Romantic Story: रात रानी की खुश्बू माहौल में एक अलग ही रस घोल रही थी। ठंड का मौसम उस एहसास के आगे कुछ भी नहीं था जब रैना आंखें बंद किए छत पर खड़ी होकर आशीष की सोच की ‘गर्माहट’ ले रही थी। लाल साड़ी और पीले रंग का डीप नेक ब्लाउज़ रैना के गौरे रंग को और निखार रहा था। उसे पता नहीं था कि उसकी खूबसूरती पड़ोस की छत पर खड़े आशीष के सीने से गुजरते हुए उसके अंग-अंग को तड़पा रही थी।
पिछले 10 सालों से ये सिलसिला चल रहा था। बिना मिले, बिना एक-दूसरे से बात किए दोनों का बेइंतेहा प्यार छत पर जवां हो रहा था। बचपन का इश्क अब जवानी की दहलीज पर था। रैना ने आशीष को दिखाने के लिए पहली बार साड़ी पहनी थी। रात को 8 बजे छत पर आई। उसे पता था कि उसके आते ही 5 मिनट के भीतर आशीष उसे निहारने के लिए छत पर आ ही जाएगा। आशीष जैसे ही ऊपर आया, पहले तो चौंका कि आज इस समय रैना की जगह कौन खड़ा है लेकिन जब छत के कोने पर आकर देखा तो ‘उसकी’ रैना ही थी। बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें, लंबी घनी पलकें, नाजुक और तराशी हुई नाक, गुलाबी होंठ और हल्की सी मुस्कान से सजे, किसी अधूरे अफसाने को पूरा करने की बैचेनी बयां कर रहे थे। रैना ने नज़रें उठाई और आशीष के प्यार में डूबी आंखों से टकरा गई।
ऊफ! रैना के दिल की धड़कनें तेज हो गई, सांसें हल्की और गर्म हो गई। शरीर पर एक मीठी सी बैचेनी दौड़ गई, जैसे कोई अनदेखी बिजली छूकर गई हो।
आशीष से रहा न गया और हवा में एक चुंबन देकर प्यार का इजहार किया। इस चुंबन को रैना ने आंखें मूँद कर अपने होंठो पर लिया और एहसास किया आशीष बिलकुल उसके करीब है और अब कमर पर हाथ रखकर सीने से लगाएं चेहरे को निहार रहा है। उसके सांसों की खुश्बू से रैना पिघलने लगी और होंठों पर एक चुंबन का मुलायम एहसास आशीष को भी करा दिया।
“रैना! इन नाजुक होंठों को छूकर दिल की धड़कने तुमने बढ़ा दी हैं। ऐसा लग रहा है मानों आत्मा का आत्मा से मिलन हो।“
दोनों ही अपनी घर पर छत पर इन जवान दिलों के साथ प्रेम के इस रसीले घोल में घुले हुए थे। एक हवा का झोंका आया और रैना की साड़ी का पल्लू जैसे ही सरका, आशीष ने थाम लिया।
दोनों ही एक दूसरे के इस रोमांस से भरे पलों में एहसास को आगे बढ़ा रहे थे। पल्लू थामें आशीष ने एक चुंबन गले पर दिया और फिर पलट कर दूर खड़ा हो गया।
रैना दौड़कर पीछे से गले लग गई और आशीष के शर्ट की खुश्बू से उसके शरीर में हलचल होने लगी। जादू जैसे इस अनुभव में शरीर में गर्मी फैलने लगी, मानो एक अनकही आग जलने लगी। पलकों की झपकन में भी एक सुखद उत्तेजना का अहसास हुआ। रैना के अंगुली की सिरहन ऐसी लगी जैसे हर स्पर्श में दुनिया समाई हो।
आशीष पलटकर रैना को देखता है और सांसों का मेल बढ़ता है और दोनों की सांसें एक सी हो जाती है। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों के शरीर एक दूसरे में समाहित हो गए, हर एक इशारा, हर एक चुंबन, हर एक हल्का सा स्पर्श और भी ज्यादा आग में जलते हैं और संगीत की धुन दोनों के भीतर बजती है।
इतने में नीचे से आवाज आती है, ‘रैना छत पर क्या कर रही हो, चलो! जल्दी आओ, पापा बुला रहे हैं, खाना लगा दिया है।’
रैना के शरीर में एक तेज़ झटका लगता है और दिल की धड़कन पल भर में तेज हो जाती है। शरीर में एक सिहरन दौड़ जाती है, जैसे किचन में गिरा हुआ बर्तन अचानक से किसा को चौंका दें। रैना की आँखें चौड़ी हो जाती है और नज़रें घबराहट से इधर-उधर दौड़ने लगती है। खुद को छत पर अकेला देख और सामने की छत पर आशीष को अपने हाथों को सीने पर घुमाता देख, उसकी सांसे पल भर के लिए रूक सी जाती है, मानों समय थम सा गया हो। रैना की अंगुलियां अकड़ जाती है और होठों की हल्की सी ललचाहट गायब हो जाती है। पूरा शरीर तनाव में आ जाता है, जैले किसी तूफान से बचने के लिए इधर-उधर भागने का मन हो।
वह शरमाती है और जैसे ही वो रोमांटिक एहसास याद आता है, शरीर में एक मीठी सी गर्मी फैल जाती है। त्वचा पर एक सिरहन सी दौड़ जाती है जैसे हर स्पर्श की याद ताजा हो जाती है। हर अंग में सौम्यता और नमी का एहसास बढ़ जाता है। पूरा शरीर जैसे उस पल के साथ वापस लौटने की तड़प में फिर से जाग उठता है।
रैना, आशीष को इशारे से कहती है कि मां बुला रही है, उसे नीचे जाना पड़ेगा।
आशीष हल्की सी मुस्कान के साथ सिर को हां में हिला देता है और अचानक एक इशारे के साथ उसे अपने अपार प्रेम का एहसास करता है। वह छत के कोने से ज़रा सा दूर जाता है और घुटनों के बल बैठकर इशारों में ‘आई लव यू’ कहता है। यह इशारा करते हुए उस पल का एहसास जैसे आशीष के शरीर के हर हिस्से में गूंजने लगता है। जरा सी झुकी हुई नजरों से एक शरारत भरी मुस्कान उभर आती है। अंगुलियां हल्के से तितली की तरह कांपने लगती है और मन उस पल को पकड़ने के लिए और पास खिंचने का एहसास करता है।
रैना, आशीष के इस प्यार से एक अलग ही दुनिया का एहसास करती है, जहां उसे मीठी ताजगी का एहसास होता है। वो बालों को लहराते हुए और पल्लू को घुमाते हुए हंसते हुए पलटकर जाने लगती है और जाते-जाते हवा में चुंबन उड़ाते हुए आशीष के प्रेम का मीठा जवाब दे जाती है।
रात को सोते समय दोनों इस पल को एक बार फिर जीते हैं। इस आलिंगन का सुखद एहसास महसूस करते हुए नींद के आगोश में जाते हैं और सपनों की निराली दुनिया में दोनों का फिर आमना-सामना होता है। प्रेम की अनूठी नैया में बैठे हुए दोनों एहसास की नदी में गहराई के साथ उतरते हैं। इस अनोखे प्रेम को अब तक नाम न मिला लेकिन 10 सालों का पवित्र प्रेम जवानी को जीने के लिए हिलोरे मारना नहीं भूला।
