहानियां
फोन की घंटी लगातार बज रही थी। आज एकता ने सोच लिया था कि फोन नहीं उठाना है। सारा दिन फोन के ताने सुन-सुनकर उसके कान पक गए। जब मैं काम करती हूं तो कोई नहीं देखता मुझे।
उधार वाले खिस्को – गृहलक्ष्मी कहानियां
आज भोगीलाल जी मिले तो उनके रंग-ढंग निराले थे। हाथ में गोल्डन घड़ी। गले में गोल्डन चेन। आंखों पर गोल्डन चश्मा। गोल्डन मोबाइल। गोल्डन चेन से बंधा गोल्डन पट्टे वाला गोल्डन रिट्रीवर। छोटे-मोटे बप्पी लाहड़ी नज़र आ रहे थे अपने भोगी भाई। मैं चौंक गया। सामान्य सी नौकरी करने वाला व्यक्ति अचानक इस भेष में? और आज वो मुझसे मिले बिना ही निकले जा रहे थे। मुझे आवाज़ देकर बुलाना पड़ा।
मृत्यु गीत
“मम्मी ,काकी अभी तक नहीं आईं?”अकुलाकर द्वार की ओर
देखते हुये मुदिता ने कहा.
वह कबसे सजी संवरी सहेलियों के साथ बैठी थी.पड़ोस की औरतें साड़ियों
