A- सोने के समय बच्चे को छेडऩा या ह्रश्वयार करना नहीं चाहिए। उसके साथ आई कॉन्टेक्ट भी न बनाएं, यानी गौर से काफी देर देखना भी सही नहीं है। धीरे-धीरे थपथपा कर सुला दें।
B- शिशु को मालिश करने के बाद नहलाया जाता है। अत: गुनगुने पानी से हल्के हाथों से स्पर्श करते हुए नहलाएं। आवाज करने वाले खिलौने ना दें। इस तरह शिशु बिना आवाज के नहाने का अनुभव आनंददायक तरीके से लेगा। इसके बाद शिशु आमतौर पर सो जाता है।
C- अमेरिकन पेडियाट्री सोसायटी बच्चे के साथ एक ही बिस्तर पर सोने की सलाह नहीं देती है। अत: शिशु का पालना अपने बिस्तर के साथ ही रखें। इससे शिशु में शुरू से ही आत्मविश्वास बढ़ेगा।
D- कई शिशु रात में इसलिए उठ जाते हैं, क्योंकि उन्हें भूख लगने लगती है। अत: रात में सोते समय शिशु को दूध पिला दें। सोते समय दूध पी लेगा तो रातभर बिना जागे आराम से सो पाएगा।
E- बच्चे का पालना साफ-सुथरा हो। उसमें फालतू का सामान नहीं होना चाहिए। यदि आपको उसे गरम रखना है तो स्लीपिंग बैग में लिटाएं, कंबल में नहीं।
F- छह महीने से कम आयु वाले शिशुओं के पालने में खुशबू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बच्चे के कपड़े और बिस्तर बिना खुशबू वाले साबुन से धोनी चाहिए। छह महीने से बड़े बच्चों के पालने के पास एक-दो बूंद लेवेंडर ऑयल भी डाल सकते हैं। इससे बच्चे आराम से सो पाते हैं और चिड़चिड़ाते नहीं।
G- कुछ शिशुओं के सोते समय पेट में एसिड बनता है, जिससे पेट में दर्द होता है और बच्चा सो भी नहीं पाता, ऐसी समस्या में बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।
H- जब बच्चे को पालने में लिटाएं तो उसके पेट, बांह और सिर को कोमलता से सहारा देकर लिटाएं। आप उसके जितना नजदीक होंगी, बच्चा उतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करेगा।
I- ज्यादा थके हुए बच्चे को सुला पाना असंभव होता है, इसलिए बच्चे के सोने का समय सुनिश्चित करें। अपना और बच्चे का कार्यक्रमनियत करें। शिशु के जल्दी सोने का मतलब जल्दी उठना बिल्कुल नहीं है। कई बार अच्छी नींद के कारण बच्चे सुबह देर से उठते हैं।
J- बच्चे के कपड़े सूती और ढीले-ढाले होने चाहिए। ये सोने में रुकावट भी नहीं डालते हैं।
K- शिशु के सोने के कमरे का तापमान ठीक होना चाहिए। वहां न तो बहुत ज़्यादा ठंड हो, न ही उमस। सामान्य तापमान ही बेहतर है।
L- शिशु को सुलाते समय कमरे में अंधेरा कर दें। परदे डाल दें, जिससे उसे लगे कि सोने का समय हो गया है। जगाते समय धीरे से लाइट खोलें या पर्दा हटा दें। इससे शिशु को अंधेरे और उजाले का फर्क समझ आएगा।
M- यदि सुलाने से पहले शिशु की पंद्रह मिनट हल्की मालिश की जाए तो उन्हें अच्छी नींद आती है। बच्चे थोड़े बड़े हों तो उन्हें कहानी सुना कर सुलाया जा सकता है।
N- शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए छोटी-छोटी नींद बहुत फायदेमंद होती है। इससे मां को अपने नहाने, खाने, फोन कॉल्स सुनने आदि का समय मिल जाता है। यदि बच्चा रात को नहीं सोता तो उसे दिन में सोने से मत रोकिए।
O- गीली नैपीज में शिशु को सोने में असुविधा होती है। अत: सुपरएब्जॉर्बमेंट डायपर्स का प्रयोग करें और त्वचा की सुरक्षा के लिए डायपर क्रीम लगाएं।
P- यदि बच्चे को सुलाने के लिए चुसनी का प्रयोग करते हैं तो वह मुलायम होनी चाहिए और सो जाने के बाद धीरे से चुसनी निकाल दें।
Q- शिशु के रात में जग जाने पर कैसे सुलाएं यह अच्छी-खासी समस्या होती है। धीरेधीरे झूले पर झुलाएं या फिर पिता द्वारा घुमाने से सोने पर जो भी तरकीब काम आए, वही अपनाएं।
R- बच्चों का डेली रुटीन वाला कार्यक्रम निश्चित रखें और उस पर कायम रहें। उसे न बदलें, यही मूल मंत्र है।
S- बच्चे को अच्छे से लपेट कर सुलाएं, जो उसे वही एहसास देता है, जब वह गर्भ में था।
T- सलाते समय लोरी या कहानी सुनाएं। चाहें तो हल्की आवाज में थोड़ा यूं ही गुनगुना भी सकती हैं।
U- बच्चे की मनोदशा समझें। जब वह आंख मले या जम्हाई ले, तब बच्चे को सुलाने का प्रयास करें।
V- बच्चा जब जन्म लेता है, तभी से वह अपनी मां की आवाज पहचानने लगता है और मां की आवाज सुनते ही निश्चिंत होकर सो जाता है।
W- जब सोते समय बच्चे को लिटाते हैं या चूमते हैं तो वह अपने को सुरक्षित समझता है और प्यार को महसूस करता है। अत: वह गहरी नींद में सो जाता है।
X- लोरी सुनाने से बच्चे का तनाव कम होता है और उसे सोने में मदद मिलती है।
Y- बच्चे को बिल्कुल शांत वातावरण न दें। गर्भ में वह मां के दिल की धड़कन और पेट की आवाजों को सुनता रहा था, इसलिए बिल्कुल धीमे पंखे की आवाज उसे सोने में मदद करती हैर्।
Z- बच्चा गहरी नींद में सो गया है। यह कैसी आवाज है? कुछ नहीं बच्चा सो गया है, अब बात न करें और शांति का आनंद लें।
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