Kedarnath's doors are closed for Sara Ali Khan
Kedarnath's doors are closed for Sara Ali Khan

Overview: केदारनाथ में सारा अली खान की 'नो एंट्री

बद्री-केदार मंदिर समिति ने गैर-सनातनी लोगों के मंदिर प्रवेश पर रोक लगा दी है। अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यदि अभिनेत्री सारा अली खान दर्शन करना चाहती हैं, तो उन्हें शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा कि उनकी सनातनी धर्म में आस्था है। यह नियम चारधाम यात्रा 2026 से कड़ाई से लागू होगा।

Sara Ali Khan Kedarnath Controversy: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में प्रवेश को लेकर अब नियम सख्त कर दिए गए हैं। बद्री-केदार मंदिर समिति ने गैर-हिंदू और गैर-सनातनी व्यक्तियों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया है। इसी क्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के आगामी केदारनाथ दौरों को लेकर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने एक महत्वपूर्ण शर्त रख दी है। 17 मार्च 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि गैर-हिंदुओं को अब मंदिर के गर्भगृह और परिसर में प्रवेश के लिए अपनी आस्था का प्रमाण देना होगा। जब उनसे सारा अली खान (जो अक्सर केदारनाथ जाती हैं) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी अब एक हलफनामा (Affidavit) जमा करना होगा।

एफिडेविट में क्या लिखना होगा

Kedarnath's doors are closed for Sara Ali Khan
Kedarnath’s doors are closed for Sara Ali Khan

मंदिर समिति ने इस शपथ पत्र का एक खास प्रारूप (Format) तैयार किया है। इसके अनुसार गैर-हिंदू या गैर-सनातनी व्यक्ति को लिखित में यह घोषणा करनी होगी कि: “मैं सनातनी हूँ, मेरी सनातनी संस्कृति और हिंदुत्व में पूर्ण आस्था है।” अध्यक्ष ने साफ कहा कि जो भी व्यक्ति लिखित में अपनी आस्था व्यक्त करेगा, केवल उसे ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

सारा अली खान का केदारनाथ से खास रिश्ता

सारा अली खान ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘केदारनाथ‘ (2018) से की थी। तब से वे लगभग हर साल बाबा केदार के दर्शन के लिए आती हैं। सारा अक्सर माथे पर तिलक लगाए और पूजा-अर्चना करते हुए अपनी तस्वीरें साझा करती हैं। उनके पिता सैफ अली खान मुस्लिम हैं और मां अमृता सिंह हिंदू हैं। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए मंदिर समिति ने उन पर यह नया नियम लागू करने की बात कही है।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला

मंदिर समिति का कहना है कि यह निर्णय आदि शंकराचार्य के समय से चली आ रही परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता (Sanctity) बनाए रखने के लिए लिया गया है। 10 मार्च को हुई बैठक में गैर-सनातनी लोगों के गर्भगृह में प्रवेश पर पूर्ण रोक का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया था। हेमंत द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि यह नियम सभी के लिए समान है, चाहे वह कोई सेलिब्रिटी हो या आम नागरिक।

मोबाइल और रील बनाने पर भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

केवल एंट्री ही नहीं, मंदिर के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए अन्य पाबंदियां भी लगाई गई हैं मंदिर परिसर के 50-60 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। गर्भगृह के भीतर फोटो खींचने या ‘रील्स’ बनाने पर भारी जुर्माने और सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

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मैं रिचा मिश्रा तिवारी पिछले 12 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विभिन्न न्यूज चैनल के साथ काम करने के अलावा मैंने पीआर और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट का काम भी किया है। इतने सालों में मैंने डायमंड पब्लिकेशंस/गृह लक्ष्मी, फर्स्ट...