Alfresco Chat: क्या आपने कभी भारत के गांवों में बसे घरों की एक कॉमन बात पर ध्यान दिया है। यहां घर छोटा हो या बड़ा, हर घर के दोनों तरफ बैठने के चबूतरे होते थे। इन चबूतरों पर बैठकर लोग आपस में रोज अपने सुख-दुख बांटते थे और पूरा गांव एक रहता था। अब स्पेन का एक छोटा सा शहर अपनी इसी खासियत के कारण सुर्खियों में है। यहां की अल्फ्रेस्को चैट पूरी दुनिया के लिए एक सीख मानी जा रही है। इसी चैट का असर है कि यहां से बुजुर्ग बेहद खुश हैं और अपनी लाइफ सुकून से बिता रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों ने भी इस चैट को जादूई बताया है।
क्या है अल्फ्रेस्को चैट

स्पेन के अल्गर शहर में करीब 1400 लोग रहते हैं। यहां गर्मियों की रात में लोग अपने घरों के बाहर आकर बैठते हैं और आपस में बातें करते हैं। यह परंपरा यहां कई सौ साल से चली आ रही है, जिसे इस शहर के लोगों ने आज भी कायम रखा है। यहां के बुजुर्ग शाम ढलते ही लोग साथ बैठते हैं और दिनभर की बातें शेयर करते हैं। इसी को अल्फ्रेस्को चैट कहा जाता है। इस परंपरा के कारण यहां के बुजुर्ग कभी भी अकेलापन महसूस नहीं करते हैं। वे एक्टिव बने रहते हैं और इसी के कारण वे स्वस्थ भी रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे सांस्कृतिक खजाना माना है। वहीं यूनेस्को ने इस शहर को विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया है। यहां के स्थानीय निवासी इसे बुजुर्गों के लिए डेली थेरेपी सेशन मानते हैं। जिसके बिना उनका दिन अधूरा रहता है।
सोशल मीडिया की आंधी से बचने का तरीका

स्थानीय लोगों का कहना है कि अल्फ्रेस्को चैट के कारण पूरा शहर आपस में बंधा रहता है। यहां कोई बाहर से भी आता है तो उसे अकेलापन नहीं लगता। कभी कभी बेकिंग कॉम्पीटीशन, गेम्स आदि के आयोजन किए जाते हैं, जिससे बुजुर्गों का एंटरटेनमेंट होता है। इस चैट में बुजुर्गों के साथ ही युवा भी शामिल होते हैं। ऐसे में वे सोशल मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल, इंटरनेट की अंधी दौड़ से भी बचते हैं और आपस में इमोशनल रिलेशन बना रहता है। लोगों का मानना है कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया से दूर रखना भी एक चैलेंज है, जिसे ये आउटडोर चैट पूरी तरह से टक्कर देती है। सांस्कृतिक आदान प्रदान के कारण युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। वहीं बुजुर्ग और युवाओं का रिश्ता भी बेहतर होता है।
मनोवैज्ञानिकों ने भी माना फायदेमंद

बुजुर्गों के लिए अकेलापन बेहद घातक है। भागदौड़ भरी जिंदगी में चाहते हुए भी हम बुजुर्गों को पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में अल्फ्रेस्को चैट उनके लिए वरदान से कम नहीं है। मनोवैज्ञानिकों ने भी इसे मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद बताया है। इसे डेली थेरेपी सेशन बताया जा रहा है।
हम भी लें इससे सीख

स्पेन की इस परंपरा से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम भी अपने घर के बुजुर्गों के लिए ऐसी डेली चैट्स की व्यवस्था कर सकते हैं, जहां वे अपने हमउम्र लोगों से अपनी बातें कर सकें। उन्हें एहसास करवाएं कि बुजुर्ग होने का यह मतलब बिलकुल नहीं है कि आप समाज से कट गए हैं, बल्कि इसका अर्थ ये है कि अब आपके पास पर्याप्त समय है अपने अनुभव बाकी लोगों से शेयर करना का। यह युवाओं की और पूरे परिवार की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह बुजुर्गों को यह एहसास करवाएं कि आप आज भी महत्वपूर्ण हैं और आप अपना समय खुशी के साथ जैसा चाहे वैसा बिता सकते हैं। कोशिश करें बुजुर्गों का ग्रुप बने, जिसमें वे उठ बैठ सकें।
