क्या आप खुद में असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी को महसूस करते हैं? अपनी सफलता के बाद भी आपको ऐसा लगता है कि सामने वाला आपको धोखा दे देगा? क्या आपको कभी कभी ऐसा लगता है जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं वो आपको छोड़कर चला जाएगा? आप हमेशा घर पर रहते हैं और बाहर निकलकर काम करने से डरते हैं? क्या आप खुद को दूसरों के सामने बदसूरत, मोटा, बीमार और क्रिमिनल समझते हैं? बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके दिल में ये सब बातें रहती हैं। इसका सीधा सा मतलब यही है कि वो खुद को असुरक्षित और आत्मविश्वास में कम समझते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी बात ये ही है कि उन्हें इन सब बातों से उपर उठाना चाहिए। अगर आप भी इन्हीं तरह की समस्या से जूझते हैं या आपका कोई दोस्त इस समस्या से प्रेषण रहता है तो आज का हमारा ये लेख खास तौर पर आपके लिए है, जिससे आपको मदद मिलेगी।उनकी सामान्य आदतें क्या हैं?

1. रिजेक्शन के आधार पर असुरक्षा– हमारे जीवन में हमारी ख़ुशी और मूड दोनों ही हमें प्रभावित करते हैं। बात ख़ुशी की करें तो ये अक्सर उन बातों पर आधारित होती हैं जिससे हमे अच्छा लगे। लेकिन जैसे ही किसी रिश्ते का अंत होता है या हमें कहीं से भी किसी भी तरह का रिजेक्शन मिलता है तो, ये ख़ुशी नकारात्मकता में बदल जाती है। जिससे हमारा आत्मसम्मान प्रभावित होता है। शोध की मानें तो रिजेक्शन सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। आप कुछ इस तरह खुद को इस तरह के नकारात्मक से सुरक्षित कर सकते हैं।
• अपने आप को खुश रखने के लिए खुद को समय दें।
• अपनी जरूरतों और ख़ुशी को देखते हुए दूसरों से मेलजोल बढाएं।
• थोड़ा समय अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ बिताएं।
• आप उनसे बात करें जिसपर आपको विश्वास हो।
• आत्मसम्मान बनाए रखें और आगे बढ़ते रहें।
• एक रिजेक्शन के बाद दूसरे रस्ते की तलाश करें।
2. सामाजिक चिंता– कई सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें सामाजिक यानी कि दूसरों की चिंता ज्यादा सताती रहती है, जिससे उनका आत्मसम्मान भी गिरता चला जाता है। आप ऐसी कई परिस्थियों से गुजरते हैं जहां आप उस बात से डरते हैं कि कोई आपको आपको जज ना कर बैठे। जिससे आपको चिंता होने लगती है। अगर पैरेंट्स द्वारा दूसरों से कम्पेयर किया जाता है तो उससे जुड़ा नकारात्मक प्रभाव हम पर ही पड़ता है। आप यही सोचते रहते हैं कि अगर मैंने कुछ किया तो दूसरे क्या सोचेंगे। ऐसे में ना सिर्फ असुरक्षा बढ़ती है, बल्कि आत्मविश्वास कम होता है। अगर आप भी इस तरह की परिस्थितयों से गुजर रहे हैं तो इस तरह उससे उबरने की कोशिश करें।
• खुद के अंदर से नकारात्मकता हटाने की कोशिश करें।
• खुद को दिलचस्प बनाएं।
• ऐसी चीजों के बारे में बात करें जिसे आप सोचते हैं।
• खुलकर पार्टी या डेट को इंजॉय करें।
• जितना दूसरों के साथ जुड़ेंगे उतना ही आप खुलेंगे।
• नये लोगों के बारे में जानने की कोशिश करें और उनसे बात करें।
• ऐसे लोगों से दूर रहें जो नकारात्मक बाते करें।
3. जब न मिले मन मुताबिक काम– लोगों के आत्मविश्वास और असुरक्षा तब और भी ज्यादा बढ़ा जाती है जब उनके मन मुताबिक उन्हें वो चीजे नहीं मिलतीं, जिनके बारे में उन्होंने प्लान किया था। ऐसा लगभग हर किसी के साथ ही होता है। इसका मतलब ये नहीं होता कि आप खुद को दूसरों के आगे गिरा लें। आपको आपकी मेहनत के अनुराप रिजल्ट नहीं मिलता तो आप वहीं ठहर जाएं और निराश हो जाएं। आप अपनी नाकामी का खुद को दोषी समझते हैं। और असुरक्षित और बेकार महसूस करने लगेंगे। अगर आप पूरी कोशिश करेें तो कड़ी मेहनत करने के दौरान आपको फायदा मिल सकता है। हमेशा चिंता और तनाव में रहना आपके अंदर अवसाद, पेट की समस्या और थकान का कारण बन सकता है। आप इन त्रिकोण से खुद का बचाव कर सकते हैं।
• आप खुद का आंकलन करें कि जो आपने मेहनत की है वो कितनी जायज थी।
• अगर आपके काम में 10 प्रतिशत भी बेहतरी होगी तो आपको आपका जवाब भी मिल जाएगा।
• क्या एक की विषय पर सोचते रहना वाजिब है? आप उस सोच से निकलिए।
• नये क्षेत्रों को खोजने का प्रयास करें।
• जितना हो सके सीखने की कोशिश करें।
• जितना सीखें उतने ही परिणाम की अपेक्षा रखें।
• बेहतर परिणाम के लिए मेहनत करते रहें।
• आप हमेशा एक सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
जिन्दगी में हार जीत लगी रहती है। कई ऐसे मौके आते हैं जब हताशा हाथ लगती है। जिससे ना सिर्फ मनोबल गिरने लगता है बल्कि आत्मसम्मान भी कम होने लगता है। इसका मतलब ये नहीं है कि हम उसी जगह पर ठहर जाएं, और खुद को समाजिक ही ना होने दें। इसका असर हमारे दिल दिमाग दोनों पर पड़ता है। इसके लिए आपको जरूरत है तो सिर्फ खुद पर विश्वास करने की और बिना रुके, बिना थके, बिना झुके लगातार आगे बढ़ते रहने की।

अरूबा कबीर, मेंटल हेल्थ थैरेपिस्ट, काउंसलर एंड फाउंडर ऑफ एनसो वैलनेस से बातचीत पर आधारित

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