Office Stress and Hormone System: तनाव और घबराहट आपके हार्मोनल बैलेंस को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह न सिर्फ नींद, मूड और ऊर्जा को बिगाड़ता है, बल्कि मोटापा, डायबिटीज और अन्य समस्याओं की जड़ भी बनता है।
हमारी व्यस्त दिनचर्या, बढ़ता काम का दबाव और देर रात तक जगने की आदत- ये सब आज की आधुनिक लाइफस्टाइल के हिस्से बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन आदतों का
सबसे गहरा असर आपके हार्मोन्स पर पड़ता है? शरीर के भीतर चलने वाले ये साइलेंट मैसेंजर्स न केवल आपकी नींद, मूड और ऊर्जा को प्रभावित करते हैं, बल्कि वजन, शुगर, बीपी और मानसिक स्थिति पर भी अपना सीधा असर डालते हैं। डायबिटीज, मोटापा, थायराइड एवं हार्मोन विशेषज्ञ डॉ. राजेश अग्रवाल से हमने जाना कि कैसे तनाव और नींद की कमी मिलकर शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देते है
और इसके दूरगामी परिणाम हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे पड़ते हैं। इस लेख में उनके अनुभवों और सलाह के आधार पर हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जीवनशैली में किन छोटे-छोटे बदलावों से आप अपने हार्मोन्स को संतुलित रख सकते हैं ताकि आप न केवल सेहतमंद
रहें, बल्कि जीवन को बेहतर तरीके से जी भी सकें।
हार्मोन है शरीर के केमिकल मैसेंजर
डॉ. राजेश अग्रवाल के अनुसार, हार्मोन्स हमारे शरीर के भीतर कुछ खास ग्रंथियों से निकलने वाले केमिकल्स होते हैं, जो शरीर के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चाहे वह शारीरिक विकास हो, मानसिक हो या सेक्सुअल डेवलपमेंट- हर प्रक्रिया में हार्मोन्स का सीधा दखल होता है।
ये हार्मोन ही हमारे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, शुगर लेवल, नींद की क्वालिटी और मूड को
रेग्युलेट करते हैं।
हर परिस्थिति में हमारे शरीर की प्रतिक्रिया हार्मोन्स के जरिए होती है। जैसे- अगर कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में है तो स्ट्रेस हार्मोन निकलते हैं, जो बीपी और हार्ट रेट बढ़ा सकते हैं और ब्लड शुगर को भी प्रभावित करते हैं।
तनाव से कैसे बिगड़ते हैं हार्मोन्स
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि तनाव चाहे किसी भी प्रकार का हो- मानसिक, शारीरिक, सामाजिक या आर्थिक – ये सभी शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन को सक्रिय करते हैं। इसके साथ ही सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम भी एक्टिव हो जाता है, जिससे हृदय गति, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ जाते हैं।
अगर ये तनाव लंबे समय तक बना रहे तो शरीर में ओबेसोजेनिक एनवायरनमेंट बन जाता है, यानी ऐसा माहौल जो मोटापा बढ़ाने में मदद करता है। तनाव से इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जिससे डायबिटीज और वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
देर रात तक जागना है एक खतरनाक चक्र
आज की टेक्नोलॉजी-सेंट्रिक लाइफस्टाइल में लोग देर रात तक जागते हैं मोबाइल, लैपटॉप, टीवी या इंटरनेट की वजह से। लेकिन डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि जब शरीर को शारीरिक थकान नहीं होती, तो नींद भी नहीं आती। ऐसे में व्यक्ति गैजेट्स पर समय बिताता है, जिससे नींद और भी प्रभावित
होती है।
इससे एक चक्र बनता है- जब फिजिकल एक्टिविटी कम होती है तो थकान नहीं होती, थकान नहीं होती तो नींद नहीं आती, नींद नहीं आती तो व्यक्ति गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल करता है और इस वजह से नींद और भी कम हो जाती है।
