Himachal Pradesh Tourism
Himachal Pradesh Tourism

Himachal Pradesh Tourism: हिमाचल प्रदेश अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और हिमालयी संस्कृति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। लेकिन जैसे-जैसे पर्यटन ने पैर पसारे हैं कई जगहों पर भीड़-भाड़ और शहरीकरण ने प्रकृति के असली रंग को ढक दिया है। ऐसे में हिमाचल का वह कोना जहां अभी भी असली हिमालय अपनी पूरी गरिमा और सादगी के साथ सांस ले रहा है वह है लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे क्षेत्र। यहाँ आज भी पहाड़ों की निर्मलता, लोगों की सरलता और संस्कृति की गहराई वैसी ही है जैसी सदियों पहले थी।

स्पीति घाटी को अक्सर मिनी तिब्बत कहा जाता है। यह जगह अपने वीरान लेकिन मंत्रमुग्ध कर देने वाले परिदृश्य के लिए जानी जाती है। यहाँ के मठ की, किब्बर और धंकर आज भी बौद्ध परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। स्पीति की संकरी घाटियाँ, ऊँचे बर्फीले पहाड़ और ठंडी हवा उस असली हिमालय की झलक दिखाते हैं, जिसे अक्सर हम किताबों में पढ़ते हैं। यहाँ के गाँवों में अब भी आत्मनिर्भर जीवन शैली अपनाई जाती है और लोग प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहते हैं।

Himachal Pradesh Tourism
Lahaul – Simplicity nestled in the lap of nature

लाहौल घाटी जो अब अटल टनल के कारण आसानी से पहुंची जा सकती है असली हिमालय का दूसरा चेहरा दिखाती है। यहाँ के लोग मेहनती, सरल और प्रकृति के पूजक हैं। उदयपुर, त्रिलोकीनाथ और गुरु घंटाल गोम्पा जैसे स्थल इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। बर्फ से ढकी चोटियाँ, ग्लेशियर और निर्मल नदियाँ यहाँ के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यहाँ की जलवायु कठोर जरूर है लेकिन लोगों का दिल उतना ही गर्मजोशी से भरा है।

Kinnaur
Kinnaur – A confluence of tradition and nature

किन्नौर जिला अपने सेब के बागानों और किन्नर कैलाश पर्वत के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आज भी पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। कल्पा, सांगला और चितकुल जैसे गाँव असली हिमालय के दर्शन कराते हैं। यहाँ के लोग प्रकृति के साथ घुल-मिलकर रहते हैं और उनके जीवन में पर्वतों और नदियों का विशेष स्थान है। चितकुल भारत-तिब्बत सीमा के निकट बसा हुआ आखिरी गाँव है जहाँ आज भी लकड़ी के पुराने घर और पारंपरिक जीवन शैली विद्यमान है।

nature and culture
Protection of nature and culture

इन इलाकों में पर्यटन बढ़ने लगा है लेकिन यहाँ के लोगों ने अभी भी अपनी संस्कृति और पर्यावरण को संभाल कर रखा है। प्लास्टिक के उपयोग पर नियंत्रण, पारंपरिक घरों का संरक्षण और स्थानीय हस्तशिल्प का बढ़ावा यहाँ की बड़ी खासियत है। यह सब दर्शाता है कि असली हिमालय केवल भौगोलिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी जीवित है।

हिमाचल का यह कोना लाहौल, स्पीति और किन्नौर आज भी उस असली हिमालय का प्रतीक है जो शांत, पवित्र और आत्मीय है। यहाँ जाकर न केवल आप हिमालय के सौंदर्य को देख सकते हैं बल्कि उसकी आत्मा को महसूस भी कर सकते हैं। यदि आप सच में हिमालय को जानना चाहते हैं तो एक बार इस कोने की यात्रा जरूर करें।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...