स्टार्टअप शुरू करने का आइडिया अब करीब-करीब हर दिमाग में चल ही रहा होता है। आप भी कभी न कभी खुद का बिजनेस शुरू करने के बारे में जरूर सोच चुकी होंगी। हो सकता है अपने प्लानिंग भी की हो। क्या बिजनेस करेंगी? किस-किस को इसमें शामिल करेंगी? कितना निवेश करेंगी? मगर इस दौरान पैसे बचाने के आइडिया पर कुछ सोचा है या नहीं…अगर नहीं तो इस बारे में सोच लीजिए। क्योंकि बिजनेस के दौरान कई बार पैसों की जरूरत पड़ती है। ये जरूरत अचानक से भी आपके सामने आ खड़ी हो सकती है। ऐसे में शुरू से ही बचत करते रहना काफी फायदा देता है। इस वक्त आपको पैसे कम से कम खर्च करते हुए या वाजिब पैसे खर्च करते हुए ही आगे बढ़ना होगा। इस दौरान बचत के आसान तरीके आइए जानें-

सेकंड हैंड मशीनरी-
आपको बिजनेस के लिए जिन भी संसाधनों या मशीनरी की जरूरत पड़ेगी, उन्हें कोशिश करें सेकंड हैंड मार्केट में जरूर चेक कर लें। हो सकता है आपको वहां अपनी जरूरत के हिसाब से मशीन मिल जाएं, वो भी कम दामों पर। कई मशीनों की बिक्री तो कई बार सरकार भी करती है। तब ये और भी सस्ती मिल जाती हैं। कुल मिलाकर आपको नए से पहले पुराने को आजमाना है। ताकि कुछ पैसा बचाया जा सके।
इमरजेंसी फंड है जरूरी-
बिजनेस के शुरू में आपके पास ज्यादा बचत नहीं होती है। लेकिन फिर भी थोड़ा ही सही कुछ रुपयों से इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं। इस फंड की किश्त आप स्थिति अच्छी होने के हिसाब से बढ़ाते रहिए। ये पैसा आपके ऊपर अचानक से आई जिम्मेदारियों से छुटकारा दिलाएगा। हो सकता है कभी अचानक से माल खरीदना पड़ जाए। या फिर कस्टमर का पेमेंट आने में देर हो रही हो, ये पैसा हमेशा ही आपकी मदद करेगा। अप इस पैसे के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को कभी कमजोर नहीं होने देंगी।
तुलना करें-
बिजनेस के लिए प्रोडक्ट खरीदने से पहले कई सारे विक्रेताओं से मिले जरूर। खुद मिलने से आपको जल्दी समझ आएगा कि कौन से दाम सही हैं, जबकि बस फोन पर दाम पता करके खरीदारी करने के घाटे भी हो सकते हैं। कुछ लोग आपसे झूठ बोल सकते हैं और आपकी जेब जरूरत से ज्यादा ढीली हो सकती है। या आप गलत चीज की कीमत भी चुका सकती हैं। इसलिए जब भी बिजनेस से जुड़ी ख़रीदारी करें तो खुद जाकर या डबल चेक करने के बाद ही कम से कम दाम देने की कोशिश करें।

खर्चा हो निश्चित-
कोई भी बिजनेस शुरू करने से पहले महीने या हफ्ते का खर्चा निश्चित करता है। मगर ज़्यादातर लोग इन खर्चों पर अडिग नहीं रह पाते हैं। कई बार जरूरत से ज्यादा खर्चा हो जाता है। या ये निश्चित रकम से ज्यादा हो जाता है। ऐसे में ये जरूरी है कि कुछ भी करके उस रकम से ज्यादा खर्च न करें। इसका पालन सिर्फ आपको नहीं बल्कि हर उस शख्स को करना होगा, जो खर्चों से जुड़ा काम करता है।
