किसी बात पर अड़ जाना, नाराज़ होना, हठ करना, ऐसा स्वभाव जरूरी नहीं है कि किसी खास आयु वर्ग से जुड़ा है, क्योंकि ऐसा व्यवहार केवल बच्चों में ही नहीं, बल्कि किशोर, वयस्क और यहां तक कि बुजुर्गों में भी देखा जा सकता है। इस तरह के लक्षण ऐसे शख्स के साथ काम करने की चुनौतियों को और बढ़ाते हैं।
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पेरेन्ट्स बच्चों से कभी न कहें ऐसी बात
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पेरेंट्स के कहे हर शब्द का, फिर चाहे वो पॉज़िटिव हो या नेगेटिव, बच्चों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए ये और भी जरूरी है कि बच्चे चाहे कैसे भी बिहेव कर रहे हों पेरेन्ट्स उन्हें समझाने या डांटने के लिए बहुत सोच समझकर अपने शब्दों का चयन करें। बच्चों […]
आर्यन, सुहाना हो या अबराम, बच्चों को बेहतर सिटिज़न बनाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ते शाहरुख
शाहरुख खान इंडस्ट्री के उन एक्टर्स में शामिल हैं जो कितना भी बिज़ी क्यों न हो अपने बच्चों को हमेशा टाइम देते हैं। शाहरुख को एक नहीं बल्कि कई बार आर्यन और सुहाना को कभी एयरपोर्ट पर रिसीव करते तो कभी उनके कॉलेज का फंक्शन अटेंड करते देखा गया है। छोटे बेटे अबराम को तो […]
आप भी फॉलो कर सकते हैं शाहरुख, सुष्मिता जैसे सेलेब्स के ये स्मार्ट पेरेन्टिंग मंत्रा
सिर्फ स्टाइल और ट्रेंड के लिए ही टीवी और बॉलीवुड स्टार्स को फॉलो न करें, बल्कि उनसे उनके स्मार्ट पेरेंटिंग स्किल्स भी सीखें।
