विश्व तंबाकू दिवस के अवसर पर, मेदांता – द मेडिसिटी हॉस्पिटल ने क्विट स्मोकिंग प्रोग्राम शुरू किया। इस प्रोग्राम का उद्देश्य विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में तंबाकू के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता पैदा करना है। डॉ. नरेश त्रेहन, डॉ. अशोक वैद, डॉ. राजीव परख और डॉ. आर. आर. कासलीवाल की अध्यक्षता में, इस पहल के तहत तम्बाकू के इस्तेमाल के खतरों पर प्रकाश डाला गया और तंबाकू पर प्रतिबंध लगाकर समाज में स्वास्थ्य और विकास को बढ़ावा देने के लिए समुचित उपाय करने की सलाह दी गई।
हर साल तंबाकू सेवन के कारण दुनिया भर में 70 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है जिनमें से लगभग 80 प्रतिषत समय से पूर्व मौत कम या मध्यम आय वाले देशों में होती है। अगर तम्बाकू सेवन रोकने के लिए सख्त नीतियां नहीं बनाई गईं तो इस आंकड़ा के बढ़ने की उम्मीद है। लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए, मेदांता – द मेडिसिटी ने काउंसलर को भी नियुक्त किया है जो तम्बाकू के दुष्प्रभावों के बारे में मरीजों का मार्गदर्शन करेंगे।
मेदांता-द मेडिसिटी के क्लिनिकल एवं प्रीवेंटिव कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. आर. आर. कासलीवाल ने कहा, ‘‘तम्बाकू सेवन कैंसर, फेफड़े और हृदय रोगों जैसे सभी गैर-संचारी रोगों के कारण होने वाली 16 प्रतिशत मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। आर्थिक रूप से, यह लोगों और देश को बड़े पैमाने पर भी प्रभावित करता है। तम्बाकू के इस्तेमाल से उत्सर्जित धुएं वातावरण में विशैले पदार्थों और ग्रीन हाउस गैसों में काफी हद तक योगदान देते हैं। तंबाकू के इस्तेमाल के कारण हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है और अगर हम इस संख्या को बढ़ने से रोकने का इरादा रखते हैं, तो नीति निर्माताओं को तंबाकू पर प्रतिबंध लगाने की सख्त आवश्यकता है। मेदांता में हम अपने रोगियों के लिए काउंसलरों की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, जो उन्हें तम्बाकू छोड़ने की समस्या का सामना करने में मदद करेंगे।
तंबाकू के इस्तेमाल के कारण स्वास्थ्य मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए, रेस्पिरेटरी एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डॉ. बोर्नली दत्ता ने कहा, ‘‘तंबाकू के इस्तेमाल की समस्या हमारे देश में बड़े पैमाने पर व्याप्त है और जिसके कारण, यह न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि इसका सेवन करने वाले लोगों और देष की आर्थिक स्थिति को भी बड़े पैमाने पर कमजोर कर रहा है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा तो बढ़ता ही है, उन्हें अक्सर हृदय से संबंधित समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसके सेवन को रोकने के लिए एक सख्त उचित कानून बनाने की जरूरत है ताकि इसके सेवन कोे कम किया जा सके।”
इस पहल के तहत प्रख्यात डॉक्टरों की ओर से एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। जिसमें डॉ. तेजिंदर कटारिया ने तम्बाकू मुक्त दुनिया – क्या ऐसा संभव है विषय पर, डॉ. आनंद जैसवाल ने माध्यमिक / तृतीयक धूम्रपान के प्रभाव पर, डॉ. सुशीला कटारिया ने धूम्रपान करने वाले रोगियों के प्रति डॉक्टर के दृष्टिकोण पर और डॉ. संदीप मेहरोत्रा ने मनोचिकित्सक तंबाकू का सेवन छोड़ने में किस प्रकार मदद कर सकते हैं, विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।
