पेरेंटिंग को लेकर लोगों की सोच और समझ में इन कुछ सालों में काफी फर्क आ गया है। यह फर्क साल दर साल बढ़ता जा रहा है। इसमें बहुत बड़ा हाथ सोशल मीडिया का भी है। अब के पेरेंट्स पहले से कहीं ज्यादा जानकारी वाले और जागरुक होते हैं। पहले जहां पेरेंटिंग के लिए लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होता था, वहीं अब पेरेंट होना अपने आप में एक चॉइस है। पेरेंटिंग अब कोई जरूरी नहीं रह गया है और आज के मिलेनियल लोग जानते हैं कि इसका क्या मतलब है।

मिलेनियल पेरेंट्स अपने बच्चों को पालते हैं अलग तरीके से

मिलेनियल पेरेंट्स अपने बच्चों को परंपरागत तरीके की पेरेंटिंग न करके प्रोग्रेसिव तरीके से उन्हें पालते हैं। वे पेरेंट बनने से पहले इसकी पूरी तैयारी करते हैं। वे अधिक ऑर्गेनाइज्ड रहते हैं और अपने करियर को अच्छे से खड़ा करने और अपने लिए सुरक्षित भविष्य बना लेने के बाद ही पेरेंटिंग की ओर कदम बढ़ाते हैं। इस तरह से वे अपनी लाइफ में ज्यादा स्थिर रहते हैं और अपने बच्चों को वह हर मदद देते हैं जिसकी उन्हें जरूरत रहती है। आज के समय में मिलेनियल मांओं ने भी स्टीरियोटाइप को तोडा है और अपने काम के साथ अपने बच्चों का पालन- पोषण भी बेहतरी से करती हैं।

मिलेनियल पेरेंट्स की योजना

पहले की पीढ़ियों की बजाय मिलेनियल पेरेंट्स ऑर्गेनाइज्ड होने के साथ ही अपने बच्चों के भविष्य को उनके होने से पहले ही सुरक्षित कर देते हैं। वे प्रेगनेंसी से पहले ही अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना चुके होते हैं। उनका करियर भी स्थिर रहता है, जो आगे उनकी और और उनके बच्चों की मदद करता है। फ़ोर्ब्स मैग्जीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 66% मिलेनियल पेरेंट्स अपने बच्चों की कॉलेज तक की पढाई के लिए सेविंग कर चुके होते हैं।

पॉजिटिव पेरेंटिंग पर जोर

मिलेनियल पेरेंट्स पॉजिटिव बच्चे के पालन- पोषण की महत्ता को समझते हैं। इसलिए, कमांड देने वाले पेरेंट की बजाय वे बेहतरीन कम्यूनिकेशन करने वाले पेरेंट्स बनना पसंद करते हैं, जो बच्चे की बातों को भी समझता हो। वे जानते हैं कि अगर वे कमांड देने वाले पेरेंट्स बनेंगे तो इससे उन दोनों के रिश्ते में दरार आ जाएगी। वे अपने बच्चों के लिए खुद निर्णय लेने की बजाय उन पर ये जिम्मेदारी डालते हैं कि वे खुद अपने लिए निर्णय लें।

बिजी लेकिन परिवार के लिए समय भी

आज के दौर में मिलेनियल पेरेंट्स के पास भी बहुत काम रहता है और वे अपने काम में बहुत बिजी भी रहते हैं। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है वे अपने परिवार और बच्चों को महत्व नहीं देते हैं। उनके लिए समय की कमी रहने के बावजूद वे अपने परिवार और बच्चों के लिए समय निकाल ही लेते हैं। और ऐसा सिर्फ महिलाएं ही नहीं कर रही हैं जिन्हें पहले सिर्फ होममेकर माना जाता था। उनके साथ पिता भी अपने बच्चों के लिए समय निकाल रहे हैं।

स्पेस और बाउंड्री पर भरोसा

मिलेनियल का मतलब आजादी और वैयक्तिकता से है। उन्हें जैसे दूसरों से मदद और प्यार की आकांक्षा रहती है, वैसे ही ये ‘स्व’ के आइडिया पर भी भरोसा करते हैं। इसका मतलब यह है कि मिलेनियल पेरेंट्स अपने बच्चों की वैयक्तिकता को समझते हैं और उन्हें नहीं बताते कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, बल्कि उन्हें स्पेस देते हैं।

 

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