Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: “क्या ज़रूरत थी इतनी दूर से तुम्हें आने की। ऑटो या कैब से आ ही जाती ना।” उसने कहा। उसे अपनी फ्रेन्ड्स के साथ मूवी के नाइट शो से लौटना था; बाकी की फ्रेन्ड्स को तो एक-दूसरे का साथ था पर इधर आने वाली, अकेली ही वह थी।

मैंने कहा-“हाँ, आ तो जाती। पर मेरा काम भी निपट गया था और मैंने सोचा तुमसे मिलना भी हो जाएगा। क्यूँ मुझे देखकर अच्छा नहीं लगा?”

“गज़ब के बुद्धु हो। तुम परेशान ना हो इसलिए मना किया था। कल ही सुबह तुम्हें बाहर भी जाना है।”

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद उसने फिर कहा-“वैसे मुझे मालूम है तुम क्यों आए। रात में अकेले मुझे जाना पड़ेगा, यह सोचकर ना?”

“हाँ, ये भी था।”

“ये भी नहीं, यही था। मैं क्या किसी जंगल में घूम रही हूँ जो मुझे शेर खा जाएगा? आ जाती आराम से, क्या दिक्क़त थी?” उसने सहजता से कहा।

“इंसानों की बस्ती में जंगली जानवरों का डर नहीं पर इंसान होकर भी इंसानों से तो डर है ही।”

मैंने उसकी ओर देखा, उसने हथेली को अपने माथे पर मारा और शरारत से कहा-“तुम भी तो इंसान हो,बल्कि जंगली इंसान हो; तुमसे भी तो डरना चाहिए ना मुझे?”

“हाँ बिल्कुल! मुझसे तो बहुत ही डरना चाहिए और मैं तुम्हें कच्चा चबा जाने वाला भी हूँ।”

कहते हुए मैंने कार सड़क के एक अंधेरे किनारे खड़ी की और उसके होठों को इतना ही काटा और चूसा कि निशान न पड़े; पर लिपिस्टिक का वजूद तो निपट ही जाए।