नींद न आने की स्थिति में बेचैनी, घबराहट और करवटें बदलना आम हो जाता है। नींद से जुड़ा मुख्य हार्मोन मेलाटोनिन है, जो इस डिसरह्रश्वशन से बुरी तरह प्रभावित होता है।
हार्मोन गड़बड़ होने के संकेत नहीं होते
हार्मोन्स को न तो देखा जा सकता है और न ही इनके गड़बड़ होने के सीधे संकेत मिलते हैं कि कौन-सा हार्मोन असंतुलित है।
इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने फैमिली डॉक्टर से खुलकर बातचीत करे। हार्मोन टेस्ट्स की जरूरत लक्षणों, तकलीफों और फिजिकल पैरामीटर्स के आधार पर तय की जाती है।
पुरुष और महिलाएं हार्मोन्स के मामले में कैसे अलग
डॉ. अग्रवाल का मानना है कि हार्मोनल साइंस दोनों के लिए समान है, लेकिन महिलाओं की बॉडी स्ट्रक्चर ऐसी होती है कि उनमें हार्मोनल बदलाव अधिक होते हैं जैसेपीरियड्स, प्रेगनेंसी, मेनोपॉज आदि। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को ज्यादा ध्यान से समझना चाहिए। वहीं, पुरुषों को लेकर डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि भले ही उन्हें शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत माना जाता हो, लेकिन वे भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं क्योंकि वे अपनी भावनाओं को एक्सप्रेस नहीं करते।
महिलाओं में रोने जैसी अभिव्यक्ति तनाव से राहत दिला देती है, जबकि पुरुषों में ये दबा
हुआ तनाव गंभीर असर डाल सकता है।
फिजिकल एक्टिविटी करें: हर दिन कम से कम 30-40 मिनट तक शारीरिक व्यायाम करें। वॉकिंग, साइकलिंग, योगा, डांसिंग, स्विमिंग जो आपको पसंद हो।

हार्मोन्स संतुलित रहें, इसके लिए अपनाएं ये आदतें
संतुलित आहार लें: फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। हेल्दी, संतुलित डाइट लें जिसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स का अच्छा कॉम्बिनेशन हो।
चाय-कॉफी की लिमिट तय करें: कैफीन से स्ट्रेस बढ़ सकता है। इसलिए इसकी अधिकता से बचें। सीमित मात्रा में ही लें।
गैजेट्स का सीमित इस्तेमाल करें: टेक्नोलॉजी का सिर्फ उतना ही उपयोग करें, जितना जरूरी हो। खाली समय में गैजेट्स की बजाय दोस्तों से बातचीत करें, बाहर घूमें, परिवार से संवाद करें। इससे तनाव कम होता है।
लेट नाइट ईटिंग से बचें: खाने और सोने के बीच कम-से-कम तीन घंटे का अंतर रखें। खाने के बाद दो किलोमीटर पैदल चलना आदर्श है, ताकि पाचन बेहतर हो और नींद अच्छी आए।
ऑफिस में लगातार बैठने से बचें: डेस्क जॉब करने वालों को हर 1-2 घंटे में थोड़ा ब्रेक लेना चाहिए। शरीर को स्ट्रेच करें, वॉर्मअप करें, ऑफिस में ही टहलें।
मेडिटेशन और प्राणायाम करें: कुर्सी पर बैठकर भी गहरी सांस लेना, अंगड़ाई लेना, माइंडफुलनेस एक्सरसाइज तनाव को कम करने में मददगार होती है।
खुश रहें, हंसें और जीवन को एंजॉय करें: डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि इतना डिसिह्रिश्वलन में न रहें कि लाइफ नीरस हो जाए। अपनी रुचियों को समय दें, हंसी-मजाक करें। इससे हार्मोन बैलेंस बना रहता है।
बैलेंस बनाना है तो जीवनशैली बदलनी होगी: अगर आप अपने हार्मोन्स को संतुलित रखना चाहती हैं तो आपको अपनी जीवनशैली ठीक करनी होगी।
(आभार- लेख डॉ. राजेश अग्रवाल, डायबिटीज, मोटापा, थायराइड एवं हार्मोन विशेषज्ञ, उन्हें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिल चुका है, से बातचीत पर आधारित है।)

“नींद, तनाव, खानपान, एक्सरसाइज और टेक्नोलॉजी इन पांच पहलुओं में सुधार लाकर ही आप एक स्वस्थ और हार्मोन-संतुलित जीवन जी सकते हैं।”
