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बच्चों में सेरेब्रल पाल्से के लक्षण: World Cerebral Palsy Day 2022
World Cerebral Palsy Day 2022

World Cerebral Palsy Day 2022: सेरेब्रल पाल्से न्यूरोलाॅजिकल जीरो-डेवलेपमेंट डिसऑर्डर है यानी गर्भावस्था में या जन्म के समय ब्रेन को किसी भी तरह की क्षति पहुंचने पर बच्चे के शारीरिक विकास में विकार आ जाते हैं। इससे बच्चे के ब्रेन में जरूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिससे ब्रेन का कुछ भाग डैमेज हो जाता है। क्षतिग्रस्त ब्रेन शरीर के विभिन्न अंगों को ऑक्सीजन सप्लाई करने में नाकामयाब रहता है और मसल्स में यह विकार आ जाता है। बच्चे के शरीर में मसल्स का विकास इतना धीमा होता है कि वो विकास के नियत मानदंडों या माइलस्टोन्स तक नहीं पहुंच पाता।

हालांकि इन विकारों में ज्यादा बदलाव नहीं आता और जिंदगी भर चलते हैं, लेकिन कभी-कभी ये इतने गंभीर रूप ले लेते हैं कि इनका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। बड़े होने पर भी ये विकार बने रहते हैं जिन्हें ठीक करने के लिए सर्जरी तक करनी पड़ती है। आंकड़ों के हिसाब से दुनिया भर में जन्म लेने वाले 500 बच्चों में 1 बच्चा सेरेब्रल पाल्से डिजीज का शिकार होता है। हमारे देश में करीब 33,000 लागों में यह डिसऑर्डर देखने को मिलता है।

World Cerebral Palsy Day 2022
Cerebral Palsy Day 2022

देखा जाए तो सेरेब्रल पाल्से डिजीज को बच्चे की मूवमेंट्स के आधार पर इन कैटेगरी में बांटा जा सकता हैै-

  • स्पास्टिक सेरेब्रल पाल्से- ब्रेन के क्षतिग्रस्त हो जाने से वह मसल्स तक अपना मैसेज ठीक तरह पहुंचा नहीं पाता। इससे मसल्स टाइट और सख्त हो जाती हैं और बच्चा ठीक से मूवमेंट्स नहीं कर पाता। करीब 77-93 प्रतिशत लोग स्पास्टिक सेरेब्रल पाल्से से पीड़ित हैं।
  • हाइपोटोनिक सेरेब्रल पाल्से- कुछ मामलों में बच्चे की मसल्स काफी ढीली या लोचदार होती हैं जिससे बच्चा अपने अंगों पर नियंत्रण नहीं रख पाता और उसकी मूवमेंट्स चंचल और अस्थिर रहती है।

क्या है लक्षण?

यह डिजीज मुख्य रूप से मस्कुलर डिसऑर्डर डिजीज है और इसमें सबसे ज्यादा असर बच्चे के मसल्स पर पड़ता है। लेकिन कुछ बच्चों का ब्रेन भी ठीक तरह विकसित नहीं हो पाता और वे मानसिक विकलांगता का शिकार हो जाते है या मंदबुद्धि होते हैं। ऐसे बच्चों को बोलने-सुनने संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं या उनका विजन कमजोर हो सकता है। यानी कि ऐसे बच्चे बोलना भी देर से शुरू करते हैं, सुनने में परेशानी होने की वजह से आपकी बात ठीक से सुन नहीं पाते या फिर किसी चीज पर नजर नहीं टिका पाते।

World Cerebral Palsy Day 2022
This disease is mainly a muscular disorder disease

सेरेब्रल पाल्से डिजीज के बच्चे दूसरे बच्चों से थोड़ा अलग होते हैं और थोड़ा ध्यान देने पर उनकी मस्कुलर एक्टिविटीज और पाॅश्चर्स के माध्यम से आसानी से पहचाना जा सकता है। दूसरे बच्चों के बजाय ये 5-6 महीने तक अपनी गर्दन नहीं संभाल पाते, 10-11 महीने तक खड़ा होना तो दूर बैठ भी नही पाते या आलती-पालती मार कर नहीं बैठ पाते। टांगों में अकड़ाहट होती है, टांगे एक-दूसरे को क्राॅस करती हैं, खड़े होने पर पंजे के बल चल रहा हो। लेटते वक्त बच्चे का पाॅश्चर ठीक नहीं होता, कंधा नीचे की तरफ है, हाथ-पैर तेड़े हैं, हाथों में अकड़ाहट के कारण मुट्ठियां बंधी होती हैं, हाथ खुल नहीं पा रहे हैं।

क्या है कारण?

