‘‘मुझे डर है कि मेरी पानी की थैली अपने–आप नहीं फटेगी। डॉक्टर को उसे फोड़ना पड़ेगा। क्या इससे मुझे दर्द होगा?”
नहीं, कई बार तो उसे कृत्रिम रूप से फोड़ने पर कई महिलाओं को पता तक नहीं चलता। वे प्रसव-पीड़ा में इतनी गुप होती हैं कि इस छोटी-सी बात पर उनका ध्यान तक नहीं जाता। बस आपको एकदम पानी बहने का एहसास होगा। कई बार शिशु की भीतरी जांच के लिए भी कृत्रिम रूप से झिल्ली भंग करनी पड़ती है।
वैसे अध्ययनों से पता चला है कि इससे प्रसव काल छोटा नहीं होता लेकिन कई डॉक्टर आज भी प्रसव को गति देने के लिए ऐसा कहते हैं। यदि कोई वाजिब कारण न हो तो डॉक्टर उसे कुदरतन अपना काम करने का मौका दे सकते हैं।
कई बार शिशु इस थैली के साथ बाहर आता है। इसे जन्म के बाद ही फोड़ा जाता है। यह भी ठीक रहता है।
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