ईश्वर ने महान पुरुषों को विशेष रूप से निर्मित नहीं किया है। वे अपने ही प्रयासों द्वारा दक्ष बने हैं। जिस प्रकार बाकी सारी मानव जाति आत्म-स्वतंत्रता के प्रकाश के लिए संघर्ष करती है, उसी प्रकार उनको भी परिश्रम और संघर्ष करना पड़ा।
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मानव की प्रकृति – परमहंस योगानंद
भौतिक शरीर सोलह तत्त्वों से बना है। ईश्वर ने जिस प्रकार भौतिक पदार्थों के रसायनिक तत्त्वों को बुद्धि प्रकट करने के लिए मिलाया है वह एक चमत्कार है। फिर भी, यह शरीर कुछ भी हो, परन्तु पिरपूर्ण नहीं है। हम इससे ज्यादा अच्छे शरीर की कल्पना कर सकते हैं।
