एक आम धारणा बनती जा रही है कि जिसके पास जितना अधिक पैसा होगा, वह उतना ही अधिक सुखी होगा। हर कोई ज्यादा से ज्यादा संपन्न होना चाहता है, क्योंकि संपन्नता को ही सुखी होने का आधार माना जाने लगा है। सवाल उठता है कि क्या पैसे वाले सभी लोग सुखी हैं? क्या उनका प्यार मजूबत है? क्या पैसा प्यार को वाकई मजबूत बनाता है या फिर उसे तोडऩे का काम करता है?

दिल नहीं जेब देखती हैं महिलाएं

फिल्मों या किस्सों-कहानियों में तो कई बार आपने सुना या देखा होगा कि एक अमीर नायिका गरीब नायक के प्रेम में पड़कर सब कुछ भुला देती है। नायिका के लिए उसके प्रेमी के आगे धन दौलत, दुनिया के सारे एशों आराम कोई मायने नहीं रखते। ऐसी कहानियां देखने में तो बहुत पसंद आती हैं लेकिन आज के संदर्भ में देखें तो यह अब उतनी व्यावहारिक नहीं रह गई हैं। वैसे तो प्रेम संबंध कभी भी आर्थिक हालात पर निर्भर नहीं रहे, लेकिन आज की नारी प्रेम करने से पहले धन-दौलत और आमदनी को ही प्रमुखता देने लगी है, चीन में हुए एक सर्वे के अनुसार चीनी महिलाएं एक अमीर और ज्यादा पैसा कमाने वाले पुरुष के साथ ही डेट पर जाना चाहती हैं। वे ऐसे पुरुषों से खुद को दूर रखती हैं, जिनकी आय अधिक नहीं है। एक निजी डेटिंग और मैट्रीमोनियल वेबसाइड के संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान 80 प्रतिशत महिलाओं ने यह बात स्वीकार की है कि वे किसी अमीर व्यक्ति के साथ ही संबंध बनाए रखना चाहती हैं। वे पुरुष जो प्रतिमाह 4,000 युआन यानी कि 35,000 रुपये महीना से कम कमाते हैं, महिलाएं उनसे दूरी बनाए रखना चाहती हैं। चीन के एक सरकारी समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक तिहाई चीनी महिलाओं ने 10,000 युआन यानी कि 83,000 रुपये कमाने वाले पुरुषों को अपनी लिस्ट में पहला स्थान दिया था। इस सर्वेक्षण में 50,000 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिनका कहना है कि वे जिस पुरुष से शादी करना चाहती हैं, उसके पास अच्छी आय के अलावा अपना घर और बैंक बैलेंस भी होना चाहिए। भले ही यह चीनी महिलाओं की मानसिकता को प्रदर्षित करता शोध हो, लेकिन भारतीय महिलाओं की सोच भी इससे कुछ अलग नहीं है।

प्रेम से ज्यादा महत्त्व पैसे का

एक अध्ययन की मानें तो पैसे और परिवार की जंग में जीत केवल पैसे की ही होती हैं। इस शोध की मानें तो धन की सहायता से आप दुनिया की हर खुशी खरीद सकते हैं। वहीं अगर आपके पास धन नहीं है और आपका परिवार आपके पास है तो फिर भी आप उन्हें संतुष्ट नहीं रख सकते हैं। ब्रिटिश मीडिया के अनुसार अध्ययन में सम्मिलित शोधकर्ताओं ने पूरी दुनिया के 126 देशों के आंकड़ों की पड़ताल की और यह निष्कर्ष निकाला कि प्रेम से ज्यादा महत्त्व पैसे का होता है, क्योंकि इसी पर आपकी आगे की खुशिया निर्भर करती हैं, इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स अफेयर की रिपोर्ट में बताया गया है कि खुशी का पैमाना व्यक्ति के संचित धन से जुड़ा होता है।

रोमांस को घटाता है पैसा

डेली मेल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हर पांच में से मात्र एक पुरुष ही परंपरागत तौर से अपने लव इंटस्ट के समक्ष प्रेम का इजहार करने में दिलचस्पी लेता है। वहीं दस में से एक ही अपने प्रस्ताव को लेकर उत्सुक रहता है और कई दिन पहले से उसके बारे में सोचता है कि प्रपोज करने का कौन सा तरीका महिला को ज्यादा आकर्षित करेगा, ताकि वह किसी भी रूप में उसे इंकार ना कर पाए। लोग चाहते तो हैं कि वे अपने प्रेम का इजहार कुछ अलग तरीके से करें, लेकिन उस पर आने वाले खर्च को सोच वह चुप लगा जाते हैं। इजहार करने के बारे में बस सोचते ही रह जाते हैं और बात हाथ से निकल जाती है। लगभग 1500 लोगों को केंद्र में रखकर किए गए इस शोध के प्रमाणों को देखकर संबंध विशेषज्ञ टेवर सिलवेस्टर का मानना है कि ब्रिटिश लोगों के जीवन में घटते रोमांस का सबसे बड़ा कारण आर्थिक मंदी है। ऐसे समय में व्यक्ति अपनी इच्छाओं को कम कर देता हैं। वह जीवन को बहुत सामान्य तरीके से जीने लगता है। प्रेम प्रस्ताव के लिए वह ज्यादातर व्यय करने की स्थिति में नहीं रहता है, इसलिए सस्ते उपायों को तलाशता है, लेकिन आज प्रेम को भावनाओं से नहीं, बल्कि प्रपोज करने के तरीके और अंदाज से मापा जाता है।

