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Surya Rekha: मान-सम्मान की रेखा सूर्य रेखा
Surya Rekha in Hand

Surya Rekha: मान-सम्मान की प्रतीक सूर्य रेखा को सफलता और प्रतिभा की रेखा भी कहा जाता है। उसके गुणों और प्रभाव में भी भाग्य रेखा के समान और हाथ की बनावट के अनुसार भिन्नता होती है। इस रेखा का प्रारंभ, हथेली में कहीं से भी हो परन्तु अंत सूर्य पर्वत पर ही होता है। यह विशेष रूप से दार्शनिक नुकीले और अत्यन्त नुकीले हाथों में भारी व प्रभावशाली अंकित होती है। लेकिन वर्गाकार और चमसाकार हाथों में यह उतनी प्रभावशाली नहीं होती।

  • सूर्य रेखा एक अच्छी भाग्य रेखा से  मिलकर सफलता में वृद्धि करती है,  प्रसिद्धि और विशिष्टता दिलाती है  लेकिन तभी जब हाथ की अन्य रेखाओं  से कॅरियर और कार्यक्षेत्र के अनुकूल  संकेत हों। अन्यथा जातक की मनोवृत्ति  कला की ओर झुकी होती है।
  • सूर्य रेखा के आरंभ होने के मुख्य  स्थान हैं- जीवन रेखा, भाग्य रेखा, चन्द्र  क्षेत्र, मंगल पर्वत और शीर्ष तथा हृदय रेखा।
  • यदि हाथ में कलाप्रियता के लक्षण हों तो सूर्य रेखा के जीवन रेखा से आरंभ होने से व्यक्ति पूर्ण रूप से सौंदर्योंपासक होता है।
  • यदि अन्य रेखाएं शुभ हों तो जातक को कला क्षेत्र में काफी सफलता मिलती है।
  • यदि सूर्य रेखा भाग्य रेखा से आरंभ हो तो भाग्य रेखा से व्यक्त सफलता में वृद्धि होती है। जिस आयु में सूर्य रेखा भाग्य रेखा से उठती है तो उसी आयु में अधिक विशिष्टता और कॅरियर में उन्नति प्राप्त होती है। यह राजयोग के समान लाभप्रद है तथा कला के क्षेत्र में सफलता देती है। यह रेखा धनवान और समृद्ध बनाने में सहायक सिद्ध होती है। यदि शीर्ष रेखा चन्द्र क्षेत्र पर झुकी हुई हो तो सफलता प्राय: काव्य और उपन्यास आदि लिखने में मिलती है। कल्पनाशीलता से प्रेरणा मिलती है।
  1. मध्यमा
  2. अनामिका
  3. कनिष्ठिका
  4. शुक्र मेखला
  5. विवाह रेखा
  6. हृदय रेखा
  7. सूर्य रेखा
  8. मस्तिष्क रेखा
  9. भाग्य रेखा
  10. शुक्र पर्वत
  11. जीवन रेखा
  12. अंगूठा
  13. गुरु पर्वत
  14. तर्जनी
  • यदि सूर्य रेखा हथेली से आरंभ हो तो कठिनाइयां और संघर्षों के बाद सफलता मिलती है।
  • यदि शीर्ष रेखा से आरंभ हो तो व्यक्ति को अपनी बौद्धिक क्षमता के द्वारा सफलता प्राप्त होती है। लेकिन सफलता 35 वर्ष की आयु के बाद ही मिलती है। यदि सूर्य रेखा हृदय रेखा से आरंभ हो, तो प्रतिभा और विशिष्टता जीवन के अंतिम भाग में 50 वर्ष के बाद प्राप्त होती है। यदि अनामिका लंबाई में मध्यमा के बराबर हो और सूर्य रेखा लंबी हो तो योग्यता, धन और जीवन में प्राप्त अवसरों के साथ वह व्यक्ति जुआ खेलेगा। ऐसे व्यक्ति हर काम में रिस्क लेने को तैयार रहते हैं।
  • यदि सूर्य रेखा स्पष्ट रूप से अंकित हो, तो संवेदनशीलता की प्रवृत्ति अधिक होती है। यदि शीर्ष रेखा बिल्कुल सीधी हो तो धनवान बनने और सामाजिक क्षेत्र में मान-सम्मान तथा अधिकार प्राप्त करने की ओर झुकाव बढ़ जाता है।
  • यदि सूर्य क्षेत्र पर अनेक रेखाएं हों तो व्यक्ति अत्यन्त कलाप्रिय होता है। लेकिन उसके दिमाग में इतनी कल्पनाएं और योजनाएं होती हैं कि वह किसी को भी कार्यान्वित नहीं कर पाता। इस रेखा पर नक्षत्र का होना अत्यन्त शुभ माना जाता है। व्यक्ति को सुख, सौभाग्य और सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है।
  • सूर्य रेखा पर यदि वर्ग का चिह्न हो तो मान-मर्यादा को क्षति पहुंचती है। व्यक्ति पदच्युत होता है। द्वीप के अदृश्य हो जाने पर यदि रेखा सामान्य बनी रहे तो मानप्रतिष्ठा पुन: प्राप्त कर लेता है।
  • यदि सूर्य रेखा पर गड्ढा हो तो जातक बिल्कुल शक्तिहीन हो जाता है। यदि सूर्य रेखा न हो तो व्यक्ति कितना भी परिश्रम करे योग्यता को मान्यता प्राप्त नहीं होगी। कई व्यक्ति मान-सम्मान के योग्य और अधिकारी होने पर भी उससे वंचित रह जाते हैं। मृत्यु के पश्चात् उन्हें सम्मान प्राप्त होता है। जीवित होते हुए उन्हें योग्यता और गुणों का पुरस्कार नहीं मिलता।

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