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Budhvar Vrat Katha: सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है। ठीक वैसे ही बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं, व्रत व कथा का पाठ करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बुधवार के दिन भगवान गणेश की आराधना करने से तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता और विवेक की प्राप्ति होती है।

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बुधवार व्रत कथा का महत्व

भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूज्य माना गया है और गणेश जी विवेक बुद्धि के दाता है। बुधवार का व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। इसलिए व्रत के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा गया है कि बुधवार की व्रत कथा सुनने से जीवन में सुख, शांति एवं यश की प्राप्ति होती है और साथ ही अन्न का भंडार हमेशा भरा रहता है।

बुधवार व्रत कथा

एक बार मधुसूदन नाम का एक अमीर व्यक्ति अपनी पत्नी को वापस घर लाने के लिए उसके माता-पिता के घर गया। वह कुछ दिनों तक वहां रहा और फिर अपनी पत्नी के माता-पिता से विदा लेकर जाने को कहा। लेकिन वहां मौजूद सभी लोगों ने कहा कि आज बुधवार है और आज का दिन यात्रा के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। लेकिन वह नहीं माना और बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को लेकर वापस घर की ओर जाने लगा। रास्ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो वह अपनी पत्नी के लिए गाड़ी से नीचे उतरकर पानी लेने गया।

जब वह पानी लेकर वापस आया तो वह चौंक गया। उसकी पत्नी के पास उसी की शक्ल का एक आदमी बैठा था। वह क्रोधित होकर बोला, तुम कौन हो और तुम मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो, दूसरे व्यक्ति ने उत्तर दिया, यह मेरी पत्नी है मैं इसे अब इसे इसके मायके से अपने घर ले जा रहा हूं। दोनों आपस में बहस करने लगे तभी राज्य के सिपाही ने आकर हाथ में पानी लिए वाले व्यक्ति को पकड़ लिया।

जब पत्नी से पूछा गया कि उसका असली पति कौन है तो वह कुछ ना बोल सकी क्योंकि दोनों ही एक जैसे दिख रहे थे। पानी वाला व्यक्ति प्रार्थना करने लगा कि, ‘हे प्रभु यह क्या लीला है, मैं सच्चा हूं मुझे क्यों झूठा बनाया जा रहा है।’ तब आकाशवाणी हुई और आवाज आई की मुर्ख आज बुधवार है और आज के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए पर तूने किसी की बात नहीं मानी और चल पड़ा।

इसके बाद उस आदमी को अपनी गलती का पछतावा हुआ और उसने बुद्ध देवता से क्षमा मांगी। इसके बाद वह व्यक्ति और उसकी पत्नी हर बुधवार को व्रत करने लगे और कथा का पाठ करने लगे। तब से ऐसा माना गया है कि बुधवार के दिन किसी भी स्त्री को अपने मायके से ससुराल के लिए यात्रा नहीं करनी चाहिए।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...