एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोविड से बच पाने का एक ही संभव इलाज है और वह है टीकाकरण करवाना। आपको अपनी बारी आने पर अपना टीकाकरण अवश्य करवाना चाहिए। बहुत से लोगों को वैक्सिन के प्रभावी होने पर संदेह है लेकिन फिर भी अभी के लिए हमारे देश में कोविड स्थिति से निपटने का बस यही एक हथियार है इसलिए आपको वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। इसके साथ ही जैसे जैसे कोविड के नए वेरिएंट देखने को मिल रहे हैं, वह अपने आप में ही एक चिंता का विषय है। भारत में पिछले साल अक्टूबर में पाया गया डेल्टा वेरिएंट सबसे अधिक संक्रामक माना जा रहा है।

एम्स में हुई एक स्टडी यह क्लेम करती है कि यह वेरिएंट एंटी बॉडीज से बच निकलने में भी सफल हो जाता है। अगर आपने को वैक्सीन या कोविशील्ड लगवाई है तो भी आपको इस वेरिएंट से संक्रमण होने का खतरा है।

डेल्टा वेरिएंट क्या है

  1. यह कोरोना वायरस का एक रूप है जो इसके दो म्यूटेंट से मिल कर तीसरा बना हुआ है और यह उन सबसे अधिक स्नक्रांक है। इसे B.1.617 कहते हैं और यह E 484Q और L 452R से मिल कर बना है।
  2. स्टडीज के अनुसार इस म्यूटेंट का पहला केस अक्टूबर 2020 में महाराष्ट्र में मिला था। तब से ही दिसंबर से E 484Q और L 452R के केसों में एक उछाल देखने को मिल रहा है

क्या यह अन्य स्ट्रेंस से और अधिक खतरनाक है चूंकि यह स्ट्रेन दो अन्य म्यूटेंट्स द्वारा मिल कर बना है इसलिए इसके लिए मानव के शरीर में जा कर इम्यूनिटी को कमजोर करना और भी अधिक आसान बन जाता है। स्टडीज के मुताबिक यह वायरस और भी अधिक खतरनाक और ज्यादा तेजी से फैलने वाला है। यह स्ट्रेन यूके में पाए गए अल्फा वेरिएंट से भी अधिक संक्रामक है।

कोविड वैक्सिन इस स्ट्रेन के प्रति कितनी अधिक प्रभावी हैंवैसे तो इस बात का कोई प्रूफ नही है कि वैक्सीन इस स्ट्रेन के लिए प्रभावी नहीं है लेकिन एम्स दिल्ली, और एनसीडीसी की स्टडीज के मुताबिक यह स्ट्रेन उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है जिन्होंने को वैक्सिन या कोविशील्ड के दोनों डोज ले लिए हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि इस बात के भी चांस हैं कि यह वैक्सीन स्ट्रेन के आगे ज्यादा प्रभावी नहीं हैं। लेकिन अभी तक इन स्टडीज का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

स्टडी  एम्स के एक्सपर्ट्स ने 63 ऐसे लोगों पर यह स्टडी की जो कोविड पॉजिटिज थे और जिन्हें बुखार जैसे लक्षण महसूस हो रहे थे। इनमें से अधिकतर लोगों ने वैक्सीन लगवाई हुई थी। 36 मरीजों ने दोनो डोज लेली थी और 27 मरीजों ने केवल एक ही डोज ली थी। यह पता चला कि संक्रमित लोगों में से 60% वह लोग थे जिन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज लेली थी और 27 मरीजों में संक्रमण दर 70% से अधिक थी जिन्होंने कोविशील्ड लगवाई थी।

आपको अपना टीकाकरण क्यों करवाना चाहिएअगर आप ऊपर लिखित स्टडी पढ़ कर यह सोचते हैं कि वैक्सीन प्रभावी नहीं है तो उसे लगवाने का क्या फायदा तो आप गलत हैं क्योंकि आपको हर केस में वैक्सीन लगवानी चाहिए चाहे वह किसी स्ट्रेन के आगे प्रभावी हो या अप्रभावी। वैक्सीन लगवाने के साथ साथ आपको हर संभव सुरक्षा कदम भी उठाना चाहिए ताकि आप इस जानलेवा वायरस से बच सकें और देश की भी इस संकट से निकलने में मदद कर सके।