Dhanteras
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Dhanteras Story: हम आज धनतेरस के बारे में बात कर रहे हैं। धनतेरस दीपावली सहित पांच दिवसीय त्यौहार होता है जो धनतेरस से प्रारंभ होकर भाई दूज तक मनाया जाता है जो की कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से प्रारंभ होकर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि तक मनाया जाता है।

दीपावली की तैयारी बहुत दिन पहले ही शुरू हो जाती है जैसे घर की लिपाई पुताई करना घर को सजाना इत्यादि। दीपावली से तीन दिन पहले यानी कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन से ही दीपावली की शुरुआत हो जाती है। इस दिन सभी लोग अपने घरों में बंदरवाल तूमड़ी (कनडील) लगाकर लाइट लगाकर फूल आदि लगाकर सजावट करना शुरू कर देते हैं।

इस दिन संध्या काल को एक दीपक जलाया जाता है। इस दिन घर में झाड़ू को लाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धनतेरस हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण पर्व है, जो दीपावली (दीवाली) के पाँच दिनों के उत्सव की पहली कड़ी के रूप में मनाया जाता है। इसे “धनत्रयोदशी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है।

आइए इसके बारे में विस्तार से जानें

  1. धनतेरस का अर्थ

“धन” का अर्थ है – संपत्ति, समृद्धि और स्वास्थ्य।

“तेरस” का अर्थ है – चंद्र मास की त्रयोदशी तिथि।
इस दिन धन और आरोग्य की देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।

  1. धनतेरस की कथा

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता और भगवान विष्णु के अवतार) समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
इसलिए इस दिन धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।
कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से रोगों से मुक्ति और दीर्घायु प्राप्त होती है।

एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार —
एक राजा के पुत्र की शादी के चार दिन बाद उसकी मृत्यु का योग था। जब यह बात उसकी पत्नी को पता चली तो उसने दरवाज़े पर दीपक, सोने-चाँदी के गहने और ढेर सारा धन रख दिया। जब यमराज उसके प्राण लेने आए, तो उनकी आँखें उस प्रकाश और धन के तेज से चौंधिया गईं और वे लौट गए।
तभी से यह परंपरा चली कि इस दिन दीप जलाकर और धन का आदर कर, यमराज से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।


  1. धनतेरस पर क्या किया जाता है

इस दिन सोना, चाँदी, स्टील बर्तन, झाड़ू या नई वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है।

घर और दुकान की सफाई की जाती है ताकि लक्ष्मी माता का स्वागत किया जा सके।

शाम को दीपक जलाकर भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है।

लोग दीपदान करते हैं, विशेषकर मुख्य द्वार और तुलसी के पास दीप रखते हैं।


  1. धनतेरस का महत्व

यह आरोग्य, धन, और समृद्धि का प्रतीक दिन है।

इस दिन की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है।

इसे नए वित्तीय कार्यों की शुरुआत के लिए भी शुभ माना जाता है।