Wrinkles on Fingers
Wrinkles on Fingers

Wrinkles on Fingers: आपने बहुत बार देखा होगा कि जब आप कभी ज्यादा देर तक पानी में काम करते हैं या स्विमिंग करते हैं तो आपके हाथ और पैरों की उंगलियों की त्वचा सिकुड़ जाती है। त्वचा मोटी और धारीदार बन जाती है। ये सलवटें ऐसी दिखती हैं जैसे कि स्किन बूढ़ी हो गई हो और उस पर झुर्रियां पड़ गई हों। ये सलवटें पानी से बाहर आने पर कुछ समय तक ही रहती हैं। पानी में लगभग 10 मिनट तक रहने पर ही ये सिलवटें नजर आने लगती है।

अब प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों होता है। यह कोई बीमारी है या कोई सामान्य प्रक्रिया? कभी इसके पीछे की वजह के बारे में सोचा है। अगर ऐसा कभी हो तो आपको लगने लगता है कि हाथ खराब हो जाएंगे तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। दरअसल, समय-समय पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इसके कारणों को जानने के लिए अध्ययन किए हैं जिसमें यही तथ्य उभर कर आएं हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसका हमारी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं होता। उंगलियों पर पड़े रिंकल्स कुछ ही देर में ठीक हो जाते हैं और उंगलियां नाॅर्मल हो जाती हैं। आइये इस लेख में कुछ अध्ययनों के बारे में आपको बताते हैं-

क्यों पड़ती हैं सिलवटें

पानी की वजह से त्वचा सिकुड़ने की प्रक्रिया को एक्वाटिक रिंकल्स कहा जाता है। जैसे इंसान की बॉडी में हर पार्ट की अलग खासियत होती है ठीक उसी तरह से हर पार्ट की स्किन भी अलग होती है। जहां चहेरे की स्किन काफी पतली होती है, वहीं हाथ और पैर की स्किन बाकी के हिस्सों के मुकाबले मोटी होती है। हमारी त्वचा की सबसे बाहरी परत स्ट्रेटम कॉर्नियम है जो डेड सेल्स और कैरोटीन नामक प्रोटीन से मिलकर बनती है। ये आपस में मिलकर हमारे शरीर की बाहरी प्रोटेक्टिव लेयर बनाते हैं। क्योंकि हम हाथ-पैरों से ज्यादा काम लेते हैं जिसकी वजह से ये सेल्स वहां ज्यादा होते हैं और वहां की स्किन ज्यादा मोटी होती है। पहले वैज्ञानिक मानते थे कि जब हम पानी में ज्यादा देर तक रहते हैं तो हाथ-पैर के सेल्स पानी को ज्यादा अवशोषित कर लेते थे। लेकिन त्वचा के नीचे के ऊतक पानी को अवशोषित नहीं कर पाते थे, इसलिए त्वचा फूल जाती है और उसमें रिंकल्स पड़ जाते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारी त्वचा की सबसे ऊपरी परत पर सीबम नामक एक तेल होता है। यह तेल हमारी त्वचा को सुरक्षा देने के साथ ही नमी और चिकनाई भी प्रदान कराता है। साधारण भाषा में कहें तो सीबम तेल त्वचा पर रेनकोट की तरह काम करता है। इस तेल की वजह से ही जब हम सूखे हाथों को धोते हैं, तो पानी आसानी से फिसल जाता है। पानी में ज्यादा देर तक रहने से हमारी त्वचा पर मौजूद सीबम तेल धुल जाता है। इस वजह से पानी हमारी त्वचा के भीतर प्रवेश करने लगता है और त्वचा सिकुड़ने लगती है। लेकिन जैसे ही हमारी त्वचा की ऊपरी परत में घुसा पानी वाष्पीकृत हो जाता है, वैसे ही हमारे हाथ-पैर की त्वचा पहले की तरह सामान्य हो जाती है।

कुछ वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को मेडिकल टर्म में ऑस्मोसिस बायोकेमिकल रिएक्शन मानते हैं। पानी में ज्यादा समय तक रहने पर हमारी त्वचा के कुछ हिस्से बाहर निकल जाते हैं। जिसके कारण उस जगह पर गीलापन और सिकुड़न आ जाती है, मानो झुर्रियां पड़ गई हों। कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि यह एक न्यूरल प्रोसेस है जो हमारे शरीर की सांस, दिल की धड़कन और पसीने को भी नियंत्रित करता है। जब हमारे हाथ या पैर बहुत देर तक पानी में रहता है, तो त्वचा की ऊपरी परत के ठीक नीचे की खून की नसें सिकुड़ जाती हैं। इससे खून का प्रवाह हाथ के उस हिस्से में नहीं हो पाता, जिससे उंगलियां पर रिंकल्स से दिखने लगते हैं। हाथ-पैरों में पड़े ये रिंकल्स इनकी पकड़ को कमजोर नहीं होने देती बल्कि ये रिंकल्स पानी में फिसलने से बचाते हैं।

