क्यों मनाया जाता है मासिक कार्तिकगाई का पर्व, जानें शिव जी से जुड़ी यह पौराणिक कथा: Masik Karthigai 2023
Masik Karthigai 2023

Masik Karthigai 2023: सनातन संस्कृति में व्रत त्योहार, पूजा पाठ और यज्ञ अनुष्ठान का खास महत्व है। हिंदू धर्म के सभी प्रमुख व्रत और पर्वों पर विशेष प्रकार की रस्में निभाई जाती हैं। इन रस्मों को निभाने का अर्थ है कि हम अभी भी अपनी धार्मिक परंपराओं और रीति रिवाजों के साथ जुड़े हुए हैं। ये रीति रिवाज और परंपराएं हमें अपनी संस्कृति से जोड़े रखती है। सनातन संस्कृति की इसी एक परंपरा का हिस्सा है मासिक कार्तिकगाई के पर्व पर दीपदान करना। देश के दक्षिण भाग में प्रत्येक हिंदू मास के कृतिका नक्षत्र पर मासिक कार्तिकगाई का व्रत रखा जाता है। देश के कुछ हिस्सों में मासिक कार्तिकगाई पर्व को ब्रह्मोत्सव पर्व के नाम से भी मनाया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मासिक कार्तिकगाई का पर्व भगवान शिव और उनके पुत्र कार्तिक को समर्पित है। इसलिए मासिक कार्तिकगाई पर्व के दिन दीपदान करने का खास महत्व है। आज इस लेख में हम पंडित इंद्रमणि घनस्याल से मासिक कार्तिकगाई पर्व की कथा और दीपदान के महत्व के बारे में जानेंगे।

शिव जी के प्रकाश रूप की होती है पूजा

Masik Karthigai 2023
Masik Karthigai 2023-Shiv Puja

पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि मासिक कार्तिकगाई का पर्व भगवान शिव के दिव्य प्रकाश रूप की पूजा करने का पर्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच इस बात पर बहस हुई की उन दोनों में से श्रेष्ठ कौन है। उनकी बहस को बढ़ता देखकर भगवान शिव ने स्वयं को एक दिव्य प्रकाश स्तंभ के रूप में परिवर्तित कर लिया। इसके बाद दिव्य प्रकाश स्तंभ बने शिव जी ने ब्रह्मा जी और विष्णु जी से प्रकाश स्तंभ के दोनों छोर ढूंढने के लिए कहा। विष्णु जी और ब्रह्मा जी प्रकाश स्तंभ का एक भी छोर नहीं ढूंढ पाये तब ब्रह्मा जी और विष्णु जी को यह ज्ञात हुआ कि ब्रह्मांड में उन दोनों से भी बढ़कर एक सर्वशक्तिमान शक्ति है और वो स्वयं शिव है। इसी कारण मासिक कार्तिकगाई के दिन शिव के प्रकाश स्वरूप की पूजा करने के लिए दीपदान किया जाता है। मासिक कार्तिकगाई के दिन शिव जी के प्रकाश रूप के साथ साथ शिव जी के पुत्र कार्तिक को मुरुगन देवता के नाम से पूजा जाता है।

इसलिए किया जाता है दीपदान

Deepdan
Deepdan

पौराणिक कथाओं और शिव पुराण के अनुसार, शिव के ज्योतिर्लिंग के रूप में मासिक कार्तिकगाई पर्व पर दीपदान किया जाता है। मासिक कार्तिकगाई के दिन भगवान शिव और उनके पुत्र कार्तिक या मुरुगन की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि मासिक कार्तिकगाई के पर्व पर शिव जी कृपा पाने और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने के लिए के लिए दीपदान करने की परंपरा निभाई जाती है। मासिक कार्तिकगाई पर्व पर किसी मंदिर और अपने घर के आंगन या किसी ब्राह्मण के घर में दीपक जलाकर रखा जाता है।

इसे ही दीपदान कहते हैं। दीपदान करने से व्यक्ति का मन शिव जी के प्रकाश रूप की तरह ही नई ऊर्जा और चेतना से भर जाता है। मासिक कार्तिकगाई के दिन सभी श्रद्धालु मिलकर तमिलनाडु के अरुणाचलेश्वर मंदिर में एक विशाल दीपक जलाते हैं और अपने परिवार के सदस्यों के लिए मंगलकामना करते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, मंदिर का यह विशाल दीपक शिव जी के प्रकाश रूप का प्रतीक है। इस विशाल दीपक के दर्शन मात्र से व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर होने लगती हैं।

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