कंट्रोलिंग पेरेंट्स बनाते हैं अपने बच्चों को कमज़ोर, ऐसे करें मैनेज: Controlling Parents
Controlling Parents

माता पिता ना रखें ज्यादा नियंत्रण, बच्चों को जीने दें उनका बचपन

माता पिता को बच्चों के साथ कुछ ऐसे तरीके आजमाने चाहिए जिस से ना बच्चों का आत्मविश्वास डोले और ना ही उनके मन को कोई ठेस पहुंचे।

Controlling Parents: कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों के जीवन में बहुत ज्यादा हस्तक्षेप करते हैं, जिसका असर बच्चे की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर पड़ सकता है। बच्चों के लिए सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण बनाने के लिए माता-पिता को समय-समय पर अपने नज़रिये में बदलाव करना जरूरी है। बच्चों को ज्यादा नियंत्रण में रखने से उनकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता प्रभावित हो सकती है।

माता पिता को बच्चों के साथ कुछ ऐसे तरीके आजमाने चाहिए जिस से ना बच्चों का आत्मविश्वास डोले और ना ही उनके मन को कोई ठेस पहुंचे।

कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों पर बहुत ज्यादा नियंत्रण रखते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि वे बच्चों के भले के लिए ऐसा कर रहे हैं। ऐसा करने की जगह अगर आप अपने बच्चे पर भरोसा दिखाएंगे और उन्हें खुद के फैसले लेने का मौका देंगे, तो उनका आत्म-सम्मान भी बढ़ेगा। बच्चों की क्षमताओं और निर्णयों पर विश्वास रखें। उन्हें यह महसूस कराएं कि वो अपनी जिम्मेदारी ले सकते हैं।

बच्चों को अपनी पसंद और नापसंद चुनने का अवसर देना बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता हमेशा बच्चों के हर फैसले को नियंत्रित करेंगे, तो बच्चे आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे और उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारिया देने की कोशिश करें, ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें।

हर बच्चे से गलतियां होती हैं, और ये गलतियां सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। यदि माता-पिता बच्चों को हमेशा हर गलती से बचाते हैं, तो वे कभी सीख नहीं पाएंगे। बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने दें, लेकिन उन्हें यह भी बताएं कि सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

बच्चों की दुनिया बदल रही है, और उनके सामने आने वाली चुनौतियां भी। माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चों की परवरिश में लचीलापन और बदलाव जरूरी हैं। बच्चों के दृष्टिकोण और परिस्थितियों को समझते हुए अपनी पेरेंटिंग स्टाइल में बदलाव लाने के लिए तैयार रहें।

बच्चे तभी आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं जब वे घर में सुरक्षित और आरामदायक महसूस करते हैं। अत्यधिक नियंत्रण या दबाव उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। घर में एक सुखद और सकारात्मक माहौल बनाए रखें, जहां बच्चे अपनी राय आपसे साझा कर सकें और अपनी गलतियों से सीख सकें।

कभी-कभी माता-पिता बच्चों से असलियत से परे अपेक्षाए रखते हैं, जैसे कि परीक्षाओं में ज्यादा मार्क्स लाना, परफेक्ट होना, या हमेशा सर्वोत्तम प्रदर्शन करना। इससे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है और उनकी सेल्फ एस्टीम में कमी हो सकती है। बच्चों से वास्तविक और समझदारी की उम्मीद रखें। उनकी मेहनत और प्रयास की सराहना करें, न कि केवल उनके परिणामों की ।

बच्चों को अकेले या सिर्फ घर पर नहीं रखना चाहिए। जब वे अन्य बच्चों के साथ समय बिताते हैं, तो उनकी सामाजिक क्षमताए विकसित होती हैं। माता-पिता को बच्चों के दोस्तों को समझने और उन्हें सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर देना चाहिए।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...