पैसे वाले के लिए प्रेमी को छोडऩा

लड़कियों को लगता है कि उसके ब्वाफ्रेंड से उनका स्टेट्स तय होता है, इसलिए वे अपना ब्वायफ्रेंड उस लड़के को ही बनाना चाहती हैं, जिसका बैंक बैलेंस मोटा हो, जिसके पास घुमाने के लिए बढिय़ा बाइक और कार हो। बात सिर्फ घूमने-फिरने तक ही सीमित नहीं है। वे सब कुछ देख परख कर ही करती है कि उस लड़के के साथ उसका भविष्य क्या होगा। सोसाइटी में कहीं कोई ये ना कह दें कि बस ये कड़का लड़का ही बचा था ह्रश्वयार करने के लिए, इसलिए वह इन सभी चीजों का ध्यान रखकर ही लड़के को चुनती है। अगर लड़के से दोस्ती हो भी गई और प्यार के वादे शादी तक पहुंच भी गए लेकिन बीच रास्ते में किसी मोटे पैसे वाले ने प्रपोज कर दिया तो वह रूककर सोचती हैं कि मेरा भविष्य किसके साथ ज्यादा सुरक्षित है। ऐसे में वह पूर्व प्रेमी को छोडऩे से एक बार भी नहीं हिचकिचाती आफटरआल सवाल पैसे का है।

ब्वायफ्रेंड से महंगे उपहारों की मांग

ब्वायफ्रेंड जितना ज्यादा महंगा उपहार देगा, लड़की को लगता है कि वह उस से उतना ही ज्यादा प्यार करता है। अगर उपहार देने में उसने कंजूसी बरती तो लड़की भी अपना ह्रश्वयार देने में कंजूसी बरतने लगती है। उपहार ना देने पर उसे ब्वायफ्रेंड के प्यार में कमी नजर आने लगती है, उसे लगता है कि वह उसे प्यार ही नहीं करता और रोमांस का ज्यादातर समय एक-दूसरे को मनाने में ही निकल जाता है। धीरे-धीरे जो प्यार कल तक उन्हें एक-दूसरे की जिंदगी लगता था अब वह उन्हें बोझ लगने लगता है।

रिश्तों का आकलन पैसे से

विवाह होने के बाद भी अगर पतिपत्नी दोनों ही कमाते हैं तो कई बार पैसा रिश्तों को तोडऩे में अहम भूमिका निभाता है। वैसे भी आज पैसा नई पीढ़ी के लिए मौज-मस्ती करने और सारी भौतिक चीजों को पाने का पर्याय बन गया है। ऐसे में वह इस बात का भी निर्णायक पहलू बन गया है कि विवाह कायम रहेगा या टूटेगा, परिवार की कड़ी जुड़ी रहेगी या बिखर जाएगी। सच तो यह है कि पैसा बढऩे के साथ-साथ फासलें भी बढऩे लगते हैं। दोनों अपनी जिंदगी जीने की चाह रखने लगते हैं, अपने फैसले खुद करने लगते हैं। जब बहुत ज्यादा पैसा हाथ में आ जाता है तो जीने की शैली में बदलाव आ ही जाता है। आज विवाह टूटने की मुख्य वजहों में से एक है पैसा। पहले जहां साथी को धोखा देना या फिर उनके साथ एडजस्ट ना कर पाना विवाह टूटने के कारण हुआ करते थे, वहीं अब पैसा दूरियां पैदा करने लगा है। अधिकांश तलाक के केस ऐसे ही हैं, जहां पैसे की वजह से रिश्ते टूटे हैं। पैसा बढऩे से प्यार कम होना स्वभाविक ही है, क्योंकि तब रिश्तों को भावनाओं के आधार पर नहीं, पैसे के आधार पर आंका जाने लगता है।

अलग-अलग जिंदगी

आज के वैवाहिक जीवन में कपल्स शौक, जरूरत और उन्नति, पैसे को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। उनको एक-दूसरे के लिए बहुत कम वक्त मिलता है। थोड़ा बहुत समय देते हैं तो वह सेक्स के लिए। वैवाहिक जीवन को खुशमय बनाने के लिए एक-दूसरे के साथ बात करना, हंसना, दिन भर के खुशी और गम बांटना जरूरी होता है। एक-दूसरे को समय देना, साथी की भावनाओं को समझना जरूरी होता है। आज के कपल के सामने पैसा कमाने की समस्या प्रश्न बनकर खड़ी है और इसी प्रश्न को हल करने की होड़ में वह अपनी निजी जिंदगी भुलाते जा रहे हैं। शारीरिक संबंध बनाते समय भी कपल्स मानसिक रूप से व्यस्त ही होते हैं और इन नाजुक क्षणों का आनंद नहीं ले पाते हैं। एक ही घर, एक ही कमरे में रहने के बावजूद दो अलग-अलग जिंदगी जीने की शुरुआत यहीं से होती है, जो अजनबी रिश्तों को जन्म दे देती है और दोनों ही ऐसा करते हुए कितना आगे निकल गए, यह बात बहुत साल बाद नजर आती है, जब बचाने को कुछ बाकी ही नहीं रह जाता है।

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