देखा जाए तो महिलाओं के लिए उनकी कामुकता को कंट्रोल करना सिर्फ उनकी वर्जिनिटी पर निर्भर करता है। ये बात सिर्फ महिलाओं पर ही निर्भर करती है कि वो खुद के पर्सनल कारणों के चलते किसी से यौन सम्बंध नहीं बनाने का विकल्प चुनती हैं तो ये उनकी अपनी मर्जी होती है। हमें इस बात को स्वीकार भी करना चाहिए और इस बात पर कोई भी नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए। वर्जिनिटी की बात करें तो, इसके बारे में सभी जानते हैं, लेकिन खुलकर इस बारे में बात आज भी नहीं कर सकते। महिला या पुरुष होने के नाते हैरान करने वाली बात ये है कि समाज में महिलाओं की वर्जिनिटी को ज्यादा मूल्यवान समझा जाता है। बल्कि किसी पुरुष की वर्जिनिटी पर खास ध्यान नहीं दिया जाता। महिलाओं को जहां सेक्स के लिए शर्म महसूस करनी होती है, वहीं पुरुषों को इसके लिए वाह-वाही मिलती है।

महिलाओं और पुरुषों में सेक्स और वर्जिनिटी की धारणा

1. वर्जिनिटी को लेकर सीख– हैरान कर देने वाली बात ये है कि आधुनिक समय में भी महिलाओं को सिखाया जाता है कि उनकी वर्जिनिटी कितनी महत्व रखती है। अगर किसी तरह से समय से पहले विर्जिनिटी खराब हो जाए तो उन्हें समाजिक तौर पर स्वीकार नहीं जाता। वहीं पुरुषों की वर्जिनिटी होने पर उन्हें शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं पड़ती। वर्जिनिटी पवित्रता की निशानी समझी जाती है। अगर वर्जिनिटी नहीं है तो इससे महिला की अशुद्धता का अंदाजा लगा लिया जाता है।

2. वर्जिनिटी स्लट-शेमिंग- वर्जिनिटी की बात करें तो पूरी तरह महिलाओं पर निर्भर होता है कि वो कब और किसके साथ सेक्स करना चाहती हैं। गलत उम्र, गलत समय, या गलत भावनाओं के साथ अपनी अपनी वर्जिनिटी खोना के सामाजिक परिणाम हैं। जिससे उन्हें स्लट-शेमिंग को फेस करना पड़ता है। बहुत सरे लोग ऐसे हैं जो उनके कपड़ों को लेकर उन्हें जज करते हैं और मानने लगते हैं कि वो महिला किसी के साथ सोयी है जो शर्मनाक है। यौन मूल्यों के आधार पर सेक्स-नेगेटिव मानसिकता को दर्शाता है।

3. वर्जिनिटी फ्रेम्स– सामाजिक टूट पर देखा जाये तो वर्जिनिटी को लेकर महिला का फ्रेम सेट कर दिया गया है। पुरानी कहावत है कि एक महिला जितना ज्यादा ज्यादा सेक्स करती है उतनी ही अशुद्ध मानी जाती है। समाज आपका फ्रेम इस बात पर सेट करता है कि आप कितना सेक्स कर चुकी हैं। पुरुषों को सामाजिक रूप से सेक्स करने के लिए पुरस्कृत किया जाता है और महिलाओं को सामाजिक रूप से दंडित किया जाता है।

महिलाओं और पुरुषों में सेक्स और वर्जिनिटी की धारणा

4. वर्जिनिटी इज हेटरोनोर्मेटिव– सामाजिक तौर पर देखा जाए तो वर्जिनिटी को कसी महिला के आत्मसम्मान से भी ऊपर रखकर देखा जाता है। जब तक आप लिंग को योनी में नहीं डालते तब तक उसे सेक्स नहीं माना जाता।किसी भी तरह से, मौखिक और मैथुन की हमारी संस्कृति में कोई भी गिनती नहीं है। जबकि दोनों ही सेक्स का हिस्सा हैं। वर्जिनिटी समलैंगिक, गैर-विषमलैंगिक लोगों के अनुभवों को मिटा देती है।

5.महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव-देखा जाए तो हम उस देश में रहते हैं जहां आज भी महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव किया जाता है। बात जब वर्जिनिटी की करें तो महिला और पुरुष में इसका महत्व सामाजिक तौर पर बदल जाता है। अगर महिला शादी से पहले सेक्स करके अपनी वर्जिनिटी खो दें समाज में उसे अस्वीकार कर दिया जाता है। वहीं बात जब पुरुष की हो तो उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। ये बेहद ही ऐसा नाजुक मुद्दा है जिसकी बहस पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार चली आ रही है।

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