आंध्रप्रदेश

भद्राचलम् गणेश मंदिर- भद्राचलम् का यह मंदिर राजामुण्डरी से लगभग 130 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। इस स्थान पर लगभग 25 मंदिर हैं जो श्रीराम मंदिर के अंतर्गत आते हैं जिनमें भिन्न-भिन्न भगवानों की पूजा-अर्चना होती है। श्रीराम मंदिर गोदावरी नदी के किनारे भद्राचलम्ï में स्थित है। इन प्रसिद्ध मंदिरों में यह गणेश मंदिर भी जगत प्रसिद्ध है।

पाटला विनायक (विजयवाड़ा)- 

विजयवाड़ा राजामुण्डरी से लगभग 145 कि.मी. की दूरी पर है। इस स्थान पर पूर्व दिशा में बहुत-सी गुफाएं हैं और इन्हीं में से एक गुफा में गणपति का विग्रह स्थापित है। यहां भक्तों की भारी भीड़ पूरे वर्ष भर रहती है। इसके अलावा यहां आरसवाली मंदिर भी प्रसिद्ध है जो श्रीकाकुलम् जिले में स्थित है।

बिहार

राजगृह- यह स्थान उसी प्रकार प्रसिद्ध है जिस प्रकार बिहार में बुद्ध के तीर्थ स्थान प्रसिद्ध हैं। यह प्रसिद्ध मंदिर विपुलांचल पहाड़ी जो राजगृह के निकट स्थित है, के दक्षिण में है।

मंडर पर्वत- यह स्थान दक्षिणी भागलपुर से लगभग 50 कि.मी. दूर एवं 700 फुट ऊंचा है। इसी स्थान पर एक झील है जिसे पापहारिणी कहते हैं, यहां भी श्री गणेश का एक प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर है।

रामगढ़- रामगढ़ शाहबाद जिले में स्थित एवं भाबुआ रेलवे स्टेशन से लगभग 13 कि.मी. की दूरी पर है, यहीं पर मुण्डेश्वरी मंदिर स्थित है। इसी मंदिर में गणेश जी का विग्रह रूप बहुत ही प्रसिद्ध है।

गोवा

खण्डोलयाचा गणपति खण्डोला, (पोण्डा तालुका)- यह मंदिर नवेली में स्थित है जो दिवाड़ी गांव तिसवाड़ी तालुका में है। सन् 1560 के एक युद्ध के दौरान यहां पर गणपति के विग्रह रूप को यहां के प्रसिद्ध भगवान खाण्डेपर के साथ पोण्डा में स्थापित किया गया था।

गोपाल गणपति (बाण्डीवाड़े)- लगभग 90-100 वर्ष पहले एक ग्वाला जिसे ‘हापो’ कहते थे, वह बाण्डीवाड़े के राजा सौनधेकर के यहां नौकरी करता था। उसे एक दिन जंगल में 1 फुट ऊंची गणेश की पत्थर की मूर्ति मिली, उसने वहीं जंगल में नारियल की पत्तियों से एक मंडप बनाकर उस मूर्ति को वहीं रख दिया। इसे देखकर वहां के मुख्यमंत्री बाण्डोडकर ने वहां गणपति का एक मंदिर बनवाया जो 1966 में बनकर तैयार हुआ।

गुजरात

भद्रगणेश- दूर्गाकुटा गणेश सोरती सोमनाथ के निकट स्थित है। माना जाता है कि यह मंदिर पेशवा काल का है जो अहमदाबाद में स्थित है।

गांव सिसोदरा, नवसारी जिले में एक बरगद के वृक्ष के साथ ही गणेश जी की एक मूर्ति है। कहते हैं यह मूर्ति लगभग 400 साल पुरानी है।

दुशाधिराज गणपति (बड़ौदा)- गणेश भक्त गोपालराव मेरल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके अलावा सिद्धनाथ मंदिर एवं रेवती गणेश मंदिर जो गिरनार की पहाड़ियों पर स्थित हैं, भी बहुत प्रसिद्ध हैं।

गणपति मंदिर (पटवारोरा)- यह मंदिर 10 अप्रैल, 1902 में ‘यादवराव गोण्डदेव पगेदार’ द्वारा बनवाया गया था ताकि सभी यहां पूजा-अर्चना कर सकें।

मोद्येरा गणेश- यह स्थान बेचराजी से 30 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहां भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है।

एकदंत गणपति (ध्रांगधरा)- एक किंवदंती के अनुसार इस मंदिर का निर्माण एक ग्वाले ने करवाया था। इस मंदिर में रखी मूर्ति 7 फुट ऊंची तथा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है एवं इस मूर्ति का केवल एक ही दांत है।

हिमाचल प्रदेश

श्रीगणेश (गणेश गुफा)- ऐसा माना जाता है कि श्री गणेश ने महाभारत को इसी स्थान पर लिखा था।

अमरनाथ गुफा- यहां श्री गणेश की बर्फ की मूर्ति को देखा जा सकता है।

सद्भुजा गणेश- बैजनाथ (कांगड़ा), एक महान ‘संत ज्ञानेश्वर’ ने अपनी पुस्तक  ‘ज्ञानेश्वरी’ में श्री गणेश के छह हथियारों या अस्त्र-शस्त्रों का वर्णन किया था। वही अस्त्र-शस्त्र यहां गणेश के छह हाथों में दिखाई देते हैं।

