Posted inधर्म

जानिए कैसे बदलता और बिगड़ता जा रहा है व्रतों का स्वरूप

    क्या हमारे जीवन में कोई ऐसा व्रत है जब हम कह सकें कि हम एक दिन के लिए गुस्सा छोड़ देंगे, किसी की निंदा या चुगली नहीं करेंगे या फिर हम वाट्सअप-फेसबुक या मोबाइल के बिना खुद को एक दिन रखेंगे? शायद नहीं। खाना-छोडऩा आसान है मंदिर जाना, माथा टेकना आसान है इसलिए […]

Posted inकविता-शायरी

ये वो बदनाम गलियां हैं जहां बिस्तर तो नसीब होता है लेकिन नींद नहीं..

    ये वो बदनाम गलियां हैं  जहाँ किस्मत भी अपना रुख करने से पहले  सौ दफ़े दम तोड़ती है।    जहाँ सूरज रोज़ उगता तो है मगर  सिर्फ धूप लाकर छोड़ देता है,  पर कोई सुबह नहीं लाता।   यहाँ दिन में कई बार रात होती है  और रात भी वो, जिसमें बिस्तर तो […]

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