वैसे तो भगवान की स्तुति के लिए असल में कोई नियम और विधि नहीं है, पर व्यक्ति का ईश्वर के प्रति ध्यान और भाव दृढ़ हो, इसके लिए हर धर्म में कुछ खास नियम बनाए गए हैं और ये नियम, संस्कारों और परम्पराओं के रूप मे एक पीढ़ी से दूसरे पीढी़ में संचारित होते हैं। इस तरह से धर्मकर्म और उनसे जुड़े नियम मानवीय जीवन का अहम हिस्सा जाते हैं। ऐसे में ये नियम हमारे व्यवहार में शामिल तो हो जाते हैं, पर कई बार हम इनका व्यवहारिक महत्व हम नहीं जान पाते। जैसे कि आप पूजा के दौरान धूपबत्ती तो जलाते होंगे, पर क्या आपको पता है कि ऐसा क्यों करते हैं। अगर नहीं तो चलिए जानते हैं।
वैसे तो पूजा-पाठ के दौरान धूपबत्ती का प्रयोग इस मान्यता के साथ किया जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं। पर वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो धूपबत्ती जलाना भगवान को सम्मोहित करने से कहीं अधिक व्यक्तिगत रूप से लाभकारी होता है। असल में धूपबत्ती जलाने से उसके धुएं से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है। इस शुद्ध वातावरण में की पूजा-अर्चना अधिक फलदायी होती है।
इसके साथ ही धूपबत्ती जलाना व्यक्तिगत रूप से भी लाभकारी होता है, धूपबत्ती के सुगन्ध से मानसिक शान्ति और प्रसन्नता मिलती है। इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है, इस तरह से ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।