बच्चों में यह न्यूरोजिकल डेवलेपमेंट डिसऑर्डर बच्चे को कभी भी हो सकता है चाहे वो गर्भावस्था के दौरान मां से हुआ हो या फिर जन्म के समय या जन्म के बाद लापरवाही बरतने से। अगर गर्भवती महिला को टार्च इंफेक्शन या रूबैला हो, हाई ब्लड प्रेशर हो, हार्ट प्राॅब्लम हो, दौरे (फिट्स) पड़ते हैं, खसरा जैसी संक्रामक बीमारी है या फिर गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो जाए। ऐसी स्थिति में गर्भवती मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी खतरा रहता है। बच्चे के ब्रेन में ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती और वह डेमैज हो जाता हैै। रिसर्च से साबित हो चुका है कि सेरेब्रल पाल्से डिजीज के 14 में से 13 मामलों की वजह गर्भावस्था के दौरान यूटरस में या जन्म के 1 महीने के होने से पहले अगर बच्चे के ब्रेन को किसी तरह का आघात पहुंचना है।

World Cerebral Palsy Day 2022
This neurological development disorder in children can happen to the child at any time

बच्चों में सेरेब्रल पाल्से डिजीज होने का मुख्य कारण एस्फिजिया का होना है। यानी जब बच्चा जन्म के 5 मिनट बाद तक रो नहीं पाता, तो उनके ब्रन तक ऑक्सीजन सप्लाई देर से होती है। उनमें ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और ब्रेन डैमेज हो जाता है। जिससे बाद में सेलेब्रल पाल्से की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं, उनके मसल्स में ये विकार आ जाता है। ऐसा माना जाता है कि बच्चे का पैदा होते ही रोना बहुत जरूरी है। जबकि इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि पैदा होने के तुरंत बाद रोने से बच्चे के लंग्स काम करना शुरू कर देते हैं और ऑक्सीजन ब्रेन तक पहुंचती है।      

इनके अलावा प्री-मैच्योर बच्चों में भी यह डिजीज आसानी से देखी जा सकती है। जन्म के समय जिन बच्चों का वजन बहुत कम केवल 1-11/2 किलो होता है, आसानी से सेरेब्रल पाल्से का शिकार हो सकते हैं। आंकड़ों से साबित हो चुका है कि भारत में पैदा होने वाले सेरेब्रल पाल्से कुल बच्चों के लगभग 43 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं। जन्म के बाद जो बच्चे गंभीर रूप् से पीलिया डिजीज की गिरफ्त में आ जाते हैं जिसका लेवल 25मिग्रा/डेसीमीटर से ज्यादा हो-उनहेे सेरेब्रल पाल्से होने का खतरा रहता है। भारत में पैदा होने वाले करीब 1.7 प्रतिशत जुड़वा बच्चे भी इसके शिकार होते हैं।

क्या है उपचार? 

इसके लिए सबसे जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चे की मोटर डेवलेपमेंट पर नजर रखें। अगर उन्हें लगता है कि उनका बच्चा दूसरे बच्चों की तरह समुचित मोटर डेवलेपमेंट माइलस्टोन्स हासिल नहीं कर पा रहा है या उसमें उन्हें कहीं भी किसी भी तरह की कमी या देरी महसूस होती है, तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। जबकि होता यह है कि बच्चा अगर 3 महीने तक अपनी गर्दन नहीं संभाल पा रहा है, 6 महीने तक बैठना या क्राॅल नहीं कर पा रहा है, 9-10 महीने का होने पर भी खड़ा नहीं हो पा रहा है या फिर 12-18 महीने का होने पर भी चल नहीं पा रहा है- तो पेरेंट्स अकसर यह सोच कर रह जाते हैं कि कोई बात नहीं कुछ दिन बाद बैठ जाएगा। बच्चे की मोटर डेवलेपमेंट को लेकर यह सोच रखना सरासर गलत है क्योंकि देर होने पर सर्जरी कराने की नौबत भी आ सकती है। 

World Cerebral Palsy Day 2022
It is most important that parents keep an eye on the child’s motor development

जरूरी है उन्हें बच्चे को 1 साल के अंदर ही बाल रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर खासतौर पर डेवलपमेंटल विशेषज्ञ के पास लेकर जाना चाहिए। डाॅक्टर बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री, मूवमेंट्स और मसल्स का समुचित चैकअप करते है। जरूरत पड़ने पर एमआरआई और सीटी स्कैन भी किया जाता है। बच्चे की टाइट मसल्स लूज करने के लिए बैकलोफेन जैसी मेडिसिन देते हैं। साथ ही बच्चे को फिजियोथेरेपी कराई जाती है जिसमें कई तरह की एक्सरसाइज के जरिये मसल्स की मूवमेंट्स कराई जाती है।

सेरेब्रल पाल्से डिजीज के बच्चे के उपचार के लिए पेरेंट्स की स्पेशल केयर भी बहुत जरूरी है। उन्हें धीरज रखना जरूरी है और बच्चे में जल्दी इंप्रूवमेंट के लिए घर के सभी लोग पाॅजीटिव रवैया अपनाएं और बच्चे का पूरा ध्यान रखें। इसके साथ ही पेरेंट्स को उनकी डाइट का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्हें रिच हीलिंग डाइट देनी चाहिए जिसमें प्रोटीन, विटामिन्स भरपूर मात्रा में हों।    

(जेपी अस्पताल, नोएडा की वरिष्ट बाल रेाग विशेषज्ञ डाॅ प्रियंका जैन से की गई बातचीत के आधार पर)

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