बात दीवाली की है। मैंने घर पर पूजा करने के लिए पंडित जी को बुलाया था। सारा सामान पूजा में रखा था। सभी जन पूजा में बैठे थे। मेरा पोता जो 5 साल का था मेरे पास बैठा था, वह यह सब देख रहा था। बार-बार यह पूछे जा रहा था, ‘यह सारा सामान कौन-लेगा? यह क्या हमें मिलेगा? लेकिन उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, मैं पूजा में ध्यान लगा रही थी, पूजा शुरू हुई। फिर पूजा होने के बाद पंडित जी बोले, ‘इंसान कुछ नहीं लेके जाता है, सब यहीं रह जाता है। सब खड़े हो गए, लेकिन मेरा पोता बैठा रहा। पंडित से बातें करता रहा। जब पंडित जी अपने थैले में सामान डालने लगे, तो पोता बोला, ‘अंकल जी, अभी तो आप कह रहे थे कि कोई कुछ नहीं लेजाता है, सब यहीं रहता है, पर आप यह सामान क्यों लेके जा रहे हैं। उसने सामान पर अपना हाथ रखकर कहा और सामान ले जाने को मना करता रहा। उसकी बातें सुनकर सब हंसने लगे।
पंडित जी को रोका