कर्नाटक

कौण्ड्रिया महागणपति (कुरजमले, कोलार जिला)- महागणपति की एक 9 फुट ऊंची मूर्ति जो हरे संगमरमर (मार्बल) से बनी है यहां देखी जाती है।

विघ्नहरण विनायक, हंपी- यह मूर्ति हाथी के सिर की न होकर एक मनुष्य रूपी है। विघ्नहरण विनायक ने गजमुखासुर असुर की हत्या यहीं की थी। मंदिर का महाद्वार एवं मुख्यमंडप विजयनगर काल का है, मंदिर में 25 खंभे जो लगभग 12 फुट ऊंचे हैं, मुख्यमंडप को संभाले हुए हैं।

गोकर्णा गणपति- यहां के गणपति एक ब्राह्मïण के रूप में देखे जाते हैं, जिसका नाम ‘बातु’ था, जिसने एक शिवलिंग को रावण के दुष्ट हाथों से बचाया था। मूर्ति लगभग 5 फुट ऊंची है।

पट्टा गणपति- यहां गणपति को पट्टा या चिंतामणि गणपति कहते हैं।

केतकी गणपति- यह गोकर्णा का तीसरा मंदिर है जिसमें गणपति केतकी विनायक के रूप में पूजे जाते हैं।

मध्यप्रदेश

चिंतामन गणेश मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन में ‘चिंतामन गणेश मंदिर के नाम से मशहूर इस मंदिर में, गणेश आपरूपी निकले हैं। इन्हें ‘विघ्नेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां की मान्यता के अनुसार यहां भक्तों की चिंता और हर तरह के दुखों का अंत होता है, भक्तों के रास्ते में जो भी बाधाएं आती हैं वो सब दूर हो जाती हैं। गणेश जी की दोनों पत्नियां रिद्धि और सिद्धि भक्तों के लिए कष्टविनायक हैं और ये श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के दुखों का संहार करती हैं। इसलिए गणपती को लोग चिंतामन के नाम से भी जानते हैं। उज्जैन में स्थित बड़े गणेश जी का मंदिर जिसमें गणेश जी गज के मुख में है जो कि सफलता और बुद्धिमानी का सूचक है। इनके दर्शन से आपकी स्थिति में सुधार व अन्य इच्छाओं की पूर्ति होती है।

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर सबसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थानों में गिना जाता है। और ये देश के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक पवित्र ज्योर्तिलिंग है। जमीन के भीतर आपरूपी यानी स्वयंभू भगवान गणेश के ज्योर्तिलिंग से निकला प्रकाश पूरे मंदिर को रोशनी से भर देता है।

बड़ा गणेश- इंदौर के इस मंदिर में भगवान गणेश की 12 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है।

-उज्जैन के श्री चिंतामणि।

-अमरकंटक के द्विभुजा सिद्धि विनायक जिनकी केवल दो ही भुजाएं हैैं आदि।

महाराष्ट्र

श्वेता वीणाभकर मंदिर में भगवान गणपति श्वेत यानी उजले रंग में हैं और यहां भगवान पूजा का केंद्र बिन्दु है। पहले इसे भगवान शिव को समर्पित किया गया था जिसे हम श्वेता वीणाभकर पवित्र स्थल के नाम से ज्यादा जानते थे। विणाभक  चतुर्थी के दौरान इस मंदिर में दस दिनों तक त्योहार मनाया जाता हैं। स्वयंभू गणपति मंदिर जिसे मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं किया गया, बल्कि महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गणपति पुले में भगवान गणेश आपरूपी प्रकट हुए। तकरीबन चार सौ साल पुराने ‘श्रीरीन बीच’ के नाम से मशहूर इस गणपति मंदिर को एक अलग विशेषता प्राप्त है। वहां के लोग गणेश जी की पूजा-अर्चना के साथ-साथ लगातार पांच दिनों तक गणेश चतुर्थी का त्योहार भी बड़े धूमधाम से मनाते हैं।

गणपति फुले- सिसौर के निकट यह महाराष्ट्र का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। कहते हैं ऋषि परशुराम ने यहां पहाड़ी की ऊंचाई पर भगवान गणेश की मूर्ति को स्वयं स्थापित किया था। यह पहाड़ी स्वयं में गणेश की आकृति की है।

मंगलमूर्ति (चिंचवाड़, पूणे)- संत ऋषि मौरया गोसावी को यहां मोरगांव में गणेश की एक मूर्ति प्राप्त हुई जिसे संत ऋषि ने चिंचवाड़ में स्थापित किया।

दिगंबर सिद्धि विनायक (काड़व)- संत कनव ने यह मंदिर बनवाया था और जिस समय से यह प्रतिमा बिन वस्त्रों के रही, उस वक्त से ही इसे दिगम्बर कहा जाने लगा।

इसके अलावा भी महाराष्ट्र में विभिन्न मंदिर प्रसिद्ध हैं जैसे- श्री सिद्धिविनायक, श्री गणपति देवस्थान-सांगली, कसाबा गणपति पुणे, राजपुर गणपति-राजपुर, दशाभुजा लक्ष्मी गणेश, एकचक्र गणेश-केल्जर, श्री मोडाकेश्वर-नासिक, बालब्रह्मï चारो गणेश, श्री वक्रतुण्ड-आवास, श्री सिद्धि विनायक-(अंजाली, तालुका दपोली, जिला रत्नागिरी। 

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