परमात्मा शिव का मनुष्यों जैसा साकार शरीर नहीं है और ना ही सूक्ष्म देवताओं जैसा सूक्ष्म आकार है बल्कि वह तो ज्योतिस्वरूप, बिंदुरूप है जिसको नूर अथवा किंडली लाइट कहा गया है। अतः साकार और सूक्ष्म आकार की भेंट में निराकार कहा गया है । अर्थात् निराकार का अर्थ अशरीरी अथवा शरीर रहित है।