क्या कहती है रिसर्च

Wrinkles on Fingers

1935 में वैज्ञानिकों ने एक लड़के के हाथों पर यह रिसर्च की। उसकी 3 उंगलियों की नर्व ठीक तरह काम नहीं कर रही थी जिसकी वजह से उन उंगलियों में कोई सेंसेशन नहीं थी। पानी में रहने के बावजूद उसकी उन तीन उंगलियां में झुर्रियां नहीं पड़ीं। जबकि दूसरी उंगलियों पर झुर्रियां पड़ीं। रिसर्च से साबित हुआ कि पानी में रहने के बाद उंगलियों में झुर्रियां पडने का कनेक्शन नर्व और रक्त धमनियों से होता है। उंगलियों की त्वचा के नीचे मौजूद रक्त धमनियों के कसने से होता है। जब नीचे की रक्त धमनियां कसती हैं तो ऊपर की त्वचा ढीली होकर सिकुड़ जाती हैं। जब हमारे शरीर के किसी अंग का नर्व डैमेज होता है, तो हमें उस भाग पर सेसेंशन नहीं होती है। यह पता चला कि रिंकल्स ब्रेन को मिले सिगनल के द्वारा नर्व-सिस्टम के रिस्पांस की वजह से होती हैं। जब हम पानी में हाथ डुबोते हैं, तो हाथ के छोटे-छोटे छिद्रों में पानी भर जाता है। जिससे हमारा तंत्रिका तंत्र ब्रेन को सिगनल भेजता है और हमारा दिमाग उस अंग पर रक्त संचार को कम कर देता है। जिससे वहां की रक्त धनियां सिकुड़ जाती हैं और रिंकल्स पड़ जाते हैं।

‘बायोलॉजी लेटर्स’ जर्नल में प्रकाशित ब्रिटेन की न्यूकेंसल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की रिसर्च इस बारे में प्रकाश डालती है। इस रिसर्च के मुताबिक देर तक पानी में रहने पर हमारी त्वचा में झुर्रियां पड़ने की वजह हमारे शरीर की एक व्यवस्था है जिससे हमारे काम आसान हो सके। रिसर्च के मुताबिक काफी देर तक पानी में रहने पर त्वचा में झुर्रियां पड़ने की वजह के पीछे हमारे शरीर का एक सिस्टम बताया गया है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने छात्रों की एक टीम को पानी में भीगे संगमरमर के टुकड़े दिये। छात्रों ने जब उन टुकड़ों को उठाने की कोशिश की तो उन्हें बड़ी मुश्किल हुई, टुकड़े बार-बार फिसलते रहे। लेकिन बाद में जब इन छात्रों के हाथ आधे घंटे तक पानी में भिगो दिये गए और अंगुलियों में सिलवट आ गई तब गीले संगमरमर के टुकड़े आसानी से उनकी पकड़ में आने लगे।

सिलवटें पकड़ को करती है मजबूत

वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी त्वचा के भीतर एक स्वतंत्र तंत्रिका तंत्र काम करता है जो देर तक त्वचा के पानी के संपर्क में रहने पर नसों को सिकोड़ देता है जिससे त्वचा पर सिलवटें पड़ जाती हैं। यही स्वतंत्र तंत्रिका तंत्र ही सांस, धड़कन और पसीने को भी नियंत्रित करता है। ऐसा ही पैरों में भी होता है। भीगे पैरों के तलवे भी लहरदार से हो जाते हैं। यह जिंदा रहने के लिए हमारे शरीर का जबरदस्त इंतजाम है। गीले हाथों में पड़ी सिलवटें हाथ के गीले होने के बावजूद हाथों की पकड़ को कमजोर नहीं होने देतीं और पैर इन्हीं सिलवटों की मदद से भीगे होने पर भी फिसलन से बचे रह पाते हैं।

इस रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर टॉम श्मलडर्स के अनुसार, हमारा शरीर ऐसी प्रतिक्रिया इसलिए देता है क्योंकि पानी में आते हमारे हाथ बहुत चिकने हो जाते हैं। हम किसी भी चीज को आसानी से पकड़ नहीं पाते हैं। यहां तक कि कई बार फिसल जाते हैं। हाथों पर पड़ने वाली इन झुर्रियों से हमारी ग्रिपिंग यानि पकड़ मजबूत बनती है और हम गीली परिस्थितियों में फिसलन से बच पाते हैं। यह कार के टायरों में बनी ग्रिप की तरह काम करती हैं, ताकि सड़क से ज्यादा से ज्यादा संपर्क रहे। डॉक्टर श्मलडर्स इसे हमारे क्रमिक विकास से जुड़ा बताते हैं उनके मुताबिक बहुत ही पुराने समय में जाएं तो हाथों की अंगुलियों की इन्हीं झुर्रियों ने शायद पानी और गीले इलाकों में खाना खोजने में हमारी मदद की थी और पानी के कारण पैरों पर बनी झुर्रियों की वजह से ही शायद हमारे पुरखे बारिश में भी आसानी से चल फिर सके।