गर्भावस्था के दौरान जो सबसे महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य होती है वो है मेडिकल प्रैक्टिस। नौ महीने की  मेडिकल प्रैक्टिस ही आपको सुविधाजनक प्रसव तक पहुंचाती है और आपके हाथों में आती है नन्ही जिन्दगी। ऐसे में कैसा हो मेडिकल प्रैक्टिस ? आइए जानें-

अकेली मेडिकल प्रैक्टिस :- यहां डॉक्टर अकेला काम करता है। यदि उसे कहीं बाहर जाना पड़े तो उसके बदले में कोई दूसरा डॉक्टर अपनी सेवाएं देता है। कोई फैमिली डॉक्टर या प्रसूति विशेषज्ञ इसी श्रेणी में आ सकता है। नर्स व दाइयां इनके साथ मिलकर काम करती हैं। इनके साथ रहने से यह फायदा होगा कि वे हर मुलाकात में आपको ज्यादा बेहतर तरीके से जान जाएंगे इसलिए आपको प्रसव के समय सब कुछ काफी आरामदेह लगेगा।

नुकसान यह है कि डॉक्टर कहीं बाहर चले जाएं और पीछे से आपको प्रसव पीड़ा आरंभ हो जाए तो? क्योंकि आप भी नहीं जानतीं कि यह प्रक्रिया कब शुरू हो जाएगी। हालांकि वे इंतजाम तो कर जाएंगे लेकिन वह पर्याप्त न हुआ तो। एक दूसरा नुकसान यह है कि आपको गर्भावस्था के दौरान महसूस हो सकता है कि डॉक्टर के साथ मामला नहीं जम रहा यानी आपको सही देखरेख व सलाह नहीं मिल रही,ऐसे में आपको नए सिरे से डॉक्टर की तलाश करनी होगी।

डॉक्टर समूह (ग्रुप मेडिकल प्रैक्टिस) :- इस प्रक्रिया में दो या दो से अधिक मरीज की देखरेख करते हैं। वे बारी-बारी से मरीज को देखते हैं। हालांकि आप यही कोशिश करती हैं कि उसी डॉक्टर के पास जांच के लिए जाएं जो आपको सबसे सयाना लगता है। फिर गर्भावस्था के आखिर में वे मिलकर आपकी जांच करते हैं। पारिवारिक चिकित्सक व प्रसूति विशेषज्ञ इस सूची में आ सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपकी सभी डॉक्टरों से जान-पहचान हो जाएगी और डिलीवरी रूम में आपको अनजाना चेहरा नहीं दिखेगा।

नुकसान यह होगा कि आप अपने प्रिय डॉक्टर को डिलीवरी के समय पास चाहेंगी लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग डॉक्टरों की राय से आप बेचैन हो जाएंगी या आपको तसल्ली मिलेगी, यह आपकी सोच पर निर्भर करता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चिकित्सा संगठन कार्य :- इस कार्यान्वयन में डॉक्टर व प्रसूति विशेषज्ञ के साथ नर्स दवाइयां भी शामिल होती हैं। इसके फायदे व नुकसान भी सामूहिक कार्य की तरह ही हैं। एक फायदा यह है कि आपको नर्स या दाई की ओर से अतिरिक्त समय व राय मिल सकती है। आपके पास विकल्प भी होगा कि दाई के साथ-साथ डॉक्टर भी प्रसव के समय मौजूद रहें व किसी भी आपातकाल को संभाल लें।

मातृत्व केंद्र-बर्थ सेंटर प्रैक्टिस :- यहां प्रशिक्षित नर्स ही सब संभालती हैं। डॉक्टर को जरूरत पड़ने पर ही बुलाया जाता है। कई अस्पतालों में भी ये बर्थ सेंटर होते हैं, जहां कम खतरेवाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव किया जाता है। इन जगहों पर जाने का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यहां खर्च कम होता है।

नुकसान यह है कि कोई परेशानी होने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना होगा या प्रसव के दौरान जरूरत पड़ने पर किसी अजनबी डॉक्टर से प्रसव कराना होगा।

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