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रक्तस्त्राव

माँ बन ने की यात्रा बेहद ही सुंदर और अविश्वसनीय होती है |  गर्भ ठहरना शरीर की लंबी क्रिया प्रतिक्रिया का परिणाम है। और इसकी शुरुआत होती शरीरिक संबन्ध के बाद ओवुलेशन की स्थिति तक।

ओवुलेशन

ओवुलेशन महीने का वो समय होता है (12 से 24 घंटे) जब अंडे वीर्य या स्पर्म के साथ मिलने को तैयार होता है।इसमें अंडे अन्डकोशों से ऋतुचक्र के समय निकलते हैं। हर महीने एक महिला के अंडकोष से 15 से 20 अंडे निकलते हैं। ये अंडे फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय तक पहुँचते हैं।  

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण

अधिकांश माताओं के लिए, मासिक माहवारी ना आना Missed periods ही गर्भावस्था का एक प्रारंभिक संकेत है |लेकिन क्या आपको पता है कि शुरुआती चरण में रक्तस्त्राव से भी गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों को जाना जा सकता है | शुरुआती चरण में रक्तस्त्राव के अनेक संभावित कारण होते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है कि ये सभी कारण किसी समस्या का संकेत ही हों।

प्रत्यारोपण के बाद का रक्तस्त्राव (implantation bleeding):गर्भावस्था के शुरुआती चरण में जब निषेचित अंडा आपके गर्भ में प्रत्यारोपित होता है, तो इस तरह का रक्तस्त्राव हो सकता है।

सामान्य मासिक से प्रत्यारोपण रक्तस्राव को अलग करना संभव है? इम्प्लांट रक्तस्राव की मुख्य विशेषताएं यहां दी गई हैं:

  • मोटा स्राव होना;
  • खून बह रहा प्रचुर मात्रा में नहीं है;
  • रक्त तरल और गुलाबी है;
  • खून की धारियों के साथ गुलाबी स्राव संभव है;
  • एक दिन या कुछ ही घंटों तक रहता है।
  • ब्रेकथ्रू ब्लीडिंग(break through bleeding): इस तरह का रक्तस्त्राव तब होता है, जब गर्भावस्था के हार्मोन आपके सामान्य माहवारी चक्र को दबाने लगते हैं। मगर वे पूरी तरह ऐसा नहीं कर पाते और कुछ समय के लिए आपकी माहवारी जारी रहती है। आपकी सामान्य माहवारी आने के समय पर यह रक्तस्त्राव एक से ज्यादा बार भी हो सकता है।
  • सर्वाइकल इरोजन(cervical erosion): कभी-कभी ग्रीवा मुलायम होने लगती है, इस स्थिति को सर्वाइकल इरोजन भी कहते हैं। इसकी वजह से गर्भावस्था के शुरुआती दौर में रक्तस्त्राव हो सकता है।
  • योनि या ग्रीवा में संक्रमण: रक्तस्त्राव को योनि या ग्रीवा में संक्रमण (जैसे कि यीस्ट संक्रमण या बैक्टीरियल वेजिनोसिस(bacterial vaginosis) या फिर (poulips)पॉलिप (गर्भाशय में हल्की बढ़ी हुई कोशिकाओं का गुच्छा) से भी जोड़कर देखा जा सकता है और यह रक्तस्त्राव सहवास (सेक्स) के बाद भी हो सकता है।
  • कभी-कभार रक्तस्त्राव किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, जैसे कि गर्भपात
  • अस्थानिक गर्भावस्था (एक्टोपिक प्रेग्नेंसी ectopic pregnancy), जिसमें भ्रूण गर्भ की बजाय फेलोपियन ट्यूब में प्रत्यारोपित हो जाता है।
  • मोलर गर्भावस्था(molar pregnancy), तुलनात्मक रूप से दुर्लभ स्थिति है, जिसमें गर्भाधान के समय निषेचित अंडे में असामान्यताएं होने की वजह से भ्रूण का विकसित होना या बचना असंभव हो जाता है।
  • गर्भावस्था के अंतिम चरण में अपरा( placenta) से जुड़ी समस्या का संकेत

जब आप अपनी डॉक्टर से बात करें, तो उन्हें विस्तार से अपनी स्थिति बताएं, जैसे कि:

  • स्त्राव हल्का गुलाबी था, भूरा था या फिर चटक लाल था
  • प्रवाह हल्का था या तेज और साथ में खून के थक्के या ऊत्तक भी थे या नहीं
  • आपको दर्द, चक्कर, बुखार या ठिठुरन महसूस हुई
  • स्त्राव सोखने के लिए सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने की जरुरत पड़ी। कितने नैपकिन आपने इस्तेमाल किए वह भी डॉक्टर को बताएं।

 

गर्भवती होने में सामान्यत: कितना समय लगता है?

कुछ दंपत्तियों की मासिक जनन क्षमता (फर्टिलिटी) काफी ज्यादा होती है। इसका मतलब है कि किसी भी महीने में उनके गर्भधारण की संभावना औसत से अधिक होती है।  उनके घर जल्दी खुशखबरी आने की उम्मीद होती है, शायद कुछ ही महीनों के अंदर।

वहीं, कुछ दंपत्तियों की मासिक जनन क्षमता कम होती है। इसका मतलब है कि किसी भी महीने में उनके गर्भधारण की संभावना औसत से कम है। उन्हें गर्भवती होने में शायद ज्यादा समय लग सकता है।

 

इन बातों का रखें खास ख्याल

  • भारी वजन न उठाएं  
  • ज्यादा डांस न करें
  • सीढ़ियां नहीं कूदें
  • हील न पहनें
  • ज्यादा ड्राइविंग न करें
  • लंबी यात्रा न करें
  • रस्सी न कूदें
  • कमर से झुकने के बजाय घुटने मोड़कर बैठें
  • भीड़भाड़, प्रदूषण और रेडिएशन वाली जगह पर जाने से बचें
  • ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर ट्रैवलिंग करने से भी बचें
  • मॉर्निंग सिकनेस से बचें

 

मिसकैरेज होने के मुख्य कारण

मुख्य कारण है गर्भ की पहली तिमाही में क्रोमोजोम असामान्यता की , यानि कि शिशु के क्रोमोसोम में गड़बड़ी का होना।

  • मिसकैरेज लक्षण
  • वजन घटना
  • पीठ दर्द होना
  • 5 से 20 मिनट के अंतराल में पेट में मरोड़े होना
  • गुलाबी रंग या सफेद रंग का म्यूकस
  • गर्भावस्था के लक्षणों में कमी का दिखना
  • खून का थक्का गुप्तांग से आना
  • तेज दर्द आदि का होना

कैसे बचाव करें

  • तनाव को अपने पर हावी न होने दें।
  • अपने खान-पान में पौष्टिक चीजों का इस्तेमाल करें।
  • शराब व धूम्रपान से दूर रहें।
  • वजन को नियंत्रित रखें।
  • फोलिक एसिड वाली चीजों का सेवन करें।
  • किसी भी दवा को लेने से पहले डाक्टर की सलाह लें।
  • शरीर को ज्यादा न हिलाना।
  • पेट को सुरक्षित रखना।

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