गुरुवार का व्रत ऐसा उपवास है, जिसकी मान्यता भारतीय परिवारों में कह सकते हैं, सबसे ज्यादा है। हिन्दू धर्म को मानने वाले सभी परिवारों में कोई न कोई ये व्रत जरूर रख रहा होता है। मगर इस व्रत को सुनी सुनाई बातों के हिसाब से रखना सही नहीं है। बल्कि इसके सही नियम-कायदे आपको जानने ही होंगे। ताकि आपकी भक्ति का सही फल आपको मिल पाए। इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं बस छोटी-छोटी बारीक बातों को अपनी पूजा का हिस्सा बनाना होगा। जैसे गुरुवार की पूजा में भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें। फिर देखिएगा, कैसे भगवान की कृपा आप पर बनती है। चलिए जानते हैं, इस व्रत से जुड़ी जरूरी बातें-

नहाने का समय-
गुरुवार के व्रत में नहाने के समय का भी ध्यान दिया जाता है। इसके लिए जरूरी होगा कि सूरज के उगने से पहले ही नहा लिया जाए। सुबह-सुबह नहाने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। फिर तुलसी जी और शालिग्राम भगवान को भी जल चढ़ाएं।

सबकुछ हो पीला-
ये तो आप जानती ही होंगी कि पीले रंग को भगवान विष्णु की पसंद माना जाता है। इसलिए सिर्फ पीले कपड़े पहनने से काम नहीं चलेगा। बल्कि आपको कई सारी दूसरी चीजें भी पीली ही चुननी होंगी। जैसे पीले फल, पीली मिठाई, पीले चावल, हल्दी, चने की दाल और मुनक्का।
केले के पेड़ की पूजा-
गुरुवार के व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसके साथ देवी लक्ष्मी और केले के पेड़ की भी पूजा की जाती है। इसमें भी कुछ बातें ध्यान रखनी होंगी, जैसे केले के पेड़ पर आपको हल्दी वाला जल चढ़ाना होगा। अब केले के पेड़ की जड़ में चने की दाल चढ़ाएं साथ में मुनक्का भी। इसके बाद आपको पेड़ पर दिया जला कर आरती भी करनी होगी। दिए से आरती उतारने बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करें।
खाने में क्या खाएं-
ऊपर लिखे सारे काम पूरे करने के बाद आपको ब्रहस्पति व्रत कथा पूरी करनी होगी। गुरुवार के व्रत में एक बात आपको ध्यान रखनी है। खाने में वो चीजें बिलकुल शामिल नहीं करनी हैं, जो आपने पूजा में चढ़ाई हैं। इसके साथ खाना भी आपको एक बार ही खाना है। साथ में ध्यान रखने कि खाने में नमक न हो और आपने पीले कपड़े पहनें हों।
पूरे साल का वो समय-
ये एक ऐसा व्रत है, जिसे पूरे साल नहीं रखा जा सकता है। बल्कि इसे साल के एक खास महीने में करने से मना किया जाता है। ये खास महीन है पूष का। पूष को पौष भी कहा जाता है, जो आमतौर पर दिसंबर या जनवरी के आसपास पड़ता है। इसके अलावा इसे किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू किया जाना सही रहता है। वैसे भी शुक्ल पक्ष से किसी भी अच्छे काम की शुरुआत की जा सकती है।
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