पचमढ़ी

मध्यप्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी

पचमढ़ी एक बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है। यह मध्यप्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन है और पूरी दुनिया में अपनी ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है।

Pachmarhi Travel Guide: मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी एक बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है। यह मध्यप्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन है और पूरी दुनिया में अपनी ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है। भौगोलिक रूप से अपनी स्थिति के कारण पचमढ़ी में किसी भी समय जाया जा सकता है पर मानसून के समय यहाँ जाना सबसे सही रहता है। यह सतपुड़ा की खूबसूरत पहाड़ियों के मध्य में स्थित है, जिसकी वजह से इसे सतपुड़ा की रानी की भी संज्ञा दी जाती है। पचमढ़ी में पर्यटन की दृष्टि से देखें तो काफ़ी कुछ है। इस जगह पर ख़ूबसूरत घने जंगल, सुंदर जलप्रपात, स्वच्छ जल के तालाब, आकर्षक चर्च को देखने के लिए दुनिया भर के लोग यहाँ आते है। 

पचमढ़ी में बहुत सारी गुफाएँ हैं। पाण्डवों के पचमढ़ी में आवास करने और इन गुफाओं में प्राचीन शैलचित्र बने होने के कारण ये बहुत ज़्यादा पौराणिक और पुरातात्विक महत्व रखती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर भगवान शिव ने भी कभी वास किया था। भगवान शिव के गुप्त महादेव, चौरागढ़, जटा शंकर और महादेव गुफा में रुकने के कारण पचमढ़ी को भगवान शिव का दूसरा घर भी कहा जाता है। इसके अलावा भी पचमढ़ी में घूमने और देखने के लिए काफ़ी कुछ है। पचमढ़ी बस स्टैंड से टैक्सी और गाड़ियाँ मिल जाती है। दो से तीन दिन में आप पचमढ़ी की प्रमुख जगहों को देख सकते हैं। अगर आप पचमढ़ी में आते हैं तो इन जगहों पर जाना बिल्कुल भी नहीं भूलें। 

1- पांडव गुफा

पांडव गुफा के नाम के पीछे एक बहुत बड़ा पौराणिक तथ्य है। कहा जाता है कि वनवास के समय पांडव यहाँ आये थे इसलिए ये पांडव गुफा के नाम से जानी जाती है। इस जगह पर एक बहुत बड़ी चट्टान को काटकर गुफा बनाई गई है। जिसमें पाँचो पांडव के अलग अलग कक्ष है। गुफा के अंदर पत्थर के स्तंभ पर कई तरह के खूबसूरत डिजाइन भी बनाए गए हैं जिन्हें देखना अच्छा लगता है। गुफा के ठीक सामने खूबसूरत फूलों का एक उद्यान भी है, जिससे गुजरते हुए पांडव गुफा तक जाना होता है। भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक़ इन गुफाओं का निर्माण 6 वीं से 10 वीं शताब्दी के मध्य किया था। 

2- अप्सरा विहार

पांडव गुफा से कुछ ही दूरी पर स्थित अप्सरा विहार पचमढ़ी का एक बहुत ही ख़ूबसूरत झरना है, जो दूर से ही लोगों को अपनी तरफ़ आकर्षित करता जान पड़ता है। तक़रीबन 30 फीट की ऊँचाई से गिरता पानी पानी हर किसी का मन मोह लेता है। यह झरना प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर है और ऊँचाई से गिरने के पश्चात छोटे पूल का निर्माण करता है। अगर आपको तैराकी और डाइविंग का शौक़ है तो अप्सरा विहार का यह पूल आपके लिए बिल्कुल सही है। लोग कहते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिटिश महिलाएं इस कुंड में स्नान करने आती थी। स्थानीय लोग उनकी ख़ूबसूरती को देखकर आकाश से उतरी हुई परी समझते थे, इसलिए इस झरने का नाम अप्सरा विहार पड़ गया।

3- रजत प्रपात

अप्सरा विहार झरने से कुछ ही दूरी पर रजत प्रपात स्थित है। यह पचमढ़ी का सबसे खूबसूरत और सबसे ऊँचा झरना है। 351 फीट की ऊंचाइ से गिरता यह झरना देश का 30 वां सबसे ऊंचा झरना माना जाता है और काफ़ी लोकप्रिय है। इतनी ऊँचाई से गिरते पानी पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो यह चांदी की तरह चमकने लगता है, इसलिए इस झरने को कुछ लोग सिल्वर फॉल्स या रजत प्रपात के नाम से भी पुकारते हैं। इस जगह पर आने पर मन में एक अद्भुत रोमांच का अनुभव होता है, इस जगह पर आकर समय बिताना आपको अच्छा लगेगा। 

