‘‘पिछली बार डॉक्टर ने बताया कि मेरे मूत्र में शुगर पाई गई है लेकिन चिंता वाली कोई बात नहीं है। क्या यह मधुमेह का लक्षण नहीं है?”

डॉक्टर की सलाह मानें‒चिंता न करें। आपका शरीर वही कर रहा है, जो इसे करना चाहिए। वह इस बात का पक्का इंतजाम कर रहा है कि आपके भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज़ (शुगर) मिले। इंसुलिन हार्मोन आपके शरीर में ग्लूकोज़ के स्तर को नियन्त्रित रखता है और इस बात का ध्यान रखता है कि शरीर की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिले। गर्भावस्था में आपका शरीर कोशिश करता है कि रक्तप्रवाह में पर्याप्त मात्रा में शुगर हो ताकि आपके भ्रूण का पोषण हो सके लेकिन यह हमेशा सही तरीके से काम नहीं करता। कई बार एंटी-इंसुलिन प्रभाव इतना ज्यादा होता है कि माँ व बच्चे की जरूरत से ज्यादा शुगर रक्त प्रवाह में घुल जाती है और किडनी भी इसे संभाल नहीं पाती। यही अतिरिक्त मात्रा मूत्र (यूरीन) में आ जाती है। दूसरी तिमाही में इसे एक आम बात कहा जा सकता है। आमतौर पर 50 प्रतिशत महिलाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

अधिकतर महिलाओं में, ब्लड शुगर बढ़ने पर, शरीर इंसुलिन की मात्रा बढ़ाकर प्रतिक्रिया देता है। आप जब अगली बार जांच के लिए जाएंगी तो सबकुछ सामान्य होगा लेकिन कुछ महिलाएँ, जो मधुमेह से ग्रस्त थे, मधुमेह से ग्रस्त होने के लक्षण रखती हों, अधिक मात्रा में शरीर में इंसुलिन न बनता हो, उनके मूत्र व रक्त में शुगर की अधिक मात्रा आती रहती है। जो महिलाएँ पहले से मधुमेह से ग्रस्त नहीं थीं, उनके लिए यह ‘गैस्टेशनल डायबिटीज़’कहलाती है।आपको भी हर गर्भवती महिला की तरह 26 वें सप्ताह में ग्लूकोज़ स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना होगा ताकि गैस्टेशनल डायबिटीज की जांच हो सके। तब तक मूत्र में आने वाली शर्करा(शुगर) पर इतना ध्यान न दें।

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