अगर गर्भवती महिला शराब या बीयर का सेवन करती है तो उसको  कई तरह की गंभीर परेशानियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे हालात में जन्म लेने वाले शिशुओं का आकार पूरा नहीं होता, मानसिक विक्षिप्तता पाई जाती है। इसलिए गर्भावस्था में शराब पीना,जितना जल्दी बंद करेगी, खतरा उतना ही घटेगा। 

‘‘मुझे पता नहीं था कि मैं गर्भवती हूं। मैंने अनजाने में दो बार शराब पी ली। क्या इससे शिशु को कोई नुकसान हो सकता है?”
दरअसल आमतौर पर, माँ को शुरूआत में पता ही नहीं चल पाता कि वह गर्भ से है। इस दौरान वे एक-दो ऐसे काम कर लेती हैं, जो इस बारे में पता होने पर शायद न करतीं। तभी हम यहां इन मुद्दों को उठा रहे हैं। इस बात का कोई सबूत नहीं मिलता कि गर्भ के शुरूआती समय में थोड़ी-बहुत शराब पीने से भ्रूण को नुकसान हो सकता है इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है। यह सच है कि अब आपको पीने की आदत छोड़नी होगी।

वैसे आपने उन महिलाओं के बारे में भी सुना होगा, जो पूरे नौ महीने, रात को सोते समय, एक गिलास हल्की वाइन लेने के बावजूद, स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आप भी सेफ मान सकती हैं बल्कि अमरीकन अकादमी के बाल चिकित्सकों की सलाह है कि गर्भवती माता के लिए अल्कोहल का सेवन नुकसानदायक होता है। इस सिफारिश के बावजूद आप उस शराब के बारे में सोचकर परेशान न हों, जो आपने अनजाने में पी है।आप चाहें तो अपनी डॉक्टर से पूछ कर भी निश्चिंत हो सकती हैं।

जब भी नन्हा मेहमान आने वाला हो तो स्वयं ही संभल कर रहने में क्या बुराई है?हालांकि इसकी सुरक्षित मात्रा के बारे में कोई नहीं जानता लेकिन गर्भावस्था में अल्कोहल के सेवन की बात आती है तो हर महिला के हिसाब से इसकी मात्रा लेने से यह शिशु के रक्त में भी मिल सकती है। एक गर्भवती महिला कभी अकेले शराब नहीं पीती। वह हरवाइन, बीयर या कॉकटेल का गिलास अपने बच्चे के साथ पीती है। ऐसे में कौन सी संभावना हो सकती है, यह आप खुद ही अंदाजा लगा लें।

अगर गर्भवती महिला हर रोज शराब या बीयर पांच-छह पैग ले, तो कई तरह की गंभीर परेशानियां पैदा हो सकती हैं। कहते हैं कि यह हैंगओवर सारी जिंदगी बना रहता है। ऐसे हालात में जन्म लेने वाले शिशुओं का आकार पूरा नहीं होता, मानसिक विक्षिप्तता पाई जाती है। सिर, मुंह हृदय, हाथ-पैर व केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में भी खराबी हो सकती है। वे अल्पायु होते हैं। जो बच्चे बच भी जाते हैं उनके साथ कोई न कोई समस्या हमेशा बनी रहती है। वे सही तरह से फैसले नहीं ले पाते। वे खुद भी 21 साल की उम्र तक आते-आते शराब की चपेट में आ जाते हैं। गर्भावस्था में शराब पीना,जितना जल्दी रोकेंगे; खतरा उतना ही घटेगा। आपकी पीने की खुराक जितनी ज्यादा होगी, खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा।

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पीने की बुरी लत की वजह से गर्भपात हो सकता है,प्रसव के समय कठिनाई आ सकती है, जन्म के समय शिशु का वजन कम हो सकता है,अस्वाभाविक वृद्धि हो सकती है। बच्चा मंदबुद्धि पैदा हो सकता है। इसी वजह से कई विकासात्मक और व्यवहारगत लक्षण भी सामने आ सकते हैं।कुछ महिलाओं के लिए गर्भावस्था में शराब छोड़ना आसान भी हो सकता है क्योंकि उन्हें इसकी गंध से नफरत होने लगती है; यह गर्भ के शुरूआती समय से लेकर अंत तक हो सकती है। जो महिलाएं इसके बिना रह नहीं पातीं या डिनर में रेड वाइन लेती हैं, उन्हें अपनी जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाना होगा।

अगर आप आराम करने के लिए पीती हैं, तो कोई और तरीका खोजें-संगीत सुनें, गर्म पानी से नहाएं, मालिश या व्यायाम करें या कुछ पढ़ें।अगर आप पिए बिना नहीं रह सकतीं या छोड़ना ही नहीं चाहतीं तो ब्रंच में ब्लडी मैरी की बजाए वर्जिन मैरी लें, डिनर में जूस या नॉन-अल्कोहल बीयर लें। जूस में पानी मिलाकर उसी तरह लें, जैसे आप वाइन लेती हैं, गिलास और माहौल भी वही हो। अगर पतिदेव साथ देंगे तो मजा दुगुना हो जाएगा। अगर अल्कोहल छोड़ने में परेशानी हो रही हो तो अपने डॉक्टर की राय लें। वे किसी कार्यक्रम की मदद से, परेशानी दूर कर सकते हैं।

पाइप व सिगार से बचें
पाइप व सिगार पीना छोड़ेंगी तो शिशु भी आपको धन्यवाद कहेगा। पाइप व सिगार से,सिगरेट से भी ज्यादा धुआं भीतर जाता है और शिशु के लिए खतरा पैदा हो जाता है। यदि आप अपने आने वाले मेहमान की खबर सब को सुनाना चाहती हैं तो चॉकलेट से बने सिगार व पाइप पीकर दे सकती हैं।
 

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अगर कोई समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लें

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