Ye Jo Aaj Mein Likhne Jaa Rhi Hu
Ye Jo Aaj Mein Likhne Jaa Rhi Hu

Hindi Short Story: ये कहानी नहीं मेरे जीवन की सच्चाई है। एक प्रयास है अपने अहसास बताने का उसमें खो जाने का। आज से 18 साल पहले जब किसी के स्पर्श का अहसास ह्रदय से हुआ तब जब पहली बार मेरा हाथ अपने हाथ मे लेकर अपने नाम की अंगूठी पहनाकर मुझे अपना बना लिया।

उस स्पर्श से सिहर गई थी मैं लगा जैसे खाली बिजली के तार मे किसी ने करंट डाला है, जी उठी थी मैं एक नई उमंग के साथ ये एक जीवंत पहला अहसास था। ये अहसास एक बार फिर हुआ जब उनकी मजबूत हथालियो के बीच मेरी नाजुक हथालियो  को थमा दिया गया।  

परंतु हाय! रे मेरा भाग्य, जो दिन मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत दिन होना चाइये था उसी दिन ईश्वर ने मुझसे मेरी” माँ ” को मुझसे छिन लिया।

21 साल की उम्र मे मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि जीवन साथी मिलने से खुश हूं या जीवनदायिनी के जाने का दुःख मनाओ। लेकिन देखो तो मुझ निष्ठऊर् को अपने पिता भाई को अकेला छोड़कर मैं अपनी नई दुनिया सजाने चल दी।

समय पंख लगाकर उड़ चला जीवन में खुशिया आई प्यारे से बेटे ने जीवन मे आकर खुशिया बिखरा दी। पर माँ के ना होने की कमी हर कदम पर खटकती थी, लेकिन मेरी दूसरी माँ के रूप मे मेरी बड़ी बहन ने मुझे बहुत दुलार प्यार दिया लेकिन ईश्वर को शायद ये भी स्वीकार न था।

मेरी शादी की 15 वी सालगिरह पर ही ईश्वर ने मेरी दूसरी माँ मेरी बहन को भी मुझसे छीन लिया। क्या खेल है तेरा विधाता सब कुछ देकर भी मन खाली कर देते हो। अब मेरे पास मेरे पापा ही थे जिन्हें मैं कुछ भी ना कहूँ वो सब समझ जाते थे। जिन्हें देख कर मुझे हिम्मत मिलती थी। उनका इतना कहना, “बिटिया सब ठीक हो जायेगा “। सब कुछ लगता था, ठीक हो गया। ईश्वर ने मेरी जान मेरे अभिमान मेरी हिम्मत मेरे पापा को भी मुझसे तभी वापस ले लिया जब माँ और बहन को लिया था।    

ना जाने क्यो लगता है कि मुझसे ईश्वर को कोई बैर है क्या जो ये सब मेरे साथ ही हुआ। आज पापा, माँ, बहन को मुझसे दूर गए इतना समय हो गया पर भूल नही पाती उनको। कभी कभी ऐसा लगता है कि ईश्वर मुझे तोड़ना चाहते है और मैं जिद्दी फिर उठ खड़ी होतीं हूँ। जिंदगी की रेस मे भागने को। लेकिन कभी कभी मन करता है कि एक बार ईश्वर मिल जाये तो उनसे पूछूँ की हर बार वही दिन क्यो ??