Parenting C: बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए पेरेंट्स को कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। जिसमें बच्चे के खानपान से लेकर सामाजिक विकास से जुड़ी बातें शामिल होती है। इनमें से एक है पेरेंटिंग- सी। बच्चे के समुचित विकास के लिए जिनमें से कुछ C को अपनाना और कुछ C को छोड़ना बेहतर है। आइए ऐसे कुछ C के बारे में जानते हैं जिन्हें बतौर पेरेंट्स आपको अपनाना चाहिए और कुछ को नजरअंदाज करना चाहिए।
अपनाएं ये C
कनेक्ट (Connect)

पेरेंट्स को हमेशा अपने बच्चो के साथ कनेक्ट रहना चाहिए। बिजी शेड्यूल के बावजूद थोड़ा समय पेरेंट्स को उनके साथ जरूर बिताना चाहिए और अपनी-बच्चों के डेली रूटीन को डिस्कस करना चाहिए। बच्चे को पूरी छूट देनी चाहिए ताकि वो अपने मन की बात या दिन में हुई किसी बात के बारे में खुलकर आपको बता सके। सिर्फ उसे अपने हिसाब से नियत समय में और निश्चित मापदंड में बात करने का रवैया न अपनाएं। भले ही इसमें आपको उनके साथ ज्यादा टाइम बिताना पड़े, आपको पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके साथ जितना ज्यादा आप समय बिताएंगे, उतना वो आपसे भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे। आप उनके साथ नियमित रूप से 15-20 मिनट भी निकाले और उनसे बातचीत करेंगे, तो वो भी उस समय का इंतजार करेंगे।
कम्युनिकेशन (communication)
पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ रेगुलर कम्यूनिकेशन् जरूर रखना चाहिए। जिन पेरेंट्स और बच्चों के बीच रेगुलर कम्यूनिकेशन होता है, उनके बीच बाॅन्डिंग या कनेक्शन बेहतर होता है। कई बार बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं तो उनकी कई बातें पेरेंट्स को पता ही नहीं चलती या बच्चे उनके साथ शेयर नहीं करते। ऐसा उनके बीच आपसी कम्यूनिकेशन न होने के कारण ही होता है। बच्चे के साथ कोई भी समस्या आती है तो आमतौर पर वो उसके सोल्यूशन या सजेशन के लिए अपने पेरेंट्स के पास ही जाता है। कई बार पेरेंट्स उसकी बात सुने बिना ही निर्णय ले लेते हैं कि बच्चे की ही गलती होगी, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जबकि पेरेंट्स को अपने बच्चे की बात सकारात्मक ढंग से सुनने, प्यार और सम्मान से बात करने और उनके साथ खुले और ईमानदार रहने का प्रयास करना चाहिए। ध्यान रखें इस बीच आप उन्हें किसी भी बात पर डांटे या लैक्चर ना दें। वरना बच्चे पेरेंट्स से बात शेयर करने में हिचकिचाने लगते हैं और उनका पेरेंट्स के साथ जुड़ाव कम होने लगता है।
कोचिंग या गाइडेंस(Coaching)

पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वो बच्चे के कोच बनें। कई पेरेंट्स बच्चे का दोस्त बनने की कोशिश करते हैं। दोस्ताना रिलेशन एक हद तक तो ठीक है, ज्यादा जरूरी है कि पेरेंट्स उसके कोेच या गाइड बनें। जिंदगी के किसी भी मोड़ पर जब उसे आपकी गाइडेंस की जरूरत हो, पेरेंट्स उसके लिए मौजूद रहें। सबसे पहले तो ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि वो पेरेंट्स से अपनी बात खुलकर शेयर कर सके। अगर कोई बात उसे समझानी हो तो वह तभी करनी चाहिए जब बच्चा अपनी बात पूरी कर चुका हो। बहुत प्यार और धैर्य से बच्चे को सही या गलत का अंतर बताना चाहिए।
कॉम्प्लीमेंट(Complement)
बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पेेरेंट्स को ज्यादा से ज्यादा काॅम्पलीमेंट दें। उनके हर छोटे-छोटे काम की तारीफ जरूर करें। स्वाभाविक है कि तारीफ हर किसी को पसंद होती है, बच्चों को काॅम्पलीमेंट देने से उनमें आत्मविश्वास आएगा और वे अपने काम अधिक रूचि से करेंगे।
केयर(Care)
अमूमन बच्चा जब इस दुनिया में आता है, तभी से हर पेरेंट्स उसकी देखरेख य केयर करने में जुट जाते हैं। अच्छी पेरेंटिंग के लिए पेरेंट्स को बच्चे के साथ-साथ सेल्फ- केयर करना, अपने लिए समय निकालना भी बहुत जरूरी है। अगर वो ओवर-बर्डन पेरेंट हैं तो बच्चे को बेस्ट नहीं दे पाएंगे। इसलिए बहुत जरूरी है कि पेरेंट्स को अपनी केयर भी करनी जरूरी है।
कम्यूनिटी(Community)

चूंकि आजकल परिवार छोटे और एकल परिवार हो गए हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए यह जरूरी हो जाता है कि बच्चे के लिए ऐसी कम्यूनिटी विकसित करें जो जरूरत पड़ने पर उसका साथ दे सके या मदद कर सके। इस कम्यूनिटी में बच्चे के दोस्त, रिश्तेदार या पड़ोसी हो सकते हैं। बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए पेरेंट्स को थोड़ी-सी मेहनत जरूर करनी पड़ेगी।
कमिटमेंट(Commitment)
पेरेंटिंग में कमिटमेंट बहुत जरूरी है चाहे वह खुद के लिए हो या बच्चे के लिए। यह ऐसा रिलेशनशिप है जिसमें बाहर निकलने का रास्ता नहीं होता। जन्म के साथ बच्चे के प्रति पेरेंट्स जिम्मेदारी खुद-ब-खुद बन जाती है। लेकिन पेरेंट्स की यह कमिटमेंट अपने लिए भी बराबर होनी चाहिए।
इन C को छोड़ना है बेहतर-
कम्पेयर(Compare)
पेरेंट्स को दूसरे से अपने बच्चे को कम्पेयर कभी नहीं करना चाहिए। वो चाहे उसका सिबलिंग या दूसरे रिश्तेदारों के बच्चे। बच्चे के काम, प्रतिभा, बुद्धिमत्ता के बारे में कभी दूसरे के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। हर बच्चा अलग होता है, उसका बौद्धिक या प्रतिभा का लेवल अलग होता है। तुलना करने से बच्चे में हीन भावना आ सकती है जो उसके विकास को अवरुद्ध कर सकती है।
क्रिटिसाइज (Criticizesize)

पेरेंट्स को अपने बच्चे की कमियों या काम को क्रिटिसाइज कभी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चा धीरे-धीरे आपसे दूर होता जाएगा और आपसे बात तक करने में हिचकिचाने लगेगा। साथ ही बच्चा तनाव में रहने लगता है।।
(डाॅ पूजा आनंद, मनोवैज्ञानिक, विश्वास हीलिंग सेंटर, दिल्ली)
