मुंबई स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर देश में स्थित सबसे पूज्यनीय मंदिरों में से एक है। यहां गणपति अपने सिद्धिविनायक अवतार में हैं जोकि गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। आपको बता दें कि गणेश जी की जिन प्रतिमाओं में सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्धपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर कहलाते हैं। इस मंदिर की खासियत है कि यहाँ केवल हिन्दू ही नहीं, बल्कि हर धर्म के लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

गौरीनंदन, गजानन, एकदंत, लंबोदर आदि अनेक नामों से पुकारे जाने वाले गणपति गणेश जी का सिद्धि विनायक मंदिर आस्था की पराकाष्ठा का प्रतीक है। महाराष्ट्रा के मुंबई नगर का विश्व-विख्यात सिद्धि विनायक मंदिर उन लोगों के लिए बहुत बड़ा तीर्थ बन गया है, जो अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां नमन करने आते हैं।

विघ्न-बाधाओं को दूर करने और बुद्धि को सही मार्ग पर रखने वाली ईश्वरीय शक्ति का नाम है ‘गणेश’। देवताओं में प्रथम पूज्य गणनायक ‘गणेश’ की प्रतिमाएं देश के हर भाग में विभिन्न स्वरूपों में तथा अनेक नामों से पूजी जाती हैं। काशी रहस्य में गणेश जी के 56 विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है। गणेशजी के स्वतंत्र मंदिर अपेक्षाकृत कम संख्या में हैं परंतु श्रद्धालुओं के घरों के प्रवेश द्वार पर स्थापित उनकी सिंदूरवदनी प्रतिमाएं बड़ी संख्या में हैं, जो सौभाग्य और ऋद्धि-सिद्धि की प्रतीक हैं। 

  

फिल्मी सितारों की भीड़

सिद्धि विनायक मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं में जनसाधारण से लेकर नामवर लोगों की लंबी सूची है। चूंकि हर नया काम गणपति जी को नमन करके शुरू करने की हिंदू परंपरा है, इसलिए शुभ फल की इच्छा लेकर आने वालों में फिल्मी सितारों की भीड़ लगी रहती है।

पुरातन कथा

ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने दैत्यों के हनन के लिए महर्षि वेदव्यास ने वेदों को लिखने के लिए जिस प्रतिमा की अराधाना की थी, वह सिद्ध विनायक (अब सिद्धि विनायक) की यही प्रतिमा है। आश्चर्यजनक रूप से इस प्रतिमा में गणेश की सूंड दाईं ओर झुकी हुई है।

ऐसा है सिद्धि विनायक मंदिर

सिद्धि विनायक मंदिर के अस्तित्व के बारे में अनेक कथाएं हैं, मगर इसके सर्वप्रथम निर्माण का श्रेय लक्ष्मण विथु एवं देवभाई पाटिल को जाता है, जिन्होंने 1801 ई. में छोटा-सा मंदिर बनवाया। उन्नीसवीं शताब्दी में इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ। बाद में समय-समय पर इसे नया रूप दिया जाता रहा। आजकल मंदिर में एक छोटा हॉल, जिसे ‘मण्डपम्’ कहते हैं तथा यह अति सुंदर है। यहां चुंबकीय आकर्षण वाली गणेश गुफा भी है। इस मण्डपम् का उल्लेखनीय पक्ष इसके द्वार हैं, जो लकड़ी के बने हैं। इन द्वारों पर अष्टविनायक के चित्र खुदे हैं, जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

 
अद्वितीय है गणपति की मूर्ति 

मंदिर में स्थापित गणेशजी की मूर्ति काले पत्थर की है, जो दो फुट ऊंची है। इसमें गणेशजी की सूंड़ दाईं ओर है, जो बहुत कम मूर्तियों में देखी जाती है। मूर्ति के बाएं कंधे से दाईं ओर जाता नाग लिपटा है तथा मस्तक पर तीसरी आंख है, जो शिवजी के तीसरे नेत्र की तरह है। गणेशजी के चार हाथ हैं, जिनमें कमल, कुल्हाड़ा, मोदक व मोतियों की माला है। मूर्ति के दोनों ओर ऋद्धि एवं सिद्धि देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। कहते हैं, 125 वर्ष पूर्व अक्काल कोटि स्वामी समर्थ और रामकृष्ण जम्बेकर महाराज ने यहां इनकी स्थापना की थी। मंदिर की अंदरूनी छत सोने की परत से सुसज्जित है।

मंदिर जाने का तंग रास्ता

मंदिर में प्रवेश के लिए एक तंग गली है, जिसे ‘फूल गली’ भी कहते हैं। यहां फूल, नारियल, व गणेशजी की प्रिय पीले रंग की मिठाई की दुकानें हैं। श्रद्धालु यहां से प्रसाद खरीद कर मंदिर में चढ़ाते हैं। यहां पर तुलसी के फूलों की माला भी मिलती है, जिसे श्रद्धालु अवश्य खरीदते हैं। सिद्धि विनायक का यह मंदिर पहले बहुत छोटा था। पिछले दो दशकों में इस मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण हो चुका है। वर्तमान में सिद्धि विनायक मंदिर की इमारत पांच मंजिला है और यहां प्रवचन ग्रह, गणेश संग्रहालय व गणेश विद्यापीठ के अलावा दूसरी मंजिल पर अस्पताल भी है, जहां रोगियों की मुफ्त चिकित्सा की जाती है। इसी मंजिल पर रसोईघर है, जहां से एक लिफ्ट सीधे गर्भग्रह में आती है। पुजारी गणपति के लिए निर्मित प्रसाद व लड्डू इसी रास्ते से लाते हैं।

अन्य दर्शनीय स्थल

सिद्धि विनायक मंदिर के पास ही में एक हनुमान मंदिर भी है, जिसका निर्माण 1952 में पुजारी स्वामी समर्थ ने करवाया था। इस मंदिर के प्रति भी लोगों की भरपूर आस्था है।

 

कब जाएं?

मुंबई स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में पूरे वर्ष ही श्रद्धालु जाते हैं। मंगलवार को यहां खूब भीड़ रहती है, जबकि गणेश चतुर्थी को अधिक संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

कैसे जाएं?

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई रेलगाड़ी, बस, निजी वाहनों या हवाई जहाज से जाया जा सकता है। रेलवे स्टेशन व अन्य स्थलों से ऑटो द्वारा मंदिर तक पहुंचना आसान है।

कहां ठहरें?

मुंबई में ठहरने की कोई समस्या नहीं है। मंदिर के पास रेस्ट हाऊस, धर्मशाला और हर स्तर के होटल ठहरने के लिए मिल जाते हैं।

 

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