देवी मां के भक्तों चहुं दिशा में फैलें हैं। इन्हीं भक्तों में अनगिनत हैं जो देवी के सभी शक्तिपीठों के दर्शन कर लेना चाहते हैं। लेकिन पूरे 51 शक्तिपीठ के दर्शन आसान कहां हैं? इन सभी में कुछ के दर्शन तो संभव हैं। ये वो शक्तिपीठ हैं, जिनकी मान्यता कुछ ऐसी है कि जो भी यहां आता है, अपनी मन्नत पूरी होने की गारंटी साथ लेकर जाते हैं। ये कुछ ऐसे शक्तिपीठ हैं, जहां भक्तों की मन्नत पूरी होती ही है। इन मंदिरों में आने वाले एक खास सुकून में यहां के दर्शन करने आते हैं। उन्हें पता होता ही है कि इस शक्तिपीठ में उनके दर्शन होने के बाद जीवन सुखमय होगा ही। 51 शक्तिपीठों में से ऐसी ही पांच के बारे में आज हम आपको बता रहे हैं, चलिये फिर भक्ति में लीन होने को तैयार हो जाइए-
शक्तिपीठ कितने और कहां-
देवी पुराण की मानें तो 51 शक्तिपीठ हैं जबकि देवी भागवत के मुताबिक 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों के बारे में बताया गया है। देवी पुराण के हिसाब से कुछ शक्तिपीठ विदेशों में भी हैं। भारत में सबसे ज्यादा 42 शक्तिपीठ माने जाते हैं। आपको ताज्जुब होगा लेकिन पाकिस्तन में भी एक शक्तिपीठ है। इसके अलावा बांग्लादेश में 4, श्रीलंका में 1, तिब्बत में 1 और नेपाल में भी 2 शक्तिपीठ माने जाते हैं। 
कोलकाता का कालीघाट शक्तिपीठ है खास-
कोलकाता के इस कालीघाट शक्तिपीठ में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां की मां काली अन्यतम हैं। इस शक्तिपीठ में देवी सती के दाहिने पैर की चारों उंगलियां गिरी थीं। देवी के इस अवतार को रौद्रावतार माना गया है। यहां की देवी प्रतिमा में आपको काली का मस्तक और चार हाथ ही नजर आते हैं। मूर्ति सोने की बनी है जिसे लाल कपड़े पहनाए गए हैं। इस मूर्ति में जीभ काफी लंबी है। 
पर्वत वाली अंबाजी मंदिर, गुजरात-
गुजरात के इस शक्तिपीठ की खास बात है कि यहां आपको कोई प्रतिमा नहीं मिलेगा। ये शक्तिपीठ अरासुर पर्वत पर बनी है। माना जाता है कि इस शक्तिपीठ में देवी सती का हृदय गिरा था। यहां पर पूजा मूर्ति की नहीं बल्कि पवित्र श्रीयंत्र की की जाती है। यहां भक्त पूर्णिमा के दिन बड़ी संख्या में आते हैं। 
देवी तालाब मंदिर, जालंधर-
ये शक्तिपीठ जालंधर के सिटी रेलवे स्टेशन से सिर्ड 1 किलोमीटर दूर है। यहां पर देवी का बायां वक्ष गिरा था। देवी तालाब मंदिर 200 साल पुराना है। यहां एक तालाब भी है, जिसकी बहुत मान्यता है। 
शक्ति की देवी: कामख्या मंदिर, असम-
कामख्या देवी मंदिर असम के गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर है। यहां माना जाता है कि देवी की योनी गिरि थी। ये शक्ति की देवी का मंदिर है। यहां बनी मूर्ति से माना जाता है कि अम्बूवाची पर्व पर मां भगवती की गर्भगृह के महामुद्रा प्रवाह से रक्त प्रवाहित होता है। ये मंदिर अपने आप में अद्भुत है। 
तमिलनाडू का शुचि, शुचितीर्थम-
शुचि, शुचितीर्थम शिव मंदिर, तमिलनाडु में माना जाता है कि देवी सति के ऊपरी दांत गिरे थे। तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग पर ये मंदिर बना है।