4- धूपगढ़

पंचमढ़ी से कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित धूपगढ़ मध्य भारत की सबसे ऊँची चोटी है। समुद्र तल से तक़रीबन 1350 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस चोटी से आसपास का नज़ारा देखते ही बनता है। इस चोटी को ट्रेक करना और ख़ूबसूरत और चुनौती भरे रास्तों से गुज़रना एक बहुत ही रोमांचक अनुभव हो सकता है। इस जगह से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य काफ़ी ख़ूबसूरत दिखाई देता है। ट्रेकिंग और हाइकिंग को पसंद करने वाले एडवेंचर लवर्स के लिए यह एक लोकप्रिय जगह है। धूपगढ़ जाते समय सड़क के दोनों ही तरफ़ विशाल पहाड़ों की चोटियां और कई अद्भुत दृश्य आपको दिखाई देंगे और कब आप कुदरत के अद्भुद नज़ारे को देखते हुए धूपगढ़ पहुँच जायेंगे पता ही नहीं चलेगा। 

5- जटा शंकर

जटा शंकर शब्द का अभिप्राय शंकर भगवान की जटा से है जो पचमढ़ी में स्थित एक स्थल से है। यह वह स्थल हैं जहाँ भगवान भोलेनाथ भस्मासुर से बचने के लिए आये थे। भगवान भोलेनाथ ने छिपने के लिए अपनी जटाये फैलायी थी इस बात का आभास यहाँ स्थित पर्वत की आकृतियों और बड़े बड़े बरगद के पेड़ों की शाखाओं को देख आज भी हो आता है। यह जगह काफ़ी ख़ूबसूरत और पौराणिक महत्व की है। इन गुफाओं के अंदर एक शिवलिंग है, जो स्वयंभू अर्थात स्वयं प्रकट हुआ है। लोग इस जगह पर दूर दूर से दर्शन के लिए आते हैं। इस जगह पर आकर ऐसा लगता है कि प्रकृति के निकट इस शांत और पवित्र स्थान के कण कण में भगवान शिव का निवास है ।

पचमढ़ी कैसे पहुंचे ?

पचमढ़ी पहुंचने के लिए सबसे नज़दीक एयरपोर्ट राजा भोज है जोकि 159 किमी की दूरी पर स्थित है। इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको दिल्ली, रायपुर, हैदराबाद और अमहाबाद सहित अन्य शहरों से भोपाल या जबलपुर की डायरेक्ट फ्लाइट मिल सकती हैं। पिपरिया रेलवे स्टेशन पचमढ़ी का निकटतम रेलवे स्टेशन है। पचमढ़ी हिल स्टेशन के पास होने की वजह से पिपरिया में कई ट्रेने रूकती है। पिपरिया के लिए भोपाल, जबलपुर, कोलकाता, ग्वालियर, दिल्ली, अहमदाबाद, नागपुर के साथ ही कई अन्य शहरों से ट्रेन चलती हैं। सड़क मार्ग की बात करें तो पिपरिया से पचमढ़ी की दूरी तक़रीबन 55 किमी है। पिपरिया से बस या टैक्सी के माध्यम से पचमढ़ी पहुंचा जा सकता है। 

पचमढ़ी में कहाँ ठहरें?

पचमढ़ी में ठहरने के लिए हर तरह के विकल्प मौजूद हैं। कई अच्छे और प्रायवेट होटल, टूरिस्ट बंगले, होलीडे होम्स और कॉटेज बने हुए हैं, आप अपनी पसंद और बजट के मुताबिक़ जगहों का चयन कर सकते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने भी यात्रियों के ठहरने के लिए बहुत उत्तम व्यवस्था की है। मध्य प्रदेश टूरिज्म ने सभी आयु के पर्यटकों के लिए के कई हेरिटेज होटल और गेस्ट हाउस बनाये हैं। खानपान की बात की जाए तो पचमढ़ी में पंजाबी, जैन, गुजराती और मराठी व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं।

पचमढ़ी जाने का सही समय

पचमढ़ी का मौसम वैसे तो पूरे सालभर अच्छा रहता है पर अक्टूबर से जून महीनों के मध्य जाना सबसे उचित होता है। यह गर्मियों का मौसम होता है और इस दौरान यहाँ का मौसम सुहाना होता है। कुछ लोग इस जगह पर मानसून के दौरान भी आना पसंद करते हैं, बारिश के मौसम में हल्की वर्षा का सामना करना पड़ सकता है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...

Leave a comment