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जन्माष्टमी
जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और इस दिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। लगभग सभी हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग जन्माष्टमी का व्रत रखते है परन्तु काफी भक्तगण इस असमंजस में रहते हैं कि व्रत कैसे रखे और व्रत में क्या-क्या करें? आपकी इस चिंता को दूर करने के लिए आज हम आपको बतायेंगे कि व्रत के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। साथ ही आचार्य अजय तापसी जी से बातचीत पर आधारित पूजा विधि की संपूर्ण जानकारी भी देंगे।
 
व्रत मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं
 
निर्जला व्रत – इस तरह के व्रत में पानी नहीं पिया जाता है और इस व्रत को श्रीकृष्ण लला के जन्म के बाद पूजा-अर्चना और तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही व्रत तोड़ देते हैं।
 
अल्पाहार व्रत – इस तरह के व्रत में दूध से बने पदार्थ जैसे दही, मक्खन और दूध से बनी मिठाईयों का सेवन किया जाता है।
 
कुछ ध्यान देने योग्य बातें
 
– व्रत की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
– व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होने के बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें: ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये
– मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है. 
– इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए।
– फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें-
‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमो:स्तुते।’
– अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।