first period guidance for daughters
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Summary: टीनएजर को सही गाइडेंस, सहज शुरुआत

बेटियों को पहले पीरियड पर डराने के बजाय सहज भाषा में सही गाइडेंस देना हर माता-पिता की जिम्मेदारी है।

First Period Guidance: टीनएज का पहला चरण किसी भी लड़की के लिए बहुत ही संवेदनशील समय होता है। इस दौरान बच्चियां अपने शरीर में ऐसे बदलाव महसूस कर रही होती हैं जिन्हें वह बीमारी समझ लेती हैं। जैसे उनके ब्रेस्ट में हल्के दर्द का रहना, पहले मासिक चक्र अर्थात पीरियड्स का आना, उनके जननांगों के आसपास बालों का आना। बच्चियों के साथ ऐसा होने का एक सामान्य कारण समय पर सही जानकारी का ना मिलना है। भारतीय समाज में अक्सर देखा गया है कि जब तक लड़की को उसका पहला पीरियड्स न हो जाए तब तक उससे यह बात छुपाने की कोशिश करी जाती है। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि अक्सर बच्चियां अपने पहले पीरियड्स को बीमारी समझ लेती हैं। जिस कारण अक्सर एक तरह के शर्म, झिझक और शर्मिंदगी से भर जाती हैं जो कि उनके मासूम से मन पर गलत असर डालता है। आइए इस लेख में जानते हैं माता-पिता किस तरह समय रहते अपनी बच्चियों को सही जानकारी दे सकते हैं।

first period guidance for daughters
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अपने पहले पीरियड्स के दौरान ज्यादातर बच्चियों की स्थिति डर और भ्रम की होती है जैसे, मुझे कोई बीमारी तो नहीं हो गई, क्या यह सिर्फ मुझे ही हुआ है या मेरी सहेलियों को भी, अगर मैंने अपने दोस्तों को बताया तो वह क्या सोचेंगे। पहले पीरियड्स के समय इस तरह के सवाल बच्चियों के दिमाग में आना सामान्य है और इसका प्रमुख कारण है सही जानकारी का अभाव। समय रहते अगर बच्चियों को सही जानकारी न दी जाए तो वह अपने शरीर के स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रख पाती है। यहां तक की शर्म और डर के कारण वह इसके बारे में अपने पेरेंट्स से बात भी नहीं कर पाती हैं।

लड़कियों में किशोरावस्था की सामान्य उम्र 12 से 14 साल की होती है। लेकिन यह यह जरूरी नहीं है कि सभी बच्चों का पहला पीरियड्स इसी बीच हो कुछ को पहले या बाद में भी हो सकता है इसके कई कारण हो सकते हैं, शरीर का वजन, हार्मोन्स, खान-पान आदि। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को अपने बच्चों के विकास को देखते हुए 9 वर्ष की उम्र से सामान्य जानकारी देना शुरू कर देना चाहिए। जैसे, हर रोज अंडरगारमेंट्स का उपयोग करना, अपने प्राइवेट पार्ट्स को पानी से हर रोज वॉश करना जैसी बातें समझना चाहिए।

इसके अलावा पेरेंट्स अपने बच्चों के शरीर में हो रहे बदलावों के प्रति सामान्य भाषा में बता सकते हैं जैसे बेटा अब तुम पहले से थोड़ी बड़ी हो रही हो। हर साल सिर्फ तुम्हारी उम्र ही नहीं तुम्हारा शरीर भी बढ़ता है। शरीर के बाहर के अंगों के साथ अंदर के अंग भी बढ़ाते हैं जैसी बातें पेरेंट्स अपनी बच्चियों को समझ सकते हैं।

शारीरिक बदलाव की जानकारी: उम्र के साथ शरीर में बदलाव आना एक सामान्य प्रक्रिया है खासतौर से 11 से 13 साल की उम्र में। यह उम्र टीनएज की शुरुवात कहा जाता है। ऐसे में अगर तुम्हारे शरीर में बदलाव हो रहे हैं तो डरने की जरूरत नहीं है यह बिल्कुल सामान्य है तुम बिना शर्म के इसके बारे में हमसे बात कर सकती हो इस तरह की बातें पेरेंट्स अपने बच्चों को कह सकते हैं।

पीरियड्स के बारे में बताना: अपनी बच्चियों को बताएं पीरियड्स एक सामान्य प्रक्रिया है। इसकी शुरुआत 11 से 14 साल की उम्र में होता है और यह सभी लड़कियों को होता है। यह लड़कियों के स्वस्थ रहने के लिए जरूरी प्रक्रिया है। अगर बच्चे समझने की उम्र में है या उसके क्लास में टीनएज से जुड़ी जानकारियां लगी है तो आप वैज्ञानिक कारण के साथ भी उन्हें समझा सकते हैं।

हाइजीन का ध्यान: उन्हें बताएं पीरियड्स के दौरान वह पैड्स का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं। पैड के अलावा उनके पास और कौन से विकल्प हैं यह भी बताएं।

आपातकाल की तैयारी: उन्हें इस बात से जागरूक करें पीरियड्स का समय हर महीने कुछ दिन ऊपर या नीचे हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए उन्हें अपने साथ पीरियड्स किट जिसमें एक पैड, पैंटी और टिशूज साथ में रखना चाहिए।

असुविधा: पीरियड्स में दर्द होना सामान्य है पर सही लाइफस्टाइल और कुछ उपाय से इन्हें कम किया जा सकता है। इस तरीके की जानकारियां अपने बच्चों के साथ शेयर करें।

भावनात्मक सपोर्ट: मैं तुम्हारे दर्द को समझती हूं, तुम आराम करो, चलो कुछ अच्छा देखते हैं जैसी बातों से उन्हें अच्छा महसूस करवाएं।

मिथक से बचाएं: पीरियड शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें कुछ भी ऐसा नहीं जिससे शर्मिंदा होना पड़े। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और हर महिला के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है इस बात को अपने बच्चियों से जरूर कहें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...