Ravan Shani Dev Story

Ravan Shani Dev Story: हिंदू धर्म शास्त्रों में देवताओं को समर्पित विशेष दिनों का उल्लेख मिलता है। जैसे सोमवार का दिन भगवान शिव, बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इसी तरह मंगलवार का दिन हनुमान जी और शनिवार का दिन शनिदेव का माना गया है। धर्म शास्त्रों में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। कुंडली में जब शनिदेव अपनी वक्र दृष्टि डाल लेते हैं तो उस जातक के जीवन में अनेक परेशानियां रहती हैं। सभी नवग्रहों में शनि का स्थान महत्वपूर्ण माना गया है। अन्य ग्रहों के मुकाबले शनि ग्रह की चाल सबसे धीमी होती है। शनि की धीमी चाल के पीछे कारण लंकापति रावण को माना जाता है। रावण बड़ा ही पराक्रमी, बलशाली और तेज योद्धा था। उसकी मायावी शक्तियों के आगे देवता भी भयभीत हो जाते थे। उससे कोई भी युद्ध लड़ने से भय खाता था। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि रावण और शनिदेव के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें रावण ने शनि के पैर काट दिए थे। ऐसे में आज हम आपको शनिदेव और रावण की यह पौराणिक कथा सुनाएंगे।

रावण ने काट दिया था शनिदेव का पैर

Ravan Shani Dev Story

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण भगवान शिव का सबसे परम भक्त था। उसने कठोर तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न कर अनेकों वरदान प्राप्त किए थे। रावण को राजनीतिज्ञ, महाप्रतापी और प्रखंड विद्वान की उपाधि प्राप्त थी। रावण अपनी शक्तियों के बल पर सभी देवताओं को प्रताड़ित करता रहता है। जब रावण की पत्नी मंदोदरी गर्भवती थी, तब रावण चाहता था कि उसकी होने वाली संतान महा पराक्रमी और दीर्घायु हो। इसके लिए रावण ने सभी ग्रहों को आदेश दिया कि संतान जन्म के समय सभी अपने उचित नक्षत्रों और उत्तम स्थान पर रहे। रावण की शक्तियों के भय के कारण सभी ग्रहों ने इस बात को स्वीकार लिया। लेकिन, शनिदेव ने रावण की बात को अनदेखा कर दिया।

रावण और शनिदेव में युद्ध

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रावण को जब इस बात का पता चला तो उसने शनिदेव के साथ युद्ध किया। रावण ने अपने पराक्रम के बल पर शनिदेव को बंदी बना लिया और बात मनाने पर जोर दिया। पर शनिदेव अपनी बात पर अड़े रहे। फिर रावण ने शनिदेव को अपनी शक्तियों के बल पर अपने प्रभाव में ले लिया। जिसके बाद सभी ग्रहों की तरह ही शनिदेव भी उचित स्थिति में विराजमान हो गए। इसके बाद मंदोदरी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो रावण का पुत्र मेघनाद था। परंतु, मेघनाद के जन्म के समय शनि ने अपनी दृष्टि वक्री कर ली। जिसके कारण मेघनाद की आयु कम हो गई। यह बात रावण को पता चल गई, जिसके बाद रावण ने गुस्से में आकर शनिदेव के पैर काट दिए। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस वजह से ही शनिदेव की चाल अन्य ग्रहों की तुलना में बेहद धीमी रहती है।

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