Body Shaming Problem: बॉडी शेमिंग समाज में पलने वाली वो बुराई जो बच्चे हों या बडे सबको कभी न कभी इसका सामना करना पडता है। अरे ये तो माचिस की तीली की तरह पतली या पतला है, अरे मोटू, गोलगप्पे, बेबी एलीफैंट ऐसे न जाने कितने नामों से लोग शरीर की बनावट के आधार पर लोगों को चिढाते हैं। बडे तो इसे हल्के में ले लेते हैं या इससे निपटने के रास्ते निकाल लेते हैं। लेकिन यही बॉडी शेमिंग बच्चों के कोमल मन पर बुरा असर डालती है। बच्चों के मन में खुद के लिए निगेटिव फीलिंग्स पनपने लगती है। कभी कभी तो पेरेंट्स और आसपडोस के लोग भी अनजाने में बच्चों को प्यार से छुटकू, कल्लू, मेरा गोलगप्पा जैसे नामों से बुला जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटी छोटी बातों का बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। स्कूल में बच्चे उनके बॉडी के आधार पर चिढाते हैं। किसी के चश्मा लगा हो तो उसे चश्मिश, कोई पढ़ने में तेज हो तो पढ़ाकू, किसी के रंग तो किसी के बात करने के अंदाज हर छोटी छोटी चीज पर बच्चों को बॉडी शेमिंग का शिकार होना पड़ता है। आजकल के सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को कम उम्र में ही लुक्स और परफैक्ट बॉडी की चाहत होने लगती है। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती हैं कि वे अपने बच्चों को खुद से प्यार करना सिखाएं। आप अपने बच्चों को बॉडी शेमिंग से निपटने और खुद से प्यार करना सिखाने के लिए इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।
बच्चों से बात करें
बच्चों को किसी भी समस्या से लडने के लिए तैयार करने का सबसे पहला कदम है बामचीत। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जब बच्चा परेशानी से घिर जाए तब आप उससे बात करने की कोशिश करें। ऐसे में बच्चो खुलकर बात नहीं करेगा। इसके लिए जरूरी है कि आप बच्चों के साथ नियमित रूप से बात करते रहें। उनकी जिंदगी से जुडी बातें, स्कूल से जुडी बातें करें। बच्चे को उसके शरीर के रंग रूप, बनावट के अनुसार खुद से प्यार करने के लिए प्रेरित करें। आजकल बच्चे सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की कोशिश में अच्छी फोटो न आने पर हताश हो जाते हैं। बच्चों को उनके आइडियल चाहे वो किसी भी फील्ड के हों उनका उदाहरण देकर उन्हें खुद की अहमियत समझाएं।
उनकी क्वालिटीज पर फोकस करना सिखाएं

बच्चों को उनकी स्ट्रैंथ बताएं। उन्हें बताएं हर किसी में कुछ कमियां और कुछ अच्छाइयां होती हैं। हमें अपने क्वॉलिटीज पर ध्यान देना चाहिए। उन क्वालिटीज के साथ खुद को प्यार करना चाहिए। हर बच्चे में कुछ न कुछ यूनीक होता है उसकी वो क्वालिटी ही उसका आत्मविश्वास बढ़ाने के काम आ सकती है।
बच्चों को दूसरों का सम्मान करना सिखाएं
अक्सर ऐसा होता है कि हमें अपने लिए जो बातें पसंद नहीं होती वही हम दूसरों के साथ अनजाने में कर जाते हैं। आप अपने बच्चों को घर पर इस बात के लिए तैयार करें की वे कभी किसी को उनके शरीर की बनावट या उनकी पर्सनैलिटी के आधार पर जज न करें। न ही किसी को शरीर के आधार पर किन्हीं नामों से बुलाएं। उन्हें समझाएं कि अगर उनके साथ कोई ऐसा करेगा तो उन्हें कैसा महसूस होगा। तो उन्हें दूसरों की फीलिंग्स और इमोशंस का सम्मान करना चाहिए।
बच्चे को खुद की तारीफ करना सिखाएं
बच्चे को वो जैसा है वैसा ही एक्सेप्ट कर खुद की तारीफ करना सिखाएं। कोई कितना भी सिखा ले लेकिन अगर बच्चा खुद नहीं चाहेगा तो उसे लोगों की बातें परेशान करेंगी। उसे सिखाएं कि वो जब भी कुछ अच्छा करे तो किसी दूसरे की तारीफ का इंतजार करने की बजाय सबसे पहले खुद ही तारीफ करे। लेकिन ये भी ध्यान रहे कि खुद की तारीफ करते करते कहीं दूसरे की बुराई न करने लगे। किसी से किसी भी तरह की तुलना करने से बचें।
बच्चे के साथ हैल्दी लाइफस्टाल फॉलो करें
बच्चों को मानसिक रूप से स्ट्रांग बनाने के लिए बेहद जरूरी है कि उन्हें एक्सरसाइज, योगा या मेडिटेशन की तरफ प्रेरित करें। उसके लिए आप उनके साथ रूटीन बनाकर खुद डेली इन आदतों को फॉलो करें। मेडिटेशन करने से मन शांत रहता है और अपने मन पर काबू पाने की क्षमता बढ़ती है। यही नहीं उन्हें गेम्स खेलने के लिए भी प्रेरित करें। गेम्स में उन्हें जीत हार से परे गेम को एंजॉय करने की सलाह दें।
