डाइनिंग हॉल में बैठकर परिवार के सभी लोग नाश्ता कर रहे थे । मेहता जी एवं उनके बेटों के बीच बड़ी-बड़ी बातें हो रहीं थीं, कभी कॉरपोरेट ऑफिस तो कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी विधान सभा के मसलों पर और सुझाव दिए जा रहे थे।
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सहारा- बेसहारा – गृहलक्ष्मी कहानियां
पांव में दर्द आज कुछ ज़्यादा ही महसूस हो रहा था। शायद ठण्ड की दस्तक का असर था । बदन में सिहरन भी थी। बालकनी में बाहर निकल कर देखी तो रास्तों पर गाड़ियां भी कम ही दिख रही थी। सामने वाले पार्क में छोटे बच्चे दौड़- दौड़ कर खेल रहे थे,
